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ज्ञान से ही मन को वश में करना संभव: विभंजन सागर

कोटा| रामपुरा में आयोजित धर्मसभा में विभंजन सागर ने कहा कि जीव प्रति समय कर्मों का बंध करता है और कर्मों के फल भोगता...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:10 AM IST

ज्ञान से ही मन को वश में करना संभव: विभंजन सागर
कोटा| रामपुरा में आयोजित धर्मसभा में विभंजन सागर ने कहा कि जीव प्रति समय कर्मों का बंध करता है और कर्मों के फल भोगता है। इसलिए आचार्य कहते हैं कि हर पल, हर क्षण अपने परिणामों को शांत रखो, विशुद्ध रखो एवं अपने समय का सदुपयोग करो।

मुनि ने बताया कि संसार में दो प्रकार के जीव होते हैं एक तो सम्यकदृष्टि और दूसरा मिथ्यादृष्टि। दोनों की उपयोग धारा अलग-अलग होती है। एक समय का सही उपयोग करता है और एक समय का गलत उपयोग करता है। मुनि ने बताया कि श्रुत ज्ञान द्वारा हम अपने मन को वश में कर सकते है, श्रुत का सागर अपार है। सर्वार्थसिद्धि के देव सदा अपना समय तत्व चर्चा में व्यतीत करते हैं। जिस चर्चा को एक बार कर लेते है उसे दूसरी बार नहीं करते। मुनि ने बताया कि सम्यकदृष्टि और मिथ्यादृष्टि में बस यही अंतर होता है कि सम्यकदृष्टि संसार में रहना नहीं चाहता, मिथ्यादृष्टि संसार को छोड़ना नहीं चाहता जैसे तोता पिंजरे में नहीं रहना चाहता और कबूतर पिंजरे को छोड़ना नहीं चाहता।

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