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सांड के हमले में घायल वृद्धा की मौत कागजों में ही दबा मवेशियों का मुद्दा

Bhaskar News | Last Modified - Nov 05, 2017, 08:01 AM IST

डेढ़ साल में 5 बोर्ड मीटिंगों में हर बार उठा मामला, समाधान नहीं निकाला पालिका ने।
  • सांड के हमले में घायल वृद्धा की मौत कागजों में ही दबा मवेशियों का मुद्दा
    रामगंजमंडी(कोटा)।शहर की सड़कों पर अभी तक छोटी-मोटी दुर्घटनाओं को अंजाम दे रहे मवेशी अब जानलेवा हो चुके हैं। राजस्थान मिल परिसर स्थित मंदिर जा रही एक वृद्धा को सांड ने उठाकर फेंक दिया। घायल वृद्धा ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।नगर पालिका में 5 साल के दौरान हुई पांच बोर्ड बैठकों में पार्षद आवारा मवेशियों का मुद्दा उठा चुके हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कान में जूं तक नहीं रेंगी।
    - दिन हो या रात, हर समय सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। मवेशियों के कारण दुर्घटनाएं होना तो आम बात हो गई है। यह मवेशी आपस में लड़कर लोगों को कई प्रकार से नुकसान पहुंचा रहे हैं। कभी वाहन चालक को गिरा रहे हैं तो कभी पैदल राहगीर इनकी चपेट में रहे हैं।
    - इससे शहर में मवेशियों के कारण कई लोग जख्मी हो चुके हैं और वाहन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके बावजूद समस्या को दूर करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा सके और अब मवेशियों ने एक वृद्धा की जान ले ली।
    - यहां रहने वाली जमनाबाई (85) पत्नी भैरूलाल राठौर प्रतिदिन राजस्थान मिल परिसर स्थित मंदिर जाया करती थी। करीब एक सप्ताह पूर्व जब वे मंदिर गईं तो कॉलोनी परिसर में घूम रहे एक सांड ने जमनाबाई को उठाकर फेंक दिया। इससे उनकी कमर की हड्डी टूट गई और कई जगह चोटें आईं।
    - लोगों ने उन्हें बचाया और परिजनों को सूचना दी। जमनाबाई को यहां अस्पताल में भर्ती करवाया गया। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें कोटा रैफर कर दिया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
    पहले भी एक वृद्धा को दो बार बनाया था निशाना, टूट गई थी हाथ-पैर की हड्डियां
    - राजस्थान मिल कॉलोनी में मंदिर के आसपास विचरण करने वाले मवेशी श्रद्धालुओं के लिए घातक हो रहे हैं। इसी कॉलोनी में रहने वाली शांतिबाई(70) पत्नी मोहनलाल गर्ग को 3 जुलाई को सांडों ने दो बार उठाकर फेंक दिया था। इससे उनके दोनों हाथ, एक पैर कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। शांतिबाई को इससे पहले भी मवेशी घायल कर गए थे।
    कुछ संगठन आगे आए, पालिका ने भी कुछ दिन चलाया था अभियान
    नगरपालिका में दो साल पहले नया बोर्ड बना था। तब भी मवेशियों को हटाने के लिए लोगों की मांग पर पहल की गई। पालिका ने कुछ मवेशियों को पकड़ा तो उनके मालिक छुड़वाने गए। बाद में युवाओं के संगठन ने भी मवेशियों को शहर के बाहर भेजने की पहल की, लेकिन नतीजा नहीं निकला। दरअसल ज्यादातर मवेशी पालक पशु का उपयोग करने के बाद उन्हें आवारा छोड़ देते हैं।
    बोर्ड बैठक में उठता है मुद्दा और वहीं दब जाता है
    नगरपालिकाबोर्ड की हर बोर्ड बैठक में सड़कों पर मवेशियों का मुद्दा उठता रहता है। शुक्रवार को हुई नगरपालिका बोर्ड बैठक में पार्षद महावीर पोरवाल ने शहर की सड़कों पर मवेशियों सुअरों के आंतक का मुद्दा उठाया था। उन्होंने मवेशियों के कारण होने वाले हादसों का भी जिक्र किया। ईओ सत्यनारायण राठौर ने कहा था कि मवेशियों के लिए दो-तीन बार टेंडर प्रक्रिया की गई, लेकिन संबंधित ठेकेदार नहीं आने से समस्या हल नहीं हो सकी।
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Web Title: Wounded Elderly Death In The Attack Of Bull
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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