Hindi News »Rajasthan »Kota» Fifth Day Of The Docter Strike, Half Of The Patients Did Not Even Come

भर्ती मरीजों को 24 घंटे बाद भी नहीं देख रहे सीनियर डॉक्टर, 40 से ज्यादा ऑपरेशन टले

हड़ताल का 5वां दिन, आउटडोर में आधे मरीज भी नहीं आए, वार्ड भी हो गए खाली।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 08:13 AM IST

  • भर्ती मरीजों को 24 घंटे बाद भी नहीं देख रहे सीनियर डॉक्टर, 40 से ज्यादा ऑपरेशन टले
    +1और स्लाइड देखें
    कोटा।डॉक्टरों का हठ आम मरीजों की जान पर भारी पड़ने लगा है। पिछले 5 दिन से चल रही सेवारत चिकित्सकों और रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के चलते अब मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों की भी व्यवस्था बिगड़ने लगी है। सबसे ज्यादा दिक्कत भर्ती रोगियों को हो रही है, 24-24 घंटे में भी उनके पास डॉक्टर नहीं पहुंच पा रहे।
    - नए अस्पताल में मेडिकल वार्ड में भर्ती बारां के प्रभुलाल (28) को देखने 24 घंटे बाद भी कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा। उसे गुरुवार शाम को भर्ती कराया गया था। इसी अव्यवस्था के चलते एमबीएस नए अस्पताल में शुक्रवार को पहली बार पलंग खाली नजर आए। जबकि, इस सीजन में जमीन पर भी मरीज भर्ती थे।
    - दोनों अस्पतालों के अधीक्षकों ने खुद स्वीकार किया कि बेड ऑक्यूपेंसी घटकर आधी रह गई है। भास्कर ने आंकड़े लिए तो पता चला कि अस्पतालों आउटडोर में भी अप्रत्याशित कमी आई है। अब मरीज सरकारी अस्पतालों में ही नहीं रहे, सीधे प्राइवेट में जा रहे हैं।
    - प्रशासन की तरफ से वैकल्पिक व्यवस्था के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन वे महज कागजी साबित हो रहे हैं। स्थिति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार सुबह कलेक्टर रोहित गुप्ता एमबीएस एडीएम (प्रशासन) सुनीता डागा जेकेलोन अस्पताल पहुंचे और मरीजों से उपचार के बारे में जानकारी ली।
    - नए अस्पताल में रोज आउटडोर 2500 से 3000 रहता है, शुक्रवार को 1950 मरीज ही आए। 600 पलंग के अस्पताल में सिर्फ 300 पेशेंट भर्ती हैं। मेडिसिन के वार्डों में भी पलंग खाली है, जहां मरीज बेंचों पर भर्ती थे।
    - एमबीएस में आउटडोर 3500 से 4000 चल रहा था, लेकिन शुक्रवार को 1740 मरीज आए। 700 पलंग हैं, 4 दिन पहले एक भी खाली नहीं था, शुक्रवार को भर्ती मरीजों की संख्या 400 तक रह गई।
    80 की बजाय 41 ऑपरेशन ही हुए
    - एमबीएस,नए अस्पताल जेकेलोन में 40 से ज्यादा ऑपरेशन टाले गए। हालांकि निश्चेतना विभाग का कहना है कि विभागों से ऑपरेशन योग्य मरीजों की सूची ही कम ली गई। नए अस्पताल में 14, एमबीएस अस्पताल में 15 तथा जेकेलोन में 12 सर्जरी हुई। आम दिनों में 80 से ज्यादा ऑपरेशन होते हैं।
    - निश्चेतना विभाग के एचओडी डॉ. एससी दुलारा ने बताया कि सीनियर रेजीडेंट असिस्टेंट प्रोफेसरों को इमरजेंसी ड्यूटियों में लगाना पड़ रहा है, ऑपरेशन में डॉक्टरों की कमी हो रही है। हालांकि फिलहाल व्यवस्था बनाकर रख रहे हैं। हमारा प्रयास है कि इमरजेंसी में कोई भी ऑपरेशन नहीं टालना पड़े।
    नॉन क्लीनिकल ब्रांचों से लगाए डॉक्टर
    मेडिकलकॉलेज की नॉन क्लीनिकल ब्रांचों से भी डॉक्टर आउटडोर में लगाए गए हैं। नए अस्पताल में फार्माकोलॉजी, पीएसएम एनाटोमी जैसे विभागों से 6 डॉक्टर लगाए गए हैं। अधीक्षक डॉ. देवेंद्र विजयवर्गीय ने बताया कि इन विभागों के डॉक्टरों को भी इलाज करने का पूरा अनुभव होता है। वहीं, 2 सेवारत चिकित्सक डॉ. अमित सारस्वत डॉ. सरोज गुप्ता रोजाना काम पर रहे हैं। हमारे यहां 19 सेवारत चिकित्सक हैं, जिनमें से 17 काम पर नहीं रहे।
  • भर्ती मरीजों को 24 घंटे बाद भी नहीं देख रहे सीनियर डॉक्टर, 40 से ज्यादा ऑपरेशन टले
    +1और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Kota

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×