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कोटा के सरकारी अस्पताल में दिसंबर में 100 नवजातों की मौत, मायावती का प्रियंका पर तंज- यूपी की तरह वहां भी जातीं

2 वर्ष पहले
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जेकेलोन अस्पताल में लगातार बच्चों की मौतें होने से राजस्थान सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर है। - Dainik Bhaskar
जेकेलोन अस्पताल में लगातार बच्चों की मौतें होने से राजस्थान सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर है।
  • 30-31 दिसंबर काे जेके लोन अस्पताल में 9 नवजातों की माैत हुई, दिसंबर में नवजाताें की माैत का आंकड़ा 100 तक पहुंचा, सरकार ने जांच कमेटी बनाई
  • जांच कमेटी ने रिपोर्ट में नवजातों की माैत का कारण अस्पताल के वेंटिलेटर-वार्मर समेत अन्य उपकरणों का खराब हाेना बताया था
  • प्रसूति वाॅर्ड में 4 दिन की बच्ची की मौत के बाद लोगों ने हंगामा किया, इसके बाद विधायक शर्मा ने 15 रूम हीटर, 50 कंबल दिए थे
  • डॉक्टर ने कहा- मृतकों में दूसरे अस्पताल से आने वाले बच्चे ज्यादा, नवजात के लिए बिना उपकरणों के सफर बेहद खतरनाक होता है

जयपुर/कोटा. थे।

जालीदार खिड़कियों से आती है हवा
डॉक्टर हर मौत पर अपने तर्क दे रहे हैं, लेकिन अब अस्पताल में भर्ती नवजातों के लिए कड़ाके की ठंड जानलेवा साबित हो रही है। बुधवार को प्रसूति विभाग के ई-वाॅर्ड में हुआ। यहां पार्वती पत्नी देवप्रकाश ने 4 दिन पहले ऑपरेशन से स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। 4 दिन तक बच्ची उनके साथ थी। सुबह 9 बजे डॉक्टरों ने राउंड लिया, तब तक बच्ची स्वस्थ थी, लेकिन 11 बजे उसकी माैत हाे गई। बच्ची के दादा महावीर ने बताया कि हम अंदर जाने का प्रयास करते रहे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने जाने नहीं दिया। जब तक पहुंचे तो बच्ची सुन्न पड़ी थी। आशंका है कि ठंड से बच्ची की मौत हो गई।

रैफर होकर आने वाले बच्चों को बचाना सबसे मुश्किल: डॉक्टर
जेके लोन में शिशु रोग विभाग के एचओडी डॉ. एएल बैरवा ने बताया कि हमारे यहां मरने वाले 70 से 80% बच्चे न्यू बॉर्न होते हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा संख्या उन बच्चों की होती है, जो दूसरी जगह से रैफर होकर आते हैं। कड़ाके की ठंड में नवजातों को दूसरी जगह से यहां लाना खतरनाक है।

नवजातों में 3 तरह की समस्याएं देखी जा रहीं: 

  • हाइपोथर्मिया : यह बच्चे में तापमान की कमी से होती है, जिसे ट्रांसपोर्ट इंक्यूबेटर या कंगारू मदर केयर से मेंटेन किया जा सकता है।
  • हाइपोग्लाइसीमिया : ग्लूकोज की कमी से होती है। बच्चे को दूध पिलाते हुए लाएं। यदि दूध नहीं है तो 10% ग्लूकोज फीड कराएं।
  • हाइपोक्सिया : ऑक्सीजन की कमी। ट्रांसपोर्टेशन के दौरान ऑक्सीजन का इंतजाम होना चाहिए, तभी बचाया जा सकता है।

एक्सपर्ट व्यू: 37 डिग्री तापमान के बजाए 4 डिग्री में नवजात
प्रसव के बाद नवजात को जिंदा रखने के लिए 36.5 से 37.5 डिग्री तापमान होना जरूरी है। इससे कम तापमान में हाइपोथर्मिया का खतरा रहता है, जो बच्चों के लिए जानलेवा होता है। फिलहाल कोटा का तापमान 4 डिग्री तक पहुंच चुका है। प्रसव वार्ड में अपनी मां के साथ भर्ती सभी नवजात इसी तापमान में रह रहे हैं। वहां न हीटर है, न वार्मर। ऐसे में नवजात कैसे जिंदा रहेंगे? यह समझ से परे है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नवजात जैसे ही मां के गर्भ से बाहर आता है तो उसे तुरंत उसका तापमान मेंटेन करना बुनियादी जरूरत होती है। कारण नवजात 37 डिग्री तापमान वाले मां के गर्भ से सीधे 4 डिग्री तापमान में आता है। इससे उसके दिमाग को नुकसान हो सकता है।

विधायक ने रूम हीटर दिए, मंत्री ने कहा- पुख्ता इंतजाम करें
कोटा से दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने गायत्री परिवार के जनसहयोग से 15 रूम हीटर और 50 कंबल की व्यवस्था कराई। विधायक ने अधीक्षक से कहा- मरीजों को 2-2 कंबल मुहैया करवाएं। बच्चों के वार्डों में रूम हीटर लगवाएं। विधायक ने कहा- हमने अस्पताल प्रबंधन को कहा है कि कोई भी जरूरत होने पर तत्काल हमें बताएं। हम जनसहयोग से इंतजाम कराएंगे। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने भी अधीक्षक डॉ. एससी दुलारा को निर्देशित किया कि सर्दी से बचाव के लिए अस्पताल में पुख्ता इंतजाम करें।

मायावती का ट्वीट-

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