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8 माह तक किशोर सागर में बिना फिटनेस बोटिंग कराई ठेकेदार ने, अफसरों ने जांचा तक नहीं

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 05:15 AM IST
8 माह तक किशोर सागर में बिना फिटनेस बोटिंग कराई ठेकेदार ने, अफसरों ने जांचा तक नहीं

हेमंत शर्मा | कोटा

किशोर सागर में चल रही नावों के संचालन में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। ठेकेदार 8 माह तक बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के ही नाव चलाता रहा और लोगों की जान जोखिम में डालता रहा। यूआईटी के जिन अधिकारियों पर मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी थी वो भी आंख मूंदकर बैठे रहे। भास्कर ने इस मामले की पड़ताल शुरू की तो अधिकारियों की नींद खुली। उन्होंने ठेकेदार को बुलाकर फिटनेस सर्टिफिकेट मांगा तो पहले तो वह रजिस्ट्रेशन की रसीदें दिखाता रहा, फिर आनन-फानन में सर्टिफिकेट बनवाकर लाया।

यूआईटी ने वर्ष 2015 में बनवारी यदुवंशी की फर्म रॉयल एडवेंचर को किशोरसागर तालाब में बोटिंग का ठेका दिया था। इसके लिए ठेकेदार को हर माह 1.91 लाख रुपए यूआईटी खाते में जमा करवाने थे तथा हर साल नावों की फिटनेस का प्रमाणपत्र भी जमा करवाना था। कुछ दिन तो बनवारी ने समय पर पैसा जमा करवाने के साथ ही पूरा काम नियमों के अनुसार किया, लेकिन बाद में न तो समय पर पैसा जमा करवाया न ही फिटनेस का प्रमाणपत्र लाकर दिया।



भास्कर ने पड़ताल शुरू की तो ठेकेदार ने बनवाया फिटनेस सर्टिफिकेट

रोज करीब 200 शहरवासी करते हैं बोटिंग: तालाब में 4 से 5 बोट व स्कूटर आदि चलाए जाते हैं। इसके लिए 30 अगस्त-17 तक का ही फिटनेस प्रमाणपत्र यूआईटी में जमा करवाया गया था। इसके बाद बनवारी ने फिटनेस प्रमाणपत्र जमा नहीं कराया। इस व्यवस्था को देख रहे अधिकारियों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। इस दौरान ठेकेदार बिना फिटनेस के बोटिंग कराके लोगों की जान को खतरे में डालता रहा। यहां रोजाना लगभग 150 शहरवासी बोटिंग करते हैं। भास्कर ने इस मामले की पड़ताल शुरू की तो बनवारी ने दौड़भाग करके बैक डेट में सर्टिफिकेट बनवा लिया।

भास्कर ने पूछा तो हरकत में आया विभाग

भास्कर ने इस मामले में यूआईटी के इंजीनियरों से बात की तो वे भी सकते में आ गए। उन्होंने दस्तावेज खंगाले तो फिटनेस सर्टिफिकेट ही नहीं मिला। यह भी पाया कि ठेकेदार समय पर पैसा जमा नहीं करवा रहा। उसे बुलाया तो उसने फिटनेस सर्टिफिकेट की बजाय रजिस्ट्रेशन की रसीद जरूर दिखाई। इंजीनियरों का कहना है कि ठेकेदार की खामी है, जैसे ही मामला सामने आया किशोर सागर में बोटिंग बंद करवा दी। इसे देखते हुए ठेकेदार बनवारी यदुवंशी आनन-फानन में आरटीओ पहुंचा और फिटनेस प्रमाणपत्र लाकर दे दिया।

भास्कर एक्सपर्ट

यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है फिटनेस

पब्लिक कॅरियर का कोई भी वाहन हो, समय-समय पर उसकी फिटनेस जांचना जरूरी है। ताकि उसमें बैठने वाले सुरक्षित रहें। ऐसे ही बोट की फिटनेस जांच भी की जाती है। नेवल अधिकारी से उसकी जांच करवाई जाती है, जो ये चेक करता है कि इसमें सवारी करना सुरक्षित है या घातक है।- मथुराप्रसाद मीणा, एआरटीओ

आरटीओ ने 8 माह बाद अचानक दिया फिटनेस

आरटीओ ने 8 माह तक ठेकेदार बनवारी यदुवंशी को फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं दिया। जैसे ही भास्कर ने पड़ताल की तो शपथपत्र लेकर प्रमाणपत्र जारी कर दिया। सफाई देते हुए विभाग के इंस्पेक्टर रजनीश विद्यार्थी ने कहा कि ठेकेदार ने शपथपत्र नहीं दिया था, जिससे उसका फिटनेस रोका हुआ था, 11 मई को शपथपत्र देते ही उसे प्रमाणपत्र दे दिया।



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