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अवैध संपत्ति मामले में डॉक्टर दंपती के साथ 92 साल के ससुर-90 की सास को भी जेल

कोटा : 20 साल पुराने मामले में एसीबी कोर्ट का फैसला, सास-ससुर भी दोषी

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 04:08 PM IST
मोहिनी शर्मा (दाएं): टीटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा. लि. की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थी। पति आरपी शर्मा की आय छिपाई।  सजा: 7 वर्ष कठोर कारावास, 50 लाख जुर्माना सजा सुनते ही जोर-जोर से रोने लगी। मोहिनी शर्मा (दाएं): टीटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा. लि. की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थी। पति आरपी शर्मा की आय छिपाई। सजा: 7 वर्ष कठोर कारावास, 50 लाख जुर्माना सजा सुनते ही जोर-जोर से रोने लगी।

कोटा. आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के 20 साल पुराने मामले में कोटा एसीबी कोर्ट ने 17 मई को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जज अश्विनी विज ने मुख्य आरोपी कोटा के टीटी हॉस्पिटल के संचालक डॉ. आरपी शर्मा, उनकी पत्नी मोहिनी शर्मा समेत 7 आरोपियों पर 1.25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। शर्मा दंपती को 7-7 साल, 3 आरोपियों को 5-5 साल तथा 2 को 3-3 साल की सजा सुनाई। सजा सुनते ही डॉ. शर्मा की पत्नी मोहिनी कोर्ट में रो पड़ी। बाद में इन्हें कोटा सेंट्रल जेल भेज दिया। भ्रष्टाचार के मामले में प्रदेश में यह पहला फैसला बताया जा रहा है। 92 वर्ष के ससुर और 90 साल की सास को भी हुई सजा...

मामले में 8 आरोपी थे, इनमें से एक आरोपी गोपीलाल की ट्रायल के दौरान मौत होने उसके खिलाफ कार्रवाई ड्रॉप कर दी गई। वहीं डॉ. शर्मा के सास-ससुर तेजकरण शर्मा व चंद्रकांता शर्मा को 3-3 साल तथा ससुराल पक्ष की ही गीतांजलि शर्मा को 5 साल की सजा सुनाई। आरोपी किशनगोपाल तथा बसंत विहार रोड केशवपुरा के असलम पठान को 5-5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। डॉ. शर्मा दंपती पर 50-50 लाख तथा अन्य पांचों पर 5-5 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

डॉ. शर्मा के सास-ससुर की सजा कम होने से उन्हें जमानत मिल गई, जबकि अन्य पांचों आरोपियों को फैसले के बाद जेल भेज दिया गया। असल में केस में ये सभी आरोपी इसलिए बने थे, क्योंकि इन्होंने डॉ. शर्मा की एक फर्जी कंपनी बनाने में मदद की और उसके बोर्ड में विभिन्न पदों पर रहे। टीटी हॉस्पिटल कोटा के सबसे पुराने निजी अस्पतालों में से है।

कोर्ट का फैसला सुनने के बाद गीतांजलि और मोहिनी शर्मा रोने लगी।

किसकी क्या भूमिका रही...

गीतांजलि शर्मा: डॉ. आरपी शर्मा के ससुराल पक्ष की ही मेंबर है, इन्होंने भी अवैध आय छिपाने में मदद की। ये भी कंपनी में शेयर होल्डर थी।
सजा: 5 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना।

मोहिनी शर्मा: टीटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा. लि. की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थी। पति द्वारा अर्जित अवैध आय को छिपाने में मदद की।
सजा: 7 वर्ष कठोर कारावास, 50 लाख जुर्माना।

डॉ. आरपी शर्मा: लोकसेवक होते हुए अवैध आय अर्जित की और टीटी हॉस्पिटल में निवेश किया। एक कंपनी बनाई, जो उनके कंट्रोल में थी।
सजा: 7 वर्ष कठोर कारावास, 50 लाख जुर्माना।

तेजकरण शर्मा: 92 वर्ष उम्र है, डॉ. शर्मा के ससुर हैं। ये भी कंपनी में डायरेक्टर थे। इन्होंने दामाद द्वारा अर्जित अवैध आय छिपाने में मदद की।
सजा: 3 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना।

चंद्रकांता शर्मा: 90 वर्ष उम्र है, डॉ. शर्मा की सास हैं। ये कंपनी की शेयर होल्डर थीं। दामाद द्वारा अर्जित अवैध आय छिपाने में मदद की।
सजा: 3 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना

असलम पठान: ये टीटी हॉस्पिटल का कर्मचारी था और कंपनी में डायरेक्टर था। इसने भी अवैध आय छिपाने में डॉ. शर्मा की मदद की।
सजा: 5 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना।

किशन गोपाल शर्मा: ये भी कंपनी में डायरेक्टर था। इसने भी डॉ. शर्मा की अवैध आय छिपाने में मदद की।
सजा: 5 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना


भास्कर खास: 107 फाइलों से खुला राज....

