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फुटबॉल में दम दिखा रहीं बेटियां, 1 साल में 15 ने खेला नेशनल टूर्नामेंट

रविवार को फाइनल मैच के साथ ही एक महीने से चल रहे वर्ल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट का समापन हो गया।

Dainik Bhaskar

Jul 16, 2018, 06:53 PM IST
Daughters showing up in football

कोटा. रविवार को फाइनल मैच के साथ ही एक महीने से चल रहे वर्ल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट का समापन हो गया। शहर में भी अब फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ रही है। कोटा की बेटियों ने रविवार को अंडर 17 राज्य महिला जूनियर महिला फुटबॉल टूर्नामेंट में दूसरा स्थान हासिल किया। ये उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कोटा की टीम ने पहली बार इस टूर्नामेंट में भाग लिया था। शहर में 150 से ज्यादा लड़कियां फुटबॉल खेलती हैं। इन पर इंटरनेशनल प्लेयर रोनाल्डो, मैसी और नेमार का जादू छाया हुआ है। खेल के साथ ये पढ़ाई में भी अव्वल हैं। पिछले एक साल में 15 से ज्यादा लड़कियां नेशनल तक खेल आई हैं। कोटा में फुटबाल की प्रेक्टिस करने वाली लड़कियां

10 साल से लेकर 25 साल उम्र तक की हैं।

- महिला कोच एवं नेशनल खिलाड़ी मीनू सोलंकी ने बताया कि एक साल पहले कोटा में बालिका फुटबॉल एकेडमी बनी और लड़कियों ने खेलना शुरू किया। पहले साल यहां 20 गर्ल्स थीं। सरकार ने फुटबॉल में कई सुविधाएं देना शुरू कर दिया। इससे लड़कियों में फुटबॉल के प्रति चार्म बढ़ा। एकेडमी के अलावा शहर भर में अलग-अलग जगहों पर करीब 100 लड़कियां फुटबाल खेल रही हैं। इसमें स्टेडियम में एक क्लब में ही अकेले 60 से अधिक गर्ल्स हैं। इससे फुटबॉलर तीरथ सांगा और नेशनल प्लेयर मधु विश्नोई चला रहे हैं। वे बच्चियों को तैयार कर रहे हैं। मधु विश्नोई एकेडमी में भी निशुल्क गोल कीपिंग की ट्रेनिंग देती हैं। सोलंकी खुद भी मानती हैं कि पिछले सालों में इक्का-दुक्का लड़कियां की फुटबॉल खेला करती थीं, लेकिन अब शहर में लगातार संख्या बढ़ रही है। इसमें फुटबॉल संघ और खेल में मिलने वाली लोकप्रियता और सरकारी सुविधाएं भी हैं। जब कोई लड़की फुटबॉल खेलने लगती हैं तो उन पर रोनाल्डो और मैसी जैसा बनने का चार्म बढ़ जाता है। जो जितना अच्छा खेलती है, उसे इन नामों से ही पुकारा जाता है। दूसरी लड़कियां इन्हें खेलता देखती हैं तो वे भी इस खेल से जुड़ती हैं।

कीर्तिका पढ़ाई में अव्वल और बेस्ट गोलकीपर

- अकेडमी की कीर्तिका ने दसवीं में 80 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किए और साइंस ली। उसके बाद भी वे फुटबॉल खेल रही हैं। वे गोलकीपर हैं। भरतपुर में रविवार को बेस्ट गोलकीपर चुनी गईं। वे सुबह कोचिंग करती हैं और शाम को फुटबॉल की प्रैक्टिस पर आती हैं। उसका सपना खिलाड़ी के साथ-साथ फिजियोथेरेपिस्ट बना है।

पिता बॉक्सर और बेटी फुटबॉलर

- खुशी भाटी ने 10वीं में 75 फीसदी अंक हासिल किए और अब 11वीं में साइंस ली। उसके पिता बॉक्सर रहे हैं। लेकिन खुशी का रुझान फुटबॉल की तरफ हो गया। पीएम मोदी के ऊर्जा क्लब में नेशनल खेल चुकी हैं।
- 14 साल की मुस्कान पर रोनाल्डो का जादू: 14 साल की मुस्कान नागर 8वीं में पढ़ती हैं और पढ़ाई में भी अच्छी हैं। पिता भी फुटबॉलर रहे हैं। इसलिए वे फुटबॉल के खिलाड़ियों को भी अच्छी तरह से जानती है। उनमें रोनाल्डो जैसा खेलने की ललक है।

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