• Hindi News
  • Rajasthan
  • Kota
  • ट्रॉलीमैन के वेतन पर 50 हजार खर्च, फिर भी परिजन ही खींच रहे स्ट्रेचर
--Advertisement--

ट्रॉलीमैन के वेतन पर 50 हजार खर्च, फिर भी परिजन ही खींच रहे स्ट्रेचर

जिला एसआरजी अस्पताल में हर महीने ट्रॉलीमैन की सैलेरी पर करीब 50 हजार रुपए तक खर्च किए जा रहे हैं। इसके बाद भी परिजन...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 04:45 AM IST
ट्रॉलीमैन के वेतन पर 50 हजार खर्च, फिर भी परिजन ही खींच रहे स्ट्रेचर
जिला एसआरजी अस्पताल में हर महीने ट्रॉलीमैन की सैलेरी पर करीब 50 हजार रुपए तक खर्च किए जा रहे हैं। इसके बाद भी परिजन ही मरीजों को स्ट्रेचर पर खींचकर वार्डों तक पहुंचा रहे हैं। कई बार परिजनों को इसके लिए दूसरों की मदद भी लेनी पड़ती है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से कई बार शिकायत के बावजूद व्यवस्था सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं किया।

अस्पताल में ओपीडी समय के दौरान ट्रॉलीमैन यदा-कदा मिल जाते हैं, लेकिन इसके बाद नदारद रहते हैं। मरीज को इमरजेंसी से भर्ती वार्ड तक ले जाने में परिजनों को स्ट्रेचर की जरूरत होती है। ट्रॉलीमैन मिल भी जाएं तो वह परिजनों को ही स्ट्रेचर थमा देते हैं। अस्पताल अधीक्षक डॉ. केके शर्मा ने बताया कि पहले भी ट्रॉलीमैन को मरीजों को ले जाने के लिए पाबंद किया गया था। इसे दुबारा पाबंद किया जाएगा।

अव्यवस्था

जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को वार्ड तक ले जाने के लिए लगा रखे हैं ट्राॅलीमैन, समय पर नहीं मिलते-मरीज होते हैं परेशान

झालावाड़. मरीज को खुद ही स्ट्रेचर पर ले जाते परिजन।

आईडी नहीं तो स्ट्रेचर भी नहीं देते ट्राॅलीमैन

दांगीपुरा निवासी रमेश मेघवाल के परिजन ने बताया कि रमेश को एक्सीडेंट के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था। जांच के लिए मरीज को तीसरी मंजिल से नीचे लाना पड़ा तो स्ट्रेचर के लिए ट्रॉलीमैन ने आईडी मांगी। आईडी नहीं थी तो स्ट्रेचर भी नहीं दिया।

ड्यूटी वाइज लगे हैं ट्रॉलीमैन: भर्ती मरीजों को एक से दूसरे वार्ड तक पहुंचाने के लिए ट्रॉलीमैन को ड्यूटी वाइज लगा रखा है। आठ से दस कर्मचारी लगे हुए हैं। इसमें से चार कर्मचारी ओपीडी समय में रहते हैं। बाकी समय दो-दो कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है।

स्ट्रेचर को जगह पर रखना भी परिजनों की जिम्मेदारी

परिजनों से आईडी और उनका सामान लेने के बाद ट्रॉलीमैन स्ट्रेचर देते हैं। मरीज को वार्ड में लाने-ले जाने के लिए परिजनों को स्ट्रेचर लाना पड़ता है। बाद में स्ट्रेचर ओपीडी गेट के पास छोड़ना होता है। इसके बाद ही उसकी आईडी या सामान वापस दिया जाता है।

X
ट्रॉलीमैन के वेतन पर 50 हजार खर्च, फिर भी परिजन ही खींच रहे स्ट्रेचर
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..