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82 वर्षीय मरीज का एक ही सिटिंग में दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण, नए अस्पताल में हुई जटिल सर्जरी

न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के अस्थि रोग विभाग में 82 वर्षीय मरीज के दोनों घुटनों का सफल प्रत्यारोपण किया गया है।...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 04:00 AM IST
82 वर्षीय मरीज का एक ही सिटिंग में दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण, नए अस्पताल में हुई जटिल सर्जरी
न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के अस्थि रोग विभाग में 82 वर्षीय मरीज के दोनों घुटनों का सफल प्रत्यारोपण किया गया है। सबसे अहम बात यह है कि एक ही सिटिंग में दोनों घुटनों का ऑपरेशन किया गया है, जो आम तौर पर नहीं हो पाता।

अस्थि रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरपी मीणा ने बताया कि महावीर नगर थर्ड निवासी रिटायर्ड टीचर ब्रह्मानंद दाधीच (82) को पिछले करीब 15 साल से दोनों घुटनों में तकलीफ थी और वे उन्हें अपने रोजमर्रा के काम करने में भी दिक्कत रहती थी। बेटे राजेश ने बताया कि पिता को प्राइवेट हॉस्पिटलों में दिखाया, जहां 4 से 5 लाख रुपए का खर्च बताया तो एक बार हम पीछे हट गए। फिर पता चला कि नए अस्पताल में भी इस तरह की सर्जरी होती है तो वहां पहुंचे। जांच के बाद डॉक्टर मीणा ने ट्रांसप्लांट के लिए कहा और बताया कि अब ड्रग प्राइज कंट्रोल के बाद इंप्लांट भी सस्ते हो गए हैं, ऐसे में 1 से सवा लाख रुपए में दोनों पैरों में ऑपरेशन हाे जाएगा। डॉ. मीणा ने बताया कि परिजनों की सहमति के बाद मरीज को कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भंवर रणवां को दिखाया, उनके द्वारा फिट बताए जाने के बाद 12 अप्रैल को सर्जरी की, जिसमें निश्चेतना विभाग के डॉ. एससी दुलारा, डॉ. संजय कालानी, डॉ. रामखिलाड़ी व डॉ. विकास गुप्ता की टीम साथ रही। मरीज अब पूरी तरह ठीक है। आम तौर पर सभी यह मानते हैं कि घुटना ट्रांसप्लांट 60 से 65 वर्ष की उम्र तक किया जाए, लेकिन इस मामले में हमने उम्र की बजाय मरीज की परेशानी देखी और ऑपरेशन सफल रहा।

2.5 सेमी के छेद से निकाला किडनी स्टोन : कोटा हार्ट इंस्टीट्यूट में एक मरीज के किडनी स्टोन का ऑपरेशन महज 2.5 सेमी के छेद से किया गया है। सर्जन डॉ. सुमित बंसल ने बताया कि आम तौर पर ऐसी सर्जरी में 10 इंच का चीरा लगाना होता है, लेकिन इस तकनीक में महज 2.5 से 3 सेमी का छेद करना पड़ा। इसे पीसीएनएल कहते हैं। मरीज को सिर्फ एक दिन भर्ती रहना पड़ा और अगले दिन छुट्टी कर दी गई।

महावीर नगर थर्ड निवासी ब्रहानंद सर्जरी के बाद पूरी तरह से हो गए ठीक

82 साल के मरीज का हुआ घुटना प्रत्यारोपण।

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