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परमात्मा का नाम लेना ही काफी नहीं, एहसास होना चाहिए : भाटिया

कोटा| हरि का नाम लेना सदा सुखदायी और अभिमान, क्रोध दुखदायी होता है। परमात्मा का नाम लेना ही काफी नहीं, बल्कि हर पल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:45 PM IST

कोटा| हरि का नाम लेना सदा सुखदायी और अभिमान, क्रोध दुखदायी होता है। परमात्मा का नाम लेना ही काफी नहीं, बल्कि हर पल इसका अहसास भी होना चाहिए। यह बात गुमानपुरा स्थित न्यू काॅलोनी में संत निरंकारी सत्संग भवन में संत समागम में होशियारपुर के संत विनोद कुमार भाटिया ने कही।

भाटिया ने कहा कि जिस पेड़ पर जितने ज्यादा फल लगते हैं, वह उतना ही नीचे झुकता जाता है। उन्होंने कहा कि आज जिन पुरातन महापुरुषों को याद किया जाता है, उन्होंने अपने जीवन में ईश्वर को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं। अगर आपके मन में सामने वाले का दुख देखकर दुख होता है तो यही जानिए कि ईश्वर निरंकार की विशेष कृपा है। हाथ जब भी उठे हाथ जोड़ने के लिए उठे।

किसी भी इंसान का असली धन उसके अच्छे गुण होते हैं, जिसमें सद्‌गुणों का अभाव होता है, सत्यनिष्ठ व्यक्ति के पास सुख स्वयं दौड़ आते हैं। हमें चाहे कितनी ही कठिनाई आए सत्य प्रबुद्ध का सहारा नहीं छोड़ना चाहिए। कभी भी भूलकर भी किसी का दिल ना दुखाना, अगर आप किसी का दिल दुखाते हैं तो यह जानिए की सद्गुरु का दिल दुखा रहे हैं। संत मनोहर लाल ने आभार व्यक्त किया।

विनोद भाटिया

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