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मुकंदरा में टाइगर की सुरक्षा पर सवाल, कोटा रेंज के जंगलों में 4 साल में 7,417 पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी

मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ बसाने की तैयारियां अंतिम दौर में चल रही हैं, लेकिन जंगल में पेड़ों की लगातार...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:10 AM IST

मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ बसाने की तैयारियां अंतिम दौर में चल रही हैं, लेकिन जंगल में पेड़ों की लगातार जारी अवैध कटाई ने बाघों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसकी गवाही खुद वन विभाग के आंकड़े देते हैं, जो हाल ही में सार्वजनिक किए गए।

हकीकत यह है कि कोटा रेंज में रोज औसतन 5 पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने आज तक कोई खास एक्शन नहीं लिया। पिछले 4 साल में विभाग ने खुद ऐसे 7 हजार 417 प्रकरण रजिस्टर्ड किए। हालांकि पेड़ इससे ज्यादा काटे गए क्योंकि यह सिर्फ वो आंकड़े हैं, जिनको विभाग ने दर्ज किया। विभाग चुपचाप बैठा रहा इसलिए आंकड़े साल-दर-साल बढ़ रहे हैं। मुकंदरा टाइगर रिजर्व का हिस्सा कोटा, बूंदी, झालावाड़ और चित्तौडगढ़ के वन क्षेत्रों में फैला है, जिसमें सर्वाधिक हिस्सा कोटा रेंज में है। कोटा जिले में करीब 1,315 वर्ग किलोमीटर जंगल आता है, जिसमें मुकंदरा टाइगर रिजर्व का हिस्सा 447 वर्ग किलोमीटर है। कोटा जिले के लगभग 33 फीसदी जंगलों में मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व बसाया गया है।

कोटा रेंज में ऐसे बढ़ती चली गई अवैध कटाई

कोटा रेंज के जंगलों में शामिल मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की घोषणा होने के पहले से यहां पेड़ों की अवैध कटाई होती रही है। घोषणा वर्ष 9 अप्रैल 2013 में हुई। घोषणा के बाद विभाग ने यहां पर “टाइगर कमिंग सून’ जैसे बोर्ड लगा दिए, लेकिन यहां पेड़ों की अवैध कटाई के मामले बंद नहीं हुए। अधिकारी हर बार दावा करते हैं, लेकिन दावों की पोल विभागीय आंकड़े ही खोल रहे हैं। कोटा जिले के जंगलों में वर्ष 2014-15 में 1 हजार 204, वर्ष 2015-16 में 3 हजार 532, वर्ष 2016-17 में 870 पेड़ों की अवैध कटाई हुई। वहीं, वर्ष 2017-18 में यहां अब तक 1 हजार 811 पेड़ों की अवैध कटाई हो चुकी है। वहीं, कोटा जिले में इन चार सालों में 1746 पेड़ों की अवैध कटाई हुई।

भास्कर

बिग ब्रेकिग

टाइगर रिजर्व में मानवीय दखल पर रोक नहीं लगा पाया वन विभाग, कोटा रेंज के जंगलों में रोज काटे जा रहे हैं 5 पेड़, विभाग की आेर से सार्वजनिक किए गए आंकड़ो ंसे सामने आई हकीकत

टाइगर रिजर्व में खेती.... रिजर्व एरिया में अभी भी 12 गांव हैं जो शिफ्ट नहीं किए जा सके हैं। यहां बाकायदा खेती भी होती है।

फैक्ट : प्रदेश में कोटा रेंज दूसरे नंबर पर

रेंज 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18 कुल

1. उदयपुर 2719 2678 1978 1348 8723

2. कोटा 1204 3532 870 1811 7417

3. जयपुर 592 529 425 283 1829

4. जोधपुर 168 96 70 51 385

5. बीकानेर 220 453 190 278 1141

6. भरतपुर 282 536 297 426 1541

7. अजमेर 789 758 594 367 2508

23544पेड़ों की अवैध कटाई हुई 4 वर्षों में राजस्थान में

1746पेड़ काटे गए कोटा जिले में इन चार वर्षों में

7417पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी कोटा रेंज के इन चार वर्षों में

भास्कर ने पहले भी दिखाया था आइना

विभाग द्वारा “टाइगर कमिंग सून’ जैसे बोर्ड लगाने के बाद भास्कर ने ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी। 19 मार्च 2016 को प्रकाशित खबर में भास्कर ने खुलासा किया था कि मुकंदरा में पेड़ ठूंठ हो रहे हैं। भास्कर टीम मुकंदरा के 18 किलोमीटर अंदर तक पाल माताजी और झामरा क्षेत्र में जाकर जब हकीकत देखी तो वहां हालात चौंकाने वाले थे। तब वहां दर्जनों जगह ठूंठ नजर आए, जो पेड़ों की अवैध कटाई के जीते-जागते सबूत थे। हकीकत उजागर करने के बाद भी विभाग के अफसर नहीं चेते और उसके बाद भी यहां पेड़ों की अवैध कटाई नहीं रुकी।

सुरक्षा पर बड़े सवाल

वन विभाग अभी तक टाइगर रिजर्व में मानवीय दखल पर रोक नहीं लगा सका है। यहां तक कि रिजर्व एरिया में अभी भी 12 गांव हैं जो शिफ्ट नहीं किए जा सके हैं। यहां बाकायदा खेती भी होती है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई भी होती है। 20 मार्च को रणथंभौर टाइगर रिजर्व में ग्रामीणों के दबाव में ही टी 28 को ट्रेंक्यूलाइज किया गया था, जिसके चलते उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा 19 मार्च को सरिस्का में खेत की फेंसिंग में फंसने से एसटी 11 की मौत हो गई थी। एक्सपर्ट्स के अनुसार रिजर्व एरिया में मानवीय दखल पर रोक नहीं लगाई गई तो मुकंदरा में भी ऐसी स्थिति हो सकती है।

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