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साड़ी कारखाने से 12 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया

कोटा | बाल कल्याण समिति, पुलिस और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार दोपहर साड़ी के कारखाने में काम कर रहे 12...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:40 PM IST

कोटा | बाल कल्याण समिति, पुलिस और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार दोपहर साड़ी के कारखाने में काम कर रहे 12 नाबालिगों को मुक्त करवाया। नाबालिग यहां पिछले 6 माह से पुरानी साड़ियों की कटिंग, रिपेयरिंग, रफू जैसे काम कर रहे थे। यहां से पुरानी साड़ियों को धुलाई करके इस तरह रिपेयर करने के बाद वापस मार्केट में बेचा जा रहा था। बालकों को मुक्त करवाने के बाद कारखाने के मालिक के खिलाफ बालश्रम करवाने के मामले में रेलवे कॉलोनी थाने में एक मुकदमा दर्ज करवाया गया है।

बाल कल्याण समिति अध्यक्ष हरीश गुरुबक्शानी ने बताया कि सूचना मिली थी कि स्टेशन क्षेत्र के एक कारखाने में बालश्रम चल रहा है। उसकी पहले रैकी की गई, निगरानी रखी गई और फिर बुधवार को छापामार कार्रवाई की गई। रेलवे कॉलोनी क्षेत्र के शास्त्री नगर कॉलोनी में जोया फैशन नाम से साड़ियों का कारखाना संचालित होता है। जिसे मशरूर खां पुत्र महबूब खां संचालित करता है। जब वहां मानव तस्करी विरोधी यूनिट और श्रम विभाग की टीम के साथ गए तो देखा की बच्चों से काम करवाया जा रहा था। कुल 17 बालकों से काम करवाया जा रहा था, जिसमें 12 बालकों की उम्र नियमों के विरुद्ध 15 से 17 साल की थी। सभी बालक यूपी के सीतापुर के रहने वाले हैं, जिनकी आईडी भी वहां से मिली है। 5 बालकों के दस्तावेज देखने पर उन्हें बालिग पाया गया।

6 माह से कर रहे काम, रहना-खाना सब कारखाने में

मानव तस्करी विरोधी यूनिट के धर्मराज सिंह ने बताया कि यहां पर पिछले 6 माह से बालकों से बालश्रम करवाया जा रहा था। बालक कारखाने में ही रहते थे, सोते और खाते-पीते थे। बालकों को काम के एवज में 3 से 5 हजार रुपए अलग-अलग हिसाब से दिए जाते थे। बालकों से पुरानी साड़ियों की धुलाई, फिनिशिंग, कटिंग, रफू, रिपेयरिंग जैसा काम करवाया जा रहा था। बालकों को सुबह 8 से रात 11 बजे तक करीब 15 घंटे से ज्यादा काम काम करवाया जाता था।

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