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राजस्थान बोर्ड से मान्यता मिलने के बाद भी सिलेबस इंग्लिश का

कोटा. कलेक्टर के आदेश के बाद शिक्षा विभाग का स्कूलों में निरीक्षण जारी है। प्राइवेट स्कूलों द्वारा...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 04:55 AM IST
कोटा. कलेक्टर के आदेश के बाद शिक्षा विभाग का स्कूलों में निरीक्षण जारी है। प्राइवेट स्कूलों द्वारा किताबों-काॅपियो और यूनिफार्म में अभिभावकों पर दबाव और कमीशनखोरी के मामले सामने आने के बाद यह निरीक्षण किए जा रहे हैं। टीम के निरीक्षण में एक ही दुकान से यूनिफार्म और किताब के भी खरीदने की बात सामने आई है।

सोमवार को सहायक उपनिदेशक माध्यमिक अजीत लोहारिया एडीओ माध्यमिक तारा रानी शर्मा और प्रिंसिपल जगदीश महावर की टीम ने स्कूलों का निरीक्षण किया। इनमें विनोबा भावे नगर स्थित डायमंड एकेडमी व शिवपुरा की दीपक सीनियर सेकेंडरी स्कूल व महाराणा प्रताप एकेडमी का निरीक्षण किया। इसमें सामने आया कि कुछ स्कूलों में सिलेबस इंग्लिश मीडियम का चलाया हुआ है, जबकि मान्यता राजस्थान बोर्ड से है।

टीम ने निरीक्षण के दौरान निर्धारित बिंदुओं पर भी जांच की। वहीं दूसरी ओर टीमों ने शहर के अन्य स्कूलों का भी निरीक्षण किया। मंगलवार को भी टीमों द्वारा प्राइवेट स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद पूरी रिपोर्ट अतिरिक्त संभागीय आयुक्त प्रियंका गोस्वामी को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर के आदेश पर कार्रवाई होगी।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान सामने आई गड़बड़ी

स्कूल का निरीक्षण करते शिक्षा विभाग के अधिकारी ।

स्कूलों से पुस्तकें और ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य नहीं करें : कोर्ट

कोटा। निजी स्कूलों में पाठ्य पुस्तकों पर मनमाने शुल्क पर रोक लगाने और गणवेश को लेकर दिशा निर्देश जारी कर सरकारी नियमों की पालना कराए जाने के मामले में कोर्ट ने सोमवार को शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि अनावश्यक रूप से किसी भी अभिभावक को अपने स्कूलों से पुस्तकें, स्टेशनरी, ड्रेस, टाई-बेल्ट खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को भी आदेश दिया कि यदि किसी शैक्षणिक संस्थान द्वारा इस तरह की बाध्यता की जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। यह आदेश स्थाई लोक अदालत ने वकीलों की याचिका पर दिए। वकील अविनाश ठाकुर, आशीष भारद्वाज, दिनेश गौतम, निशा शर्मा और मनीष शर्मा ने पिछले साल स्थाई लोक अदालत में एक याचिका दायर की थी। जिसमें राज्य सरकार के शासन सचिव, माध्यमिक शिक्षा जयपुर के शिक्षा सचिव, जिला कलेक्टर,जिला शिक्षा अधिकारी गुमानपुरा और गुमानपुरा भंडारी स्टेशनर्स को पार्टी बनाया था। इधर, जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने जवाब में बताया कि पाठ्य पुस्तक और गणवेश के लिए परिपत्र जारी कर दिया गया है। पाठ्य पुस्तकों के अलावा अन्य सामग्री खरीदना आवश्यक नहीं है। इधर, भंडारी स्टेशन द्वारा जवाब में बताया कि केवल अनावश्यक रूप से परेशान करने के लिए यह प्रार्थना पत्र पेश किया है।