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दो माह में 20 हजार क्विंटल से अधिक अधिशेष बचा, फिर भी मई में उठा लिया पूरा आवंटन

मुख्यमंत्री का गृह जिला होने से रसद विभाग के अधिकारियों व डीलरों द्वारा इसका पूरा फायदा उठाया जा रहा है। डिमांड...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 02:55 AM IST

दो माह में 20 हजार क्विंटल से अधिक अधिशेष बचा, फिर भी मई में उठा लिया पूरा आवंटन
मुख्यमंत्री का गृह जिला होने से रसद विभाग के अधिकारियों व डीलरों द्वारा इसका पूरा फायदा उठाया जा रहा है। डिमांड करने पर सरकार ने 3 माह में अधिक 102 से लेकर 110 प्रतिशत गेहूं का आवंटन किया।

राशन वितरण के बाद 2 महीने से लगातार गेहूं शेष बच रहा है, लेकिन इसका समर्पण करना तो दूर तीसरे महीने भी पूरा आवंटन उठा लिया गया। प्रदेश में झालावाड़ व बारां ही ऐसे जिले हंै, जिन्होंने अधिशेष बचने के बाद समर्पण नहीं किया। दूसरे जिलों द्वारा राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे आवंटन में से अधिशेष काटकर उप आवंटन किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों की डिमांड पर मार्च में 55 हजार 650 क्विंटल गेहूं का आवंटन किया। अप्रैल में 56 हजार 170 क्विंटल का आवंटन किया गया। राशन वितरण के बाद मार्च में 49 हजार 160 क्विंटल ही वितरण हुआ और 6 हजार 580 क्विंटल अधिशेष बचा। इसी प्रकार अप्रैल में 56 हजार 170 क्विंटल आवंटन हुआ। पोस मशीनों से 43 हजार 280 क्विंटल वितरण हुआ और 12 हजार 890 क्विंटल अधिशेष बचा। यानी दो माह में करीब 19 हजार 470 क्विंटल गेहूं अधिशेष बचा, लेकिन उसका समर्पण नहीं किया गया। अब मई का भी पूरा 56 हजार 340 क्विंटल गेहूं का आवंटन उठाने की तैयारी है। यह खुलासा पोस मशीनें के ही ऑनलाइन आंकड़ों में हुआ। दो माह से लगातार राशन के गेहूं का अधिशेष बच रहा है। दो महीने में 20 हजार क्विंटल गेहूं अधिशेष बचा है। इसका समर्पण नहीं करने से इसके कालाबाजारी की आशंका बढ़ गई है। इससे पहले भी पूरा का पूरा अधिशेष गायब हुआ है।

राशन का गेहूं पूरा नहीं बांटकर बचा लिया

डिमांड ज्यादा बता कालाबाजारी की आशंका

झालावाड़. शहर में स्थित राशन की दुकान।

2 महीनों से समय पर राशन के गेहूं का उठाव नहीं होने से सभी उपभोक्ता को राशन का गेहूं नहीं मिल पाया है। शेष रहे उपभोक्ता मई में राशन लेने आएंगे। इसके बाद जून वाले आवंटन में तीन महीनों में जितना अधिशेष बचेगा उसे समर्पण किया जाएगा। प्रतिभा देवठिया, डीएसओ

इन जिलों में अधिशेष काटकर किया उप आवंटन

कोटा में जयपुर मुख्यालय से आवंटन 50 हजार 560 क्विंटल गेहूं, रसद विभाग ने अधिशेष काटकर उप आवंटन किया 45 हजार 550 क्विंटल।

उदयपुर में जयपुर मुख्यालय से आवंटन 82 हजार 420 क्विंटल गेहूं, रसद विभाग ने अधिशेष काटकर उप आवंटन किया 75 हजार 420 क्विंटल।

बूंदी में मुख्यालय से आवंटन हुआ 35 हजार 260 क्विंटल, रसद विभाग ने अधिशेष काटकर उप आवंटन किया 32 हजार 690 क्विंटल का किया गया।

जयपुर मुख्यालय से आवंटन के बाद होता है उप आवंटन

खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा प्रत्येक जिलों को राशन सामग्री का आवंटन किया जाता है। इसके बाद स्थानीय रसद विभाग द्वारा अपने यहां यूनिट के हिसाब से मुख्यालय से आवंटित सामग्री में से उप आवंटन करना होता है। अन्य जिले आवंटन में से अधिशेष काटकर उप आवंटन कर रहे है, लेकिन झालावाड़ में मुख्यालय ये जारी होने वाला आवंटन ही उप आवंटन हो रहा है।

कैरी फारवर्ड भी 2 माह का

कैरी फारवर्ड नियमानुसार उपभोक्ता एक माह राशन नहीं ले पाता है तो दूसरे महीने वह दोनों महीनों का राशन ले सकता है। दूसरे महीने भी राशन नहीं ले जाता है तो एक महीने का राशन अपने आप ही लैप्स हो जाता है। रसद विभाग की माने तो कैरी फारवर्ड नियमानुसार दो महीने उन्होंने उपभोक्ता का इंतजार किया है, लेकिन मई में तो अधिशेष का समर्पण किया जाना था, लेकिन अभी तक विभाग ने नहीं किया।

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