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गोशाला में चारे की सप्लाई के लिए निगम ने किया एक ही टेंडर, शर्त ऐसी कि 2 साल में होगा 90 लाख का नुकसान

गोशाला और कायन हाउस में पशुओं के लिए चारा, भूसा, चापड़, पशु आहार के पहले अलग-अलग टेंडर होते थे। इस बार नगर निगम ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 05:15 AM IST

गोशाला और कायन हाउस में पशुओं के लिए चारा, भूसा, चापड़, पशु आहार के पहले अलग-अलग टेंडर होते थे। इस बार नगर निगम ने चारों के टेंडर एक ही कर दिए। साथ ही शर्त जोड़ी कि जिसका टेंडर खुलेगा उसे यहां धर्मकांटा भी लगाना पड़ेगा। दो साल बाद वो धर्मकांटा नगर निगम का हो जाएगा। इसमें चार फर्मों ने हिस्सा लिया। इसमें टोटल दर जिसकी कम आई उसे ठेका दिया गया। धर्मकांटे की दर कम भरने से टोटल दर कम आ गई, लेकिन जो सबसे ज्यादा सप्लाई होने वाले आइटम थे, उनकी रेट अधिक थी। जबकि, जो अन्य फर्में थी, उनकी धर्मकांटे की रेट ज्यादा थी और अन्य आइटम की दरें कम थी। ऐसे में निगम को केवल धर्मकांटे के चक्कर में पूरे दो वर्ष तक अधिक दर पर भूसा, चारा, चापड़ और पशु आहार खरीदना पड़ेगा। इससे निगम को दो साल में करीब 90 लाख रुपए का नुकसान होगा। यदि हर आइटम के अलग-अलग टेंडर करते तो न्यूनतम दर पर खरीदा जा सकता था, जिससे ये नुकसान नहीं होता।

नगर निगम में जिन चार फर्मों ने हिस्सा लिया था, उनमें से दो फर्मों की रेट भूसे, हरा चारा में कम है तथा एक की दर चापड़ व पशु आहार में कम है। नगर निगम ने उन फर्मों से नेगोशिएशन नहीं किया। जिसकी धर्मकांटे में रेट कम थी और अन्य में अधिक थी, उससे नेगोशिएशन किया। उसके बाद टेंडर फाइनल किए गए हैं। इस नेगोशिएशन के बावजूद दूसरी फर्मों की रेट कम है। गोशाला में प्रतिदिन 70 क्विंटल भूसा, 275 क्विंटल हरा चारा, 17.50 क्विंटल चापड़ व 17.50 क्विंटल पशु आहार की खपत होती है। वर्तमान में वहां छोटे-बड़े 2000 पशु हैं। इस हिसाब से 3.68 लाख रुपए प्रतिमाह अधिक देने होंगे। ये टेंडर दो वर्ष के लिए दिया जा रहा है। दो वर्ष में करीब 90 लाख रुपए का अधिक भुगतान करना होगा।

गोशाला के सभी आइटम का एक टेंडर, जिस चीज की अधिक खपत उसका रेट ज्यादा

गोशाला में पहले हर कार्य का अलग टेंडर होता था, इसमें टेंडर प्रक्रिया में काफी समय खराब होता था। इसलिए सिंगल टेंडर किए गए। पहले तोल में गड़बड़ी की शिकायत आती थी। तोल के लिए अलग धर्मकांटे पर जाना पड़ता था। इसमें टेंडर लेने वाले से हम हमेशा के लिए धर्मकांटा भी लगवा रहे हैं। - डॉ. विक्रम जिंदल, आयुक्त, नगर निगम

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