151 फीसदी ज्यादा पाई गई थी संपत्ति, पूरी तरह डॉ. शर्मा के नियंत्रण में थी कंपनी

डॉ. शर्मा की कंपनी के सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए। अपने स्पष्टीकरण में डॉ. शर्मा ने कहा था कि हॉस्पिटल की संपत्तियों से मेरा लेना-देना नहीं है। यह एक बोर्ड द्वारा कंपनी बनाकर संचालित किया जाता है। मैंने टीटी हॉस्पिटल से एक क्लीनिक किराए पर लिया हुआ है। जबकि जिन व्यक्तियों द्वारा कंपनी के शेयर खरीदकर पूंजी वृद्धि बताई गई, उनके शेयर डॉ. शर्मा के आवास से जब्त हुए।

जिन व्यक्तियों द्वारा ऋण देना बताया गया, वे भी फर्जी मिले। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को समय-समय पर पूंजी बढ़ाने, डायरेक्टर्स के बदलने की सूचना नहीं दी गई। जांच से पता चला कि उक्त हॉस्पिटल व सारा साजो-सामान डॉ. शर्मा का ही है। डॉ. शर्मा की अवैध आय को छिपाने में अन्य 6 आरोपियों ने मदद की। कंपनी के रिकॉर्ड में कोष्ठक में डॉ. शर्मा का नाम लिखा था। कंपनी की ओर से बिजली-पानी जैसे सरकारी महकमों से उन्होंने पत्र व्यवहार भी किया।

डॉ. आरपी शर्मा - 1982 से 1998 तक एमबीएस अस्पताल में बतौर चिकित्सा अधिकारी कार्यरत रहे थे। एसीबी ने 11 अक्टूबर 1998 को डॉ. शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और 13 अक्टूबर 1998 को उनके आवास व अस्पताल की तलाशी ली गई। एसीबी ने पाया कि डॉ. शर्मा ने सेवाकाल में 27,13,035 जुटाए, जिनमें से 5,06,925 रुपए खर्च मानते हुए उनकी शुद्ध बचत 22,06,925 रुपए बनती थी। जबकि उस वक्त उनकी कुल संपत्तियों की कीमत 55,42,429 रुपए निकली, जो उनकी वैध आय से 33,35,504 रुपए यानी 151% ज्यादा थी।


पत्र में पिता ने लगाया संपत्ति हड़पने का आरोप

एसीबी की तलाशी में डॉ. आरपी शर्मा के आवास व अस्पताल से 107 फाइलें जब्त की गई थी। ये ऐसी फाइलें थी, जो खुद पूरे फर्जीवाड़े की गवाह बनी। स्क्रूटनी के बाद एसीबी ने 65 फाइलों को सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया। इन्हीं में से एक फाइल ऐसी थी, जिसे पढ़कर तत्कालीन एसीबी अधिकारियों की भी आंखें फटी रह गई। इस फाइल में डॉ. शर्मा को उनके वृद्ध पिता रामगोपाल शर्मा तथा भाइयों द्वारा लिखे गए पत्र थे। पत्रों में पिता ने अपने बेटे पर संपत्ति हड़पने व उनकी कोई देखभाल नहीं करने जैसे कई संगीन आरोप लगा रखे थे।


एक पर्चा भी इस फाइल में था, जो पिता द्वारा बेटे-बहू के खिलाफ छपवाया गया था और इसमें उनके व्यवहार से आहत होकर भूख हड़ताल पर बैठने की सूचना थी। ज्यादातर पत्रों के अंत में लिखा था-"आपका दुर्भाग्यशाली पिता'। वहीं भाई ने भी पत्रों में संपत्ति हड़पने जैसे आरोप लगा रखे थे। इस फाइल का यूं तो केस से सीधे तौर पर कोई कनेक्शन नहीं था, लेकिन डॉ. शर्मा व उनकी पत्नी की कारगुजारियों को साबित करने के लिए यह फाइल कोर्ट में पेश की गई थी। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की तरफ से 16 तथा बचाव पक्ष की तरफ से 6 गवाह पेश किए गए। इसमें वर्ष 2004 में कोर्ट में चालान पेश किया गया था।


कलेक्टर को नियुक्त किया प्रशासक, अस्पताल संचालन के लिए बनेगी कमेटी

कोर्ट ने आदेश में कहा है कि टीटी हॉस्पिटल को राज्य सरकार में निहित किया जाता है। कलेक्टर कोटा को प्रशासक नियुक्त किया जाता है। वे प्राचार्य मेडिकल कॉलेज से परामर्श कर दक्ष लोगों की कमेटी गठित कर हॉस्पिटल को हैंडओवर-टेकओवर करेंगे। हैंडओवर नहीं करने पर अस्पताल को एज्यूम कर लिया जाए। प्रशासक 3 माह में कोर्ट को पालना रिपोर्ट दें। कमेटी अस्पताल में आने वाले मरीजों के इलाज की व्यवस्था करे और आय का पूरा ब्यौरा रखे। लाभ राशि राज्य सरकार के कोष में जमा कराए।


