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अस्पताल में अव्यवस्थाओं पर मुख्यमंत्री नाराज अधीक्षक-डीन को हेलीपैड बुलाकर फटकारा

सीएम वसुंधरा राजे जिले के दो दिवसीय जनसंवाद कार्यक्रम में भाग लेने के बाद गुरुवार को झालावाड़ से सांगोद के लिए...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 04:40 AM IST
सीएम वसुंधरा राजे जिले के दो दिवसीय जनसंवाद कार्यक्रम में भाग लेने के बाद गुरुवार को झालावाड़ से सांगोद के लिए रवाना हुईं। अपने दौरे के दौरान सीएम को काफी शिकायतें जिले के सबसे बड़े अस्पताल जिला चिकित्सालय के बारे में मिलीं। यहां पर हो रही अव्यवस्थाओं की शिकायतें मिली तो सीएम ने इस पर नाराजगी जताते हुए अस्पताल अधीक्षक और डीन को हेलीपेड पर तलब कर लिया। यहां पर उन्होंने अधीक्षक को फटकार लगाई और व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। सीएम के जनसंवाद कार्यक्रम और डाक बंगले में अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं की काफी शिकायतें सीएम तक पहुंची थीं। इसी को उन्होंने गंभीरता से लिया। कार्यकर्ताओं ने अधीक्षक कर्नल केके शर्मा की कार्यशैली की भी शिकायत की। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय जैन ताऊ ने भी सीएम से अधीक्षक की कार्यशैली की शिकायत की। उन्होंने सीएम को बताया कि देर रात को जब कोई पेशेंट आता है तो अधीक्षक को फोन करने के बावजूद वह डॉक्टर की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं। ऐसे में कलेक्टर को फोन करना पड़ता है तब जाकर अस्पताल में गंभीर मरीजों को डॉक्टर का इलाज मिल पाता है। इसी तरह जनसंवाद कार्यक्रम में भी अस्पताल में अव्यवस्थाओं की चर्चा होती रही। जनसंवाद में डॉक्टरों ने डीन की भी शिकायत की। इसमें बताया कि अभावग्रस्त क्षेत्र के लिए डॉक्टरों को एलाउंस दिया गया था, लेकिन डीन ने इस मामले को उलझा रखा है। जब गुरुवार को सीएम डाक बंगले से निकलीं तो वह सीधे जे मेहमी स्टेडियम पर बनाए गए हेलीपेड पर पहुंची। यहां उन्होंने अस्पताल अधीक्षक और डीन को तलब किया। सीएम वहां अधीक्षक पर नाराज हुईं और उनको फटकार लगाकर व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।


झालावाड़. डाग बंगले पर स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की जानकारी लेतीं वसुंधरा राजे।

अस्पताल की ये 3 अव्यवस्थाएं... जिन्हें अधीक्षक दूर नहीं कर सके

1. दवाइयों की खरीद कभी समय पर नहीं हुई, हर समय 12 से 15 प्रकार की दवाइयां कम: अस्पताल में पिछले करीब एक साल से दवाइयों की खरीद समय से नहीं हो पा रही है। इसी का नतीजा है कि हर समय 12 से 15 प्रकार की दवाइयां कम रहती हैं। निशुल्क दवा योजना के बावजूद लोगों को बाजार से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं।

2. भीषण गर्मी में डक्टिंग शुरू नहीं करवा पाए, खुद एसी में बैठे रहे, मरीज गर्मी में परेशान होते रहे:

इस साल भीषण गर्मी में डक्टिंग समय पर शुरू नहीं हो पाई। एक ओर अधीक्षक के रूम में एसी चलता रहा वहीं दूसरी ओर अस्पताल में भर्ती मरीज पसीने में तरबतर होते रहे। डक्टिंग शुरू करने में अधीक्षक टैंडर करने में देरी करते गए। ऐसे में प्रशासन के दखल के बाद डक्टिंग शुरू हो पाई।

3. सांसद कोष से आई लाइफ सेविंग एम्बुलेंस, निशुल्क पहुंचाना रहता है मरीजों को, अधीक्षक स्वीकृति ही नहीं देते:

सांसद कोष से अस्पताल में आधुनिक लाइफ सेविंग एम्बुलेंस दी गई है। इसमें स्टाफ भी लगा दिया गया है, लेकिन गंभीर पेशेंट आते हैं तो अधीक्षक इसे बाहर ले जाने की स्वीकृति ही नहीं दे पाते हैं। ऐसे चार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। एक मामले में तो गंभीर मरीज के परिजनों ने कोटा से एम्बुलेंस मंगवाई, जिसके उन्हें 14 हजार रुपए देने पड़े जबकि अधीक्षक स्वीकृति देते तो निशुल्क ही एम्बुलेंस की सुविधा मिल जाती।