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एमबीएस में स्ट्रोक यूनिट की ऑक्सीजन लाइन चोरी, रात भर सिलेंडरों के सहारे रहे 3 मरीज

एमबीएस की स्ट्रोक यूनिट (न्यूरो आईसीयू) में मंगलवार शाम बड़ा हादसा होते-होते रह गया। चोर इस यूनिट की ऑक्सीजन लाइन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:40 PM IST

एमबीएस की स्ट्रोक यूनिट (न्यूरो आईसीयू) में मंगलवार शाम बड़ा हादसा होते-होते रह गया। चोर इस यूनिट की ऑक्सीजन लाइन ही काटकर ले गए। सप्लाई बंद हुई तो पलभर में ही मरीज असहज हो गए। हालांकि समय पर पता लग जाने और रिजर्व में ऑक्सीजन सिलेंडर रखे होने से मरीजों को तत्काल सिलेंडरों पर शिफ्ट कर दिया गया।

अस्पताल में ऑक्सीजन लाइन चोरी का यह पहला मामला सामने आया है। अस्पताल प्रशासन इस मामले में स्मैकचियों पर शक जता रहा है। करीब 24 घंटे बाद बुधवार शाम यह लाइन ठीक होने के बाद ऑक्सीजन की आपूर्ति सामान्य हो सकी। इस अवधि में मरीजों को सिलेंडरों से ही ऑक्सीजन दी गई। इस वार्ड में न्यूरो के गंभीर मरीज एडमिट होते हैं। घटना के वक्त एक मरीज वेंटीलेटर पर था और दो मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही थी।

मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर लगाते कर्मी।

आंखों देखी: रिजर्व सिलेंडर से चलाया काम

घटना के वक्त इस आईसीयू में नर्स कमलेश मीणा व बनवारी सुमन मौजूद थे। इन दोनों ने ही गंभीर मरीजों की जान बचाई। भास्कर ने इन्हीं से पूरा घटनाक्रम जाना, उन्हीं के शब्दों में सुनिए- जैसे ही लाइन काटी तो बाहर बैठे तीमारदारों को आवाज आई। उन्होंने किसी को लाइन काटकर भागते भी देखा। इसके बाद आईसीयू में अंदर आकर ऑक्सीजन मीटर देखे और बिना कोई समय गंवाए सबसे पहले यहां रिजर्व में रखे चारों सिलेंडर निकलवाए। उस वक्त तीन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत थी, तीनों को सिलेंडर पर शिफ्ट किया और फिर उच्चाधिकारियों को सूचना दी। हमने 4 एक्स्ट्रा सिलेंडर मंगवाकर रख लिए। 20 मिनट बाद प्लांट से भी बड़े सिलेंडर आ गए।

यह मामला गंभीर इसलिए...

यहां से काटी ऑक्सीजन लाइन

सुरक्षा व्यवस्था पर 2 बड़े सवाल

यूं तो यह बमुश्किल 15-20 हजार रुपए का कॉपर चोरी होने की घटना है, लेकिन यह इसलिए बड़ी है, क्योंकि इससे कई जिंदगियां जुड़ी हुई थी। यदि यही घटना देर रात होती और समय पर पता नहीं लगता तो शायद लोगों की जान पर बन आती। रिजर्व में सिलेंडर रखे होते हैं, लेकिन ये छोटे सिलेंडर भी ज्यादा समय तक नहीं चल पाते। अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट अधीक्षक कार्यालय की तरफ है, जहां से सभी आईसीयू व अन्य संवेदनशील वार्डों को ऑक्सीजन की सप्लाई होती है।

1 अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। वार्डों से मोबाइल चोरी व आउटडोर में जेबतराशी की वारदातें रोजाना होती हैं। सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था भी पुख्ता नहीं है, जबकि खुद कलेक्टर निर्देश दे चुके कि हर वार्ड में सीसीटीवी होना चाहिए।

2 अस्पताल के भीतर घुसे चोर आसानी से लाइन काटकर ले गए और किसी को भनक तक नहीं लगी। जबकि अस्पताल में प्रोटेक्शन फाेर्स के नाम पर अलग से 10 बॉर्डर होमगार्ड के जवान तैनात हैं, जो पुलिस के अधीन काम करते हैं।

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