नीलाम करें आरोपियों की चल-अचल संपत्ति

कोर्ट ने जुर्माना वसूली के लिए एसपी एसीबी व जिला कलेक्टर को आदेशित किया है। एसीबी एसपी व कलेक्टर एक कमेटी गठित करें, जो आरोपियों की संपत्तियों को नीलाम कर राशि को 3 माह में राजकोष में जमा कराएं।

डॉ. आरपी शर्मा:  लोकसेवक होते हुए अवैध आय अर्जित की और टीटी हॉस्पिटल में निवेश किया। एक कंपनी बनाई, जो उनके कंट्रोल में थी। सजा : 7 वर्ष कठोर कारावास, 50 लाख जुर्माना। डॉ. आरपी शर्मा: लोकसेवक होते हुए अवैध आय अर्जित की और टीटी हॉस्पिटल में निवेश किया। एक कंपनी बनाई, जो उनके कंट्रोल में थी। सजा : 7 वर्ष कठोर कारावास, 50 लाख जुर्माना।
तेजकरण शर्मा:  डॉ. आरपी शर्मा के ससुर। 92 वर्षीय। कंपनी में डायरेक्टर थे। दामाद द्वारा अर्जित अवैध आय छिपाने में मदद की। सजा : 3 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना तेजकरण शर्मा: डॉ. आरपी शर्मा के ससुर। 92 वर्षीय। कंपनी में डायरेक्टर थे। दामाद द्वारा अर्जित अवैध आय छिपाने में मदद की। सजा : 3 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना
चंद्रकांता शर्मा: डॉ. शर्मा की सास है। 90 वर्ष उम्र है। ये कंपनी की शेयर होल्डर थी। दामाद की अवैध आय छिपाने में मदद की। सजा : 3 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना। उम्र को देखते हुए  जमानत मिली। चंद्रकांता शर्मा: डॉ. शर्मा की सास है। 90 वर्ष उम्र है। ये कंपनी की शेयर होल्डर थी। दामाद की अवैध आय छिपाने में मदद की। सजा : 3 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना। उम्र को देखते हुए जमानत मिली।
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मोहिनी शर्मा (दाएं): टीटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा. लि. की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थी। पति आरपी शर्मा की आय छिपाई।  सजा: 7 वर्ष कठोर कारावास, 50 लाख जुर्माना सजा सुनते ही जोर-जोर से रोने लगी।मोहिनी शर्मा (दाएं): टीटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा. लि. की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थी। पति आरपी शर्मा की आय छिपाई। सजा: 7 वर्ष कठोर कारावास, 50 लाख जुर्माना सजा सुनते ही जोर-जोर से रोने लगी।
डॉ. आरपी शर्मा:  लोकसेवक होते हुए अवैध आय अर्जित की और टीटी हॉस्पिटल में निवेश किया। एक कंपनी बनाई, जो उनके कंट्रोल में थी। सजा : 7 वर्ष कठोर कारावास, 50 लाख जुर्माना।डॉ. आरपी शर्मा: लोकसेवक होते हुए अवैध आय अर्जित की और टीटी हॉस्पिटल में निवेश किया। एक कंपनी बनाई, जो उनके कंट्रोल में थी। सजा : 7 वर्ष कठोर कारावास, 50 लाख जुर्माना।
तेजकरण शर्मा:  डॉ. आरपी शर्मा के ससुर। 92 वर्षीय। कंपनी में डायरेक्टर थे। दामाद द्वारा अर्जित अवैध आय छिपाने में मदद की। सजा : 3 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्मानातेजकरण शर्मा: डॉ. आरपी शर्मा के ससुर। 92 वर्षीय। कंपनी में डायरेक्टर थे। दामाद द्वारा अर्जित अवैध आय छिपाने में मदद की। सजा : 3 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना
चंद्रकांता शर्मा: डॉ. शर्मा की सास है। 90 वर्ष उम्र है। ये कंपनी की शेयर होल्डर थी। दामाद की अवैध आय छिपाने में मदद की। सजा : 3 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना। उम्र को देखते हुए  जमानत मिली।चंद्रकांता शर्मा: डॉ. शर्मा की सास है। 90 वर्ष उम्र है। ये कंपनी की शेयर होल्डर थी। दामाद की अवैध आय छिपाने में मदद की। सजा : 3 वर्ष कठोर कारावास, 5 लाख जुर्माना। उम्र को देखते हुए जमानत मिली।
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