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मेज नदी एनीकट पर नहीं लगे स्लूज गेट, एनीकट की भराव क्षमता प्रभावित

Kota News - लाखेरी| शहर की जलापूर्ति के लिए पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बनाए गए मेज नदी एनीकट पर स्लूज गेट नहीं ं लगने से...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 05:10 AM IST
मेज नदी एनीकट पर नहीं लगे स्लूज गेट, एनीकट की भराव क्षमता प्रभावित
लाखेरी| शहर की जलापूर्ति के लिए पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए बनाए गए मेज नदी एनीकट पर स्लूज गेट नहीं ं लगने से इसकी भराव क्षमता प्रभावित होने लगी है। समय रहते एनीकट पर नही तकनीकी के गेट नहीं लगे तो आने वाले समय में एनीकट की उपयोगिता पर खतरा मंडराने लगेगा। वहीं इसकी भराव क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाएगी।

सरकार ने लाखेरी की पेयजल समस्या के स्थाई समाधान के लिए पांच वर्ष पहले नयागांव स्थित मेज नदी पर एनीकट का निर्माण करवाया था। तय योजना के अनुसार नदी पर एनीकट तो बन गया, लेकिन इस एनीकट के पानी को रोकने के लिए नई तकनीकी के गेट लगने थे। जिस पर कोई कार्य नहीं हुआ। वर्तमान में एनीकट पुराने सिस्टम से पानी रोकने के लिए लोहे की चादर का ही प्रयोग किया जा रहा है। जिनको खोलना ओर ऊपर नीचे आसानी से नहीं किया जा सकता है। जिसके चलते नदी में बहकर आने वाली सिल्ट ओर मिट्टी एनीकट की अप स्ट्रीम पर जमा हो रही है।

लाखेरी। मेज नदी एनीकट जहां सलु गेट लगाने है।

यह है एनीकट की लंबाई चौड़ाई

नया गांव स्थित मेज नदी पर सरकार ने लगभग चार करोड़ रुपए खर्च करके एनीकट बनाया।लगभग डेढ़ मीटर ऊंचाई तथा सात मीटर लंबा एनीकट में 64 एमसीएफटी पानी का ठहराव होता है, जिसमें लगभग 22 किमी तक पानी के ठहराव का दावा किया गया था।

यह होना था गेट का सिस्टम

मेज नदी पर एनीकट बनने के साथ ही मंदिर की तरफ स्लूज गेट लगने थे। जिनको आसानी से ऊपर नीचे किया जा सकता था। इसके चलते नदी में जमा मिट्टी को बाहर निकालने ओर अप स्ट्रीम की तरफ जमा कचरे को पानी के बहाव के साथ आगे निकालने में आसानी रहती। स्लूज गेट को आसानी से ऊपर नीचे किया जा सकता है जिससे कचरा मिट्टी पानी के साथ आसानी से बह जाता है, लेकिन निर्माण एजेंसी द्वारा पांच वर्ष से यह कार्य अटका रखा है। मेज नदी एनीकट पर गेट नहीं लगने से इसकी भराव क्षमता प्रभावित होने लगी। एनीकट पर स्थाई गेट लगने से नदी में पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी ओर कचरा एनीकट के अप स्ट्रीम की तरफ जमा हो जाता है तथा पानी के ठहराव के साथ यह भी जमा हो जाती है। जिससे इसकी भराव क्षमता कम होने लगी है। इसका असर एनीकट में स्टोर होने वाली पानी की मात्रा पर पड़ेगा। सरकार ने शहर की पेयजल समस्या के समाधान के लिए भले ही एनीकट का निर्माण करा दिया हो, लेकिन इसके नई तकनीकी के गेट नहीं लगने से इसकी उपयोगिता पर ही संकट आ सकता है। एनीकट में मिट्टी ओर सिल्ट कचरा भरने से एनीकट मे पर्याप्त पानी का ठहराव नहीं पाएगा। जिसके चलते आने वाले वर्षों में शहर मे जलापूर्ति की समस्या फिर खड़ी हो सकती है।


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