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सरकारी नौकरी के दौरान डॉक्टर ने पत्नी व सास-ससुर की मदद से अस्पताल खोला, लोन के फर्जी डॉक्यूमेंट बनाए; सभी दोषी

कोर्ट का फैसला सुनने के बाद गीतांजलि और मोहिनी शर्मा रोने लगी। किसकी क्या भूिमका रही

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 05:15 AM IST

  • सरकारी नौकरी के दौरान डॉक्टर ने पत्नी व सास-ससुर की मदद से अस्पताल खोला, लोन के फर्जी डॉक्यूमेंट बनाए; सभी दोषी
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    कोर्ट का फैसला सुनने के बाद गीतांजलि और मोहिनी शर्मा रोने लगी।

    किसकी क्या भूिमका रही

    गीतांजलि शर्मा : डॉ. आरपी शर्मा के ससुराल पक्ष की ही मेंबर है, इन्होंने भी अवैध आय छिपाने में मदद की। ये भी कंपनी में शेयर होल्डर थी।

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    मोहिनी शर्मा : टीटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर प्रा. लि. की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थी। पति द्वारा अर्जित अवैध आय को छिपाने में मदद की।

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    भास्कर खास : 107 फाइलों से खुला राज

    151 फीसदी ज्यादा पाई गई थी संपत्ति, पूरी तरह डॉ. शर्मा के नियंत्रण में थी कंपनी

    डॉ. शर्मा की कंपनी के सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए। अपने स्पष्टीकरण में डॉ. शर्मा ने कहा था कि हॉस्पिटल की संपत्तियों से मेरा लेना-देना नहीं है। यह एक बोर्ड द्वारा कंपनी बनाकर संचालित किया जाता है। मैंने टीटी हॉस्पिटल से एक क्लीनिक किराए पर लिया हुआ है। जबकि जिन व्यक्तियों द्वारा कंपनी के शेयर खरीदकर पूंजी वृद्धि बताई गई, उनके शेयर डॉ. शर्मा के आवास से जब्त हुए। जिन व्यक्तियों द्वारा ऋण देना बताया गया, वे भी फर्जी मिले। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को समय-समय पर पूंजी बढ़ाने, डायरेक्टर्स के बदलने की सूचना नहीं दी गई। जांच से पता चला कि उक्त हॉस्पिटल व सारा साजो-सामान डॉ. शर्मा का ही है। डॉ. शर्मा की अवैध आय को छिपाने में अन्य 6 आरोपियों ने मदद की। कंपनी के रिकॉर्ड में कोष्ठक में डॉ. शर्मा का नाम लिखा था। कंपनी की ओर से बिजली-पानी जैसे सरकारी महकमों से उन्होंने पत्र व्यवहार भी किया।

    डॉ. आरपी शर्मा 1982 से 1998 तक एमबीएस अस्पताल में बतौर चिकित्सा अधिकारी कार्यरत रहे थे। एसीबी ने 11 अक्टूबर 1998 को डॉ. शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और 13 अक्टूबर 1998 को उनके आवास व अस्पताल की तलाशी ली गई। एसीबी ने पाया कि डॉ. शर्मा ने सेवाकाल में 27 लाख 13 हजार 35 रुपए अर्जित किए, जिनमें से 5 लाख 6 हजार 925 रुपए खर्च मानते हुए उनकी शुद्ध बचत 22 लाख 6 हजार 925 रुपए बनती थी। जबकि उस वक्त उनकी अर्जित संपत्तियों की कीमत 55 लाख 42 हजार 429 रुपए निकली, जो उनकी वैध आय से 33 लाख 35 हजार 504 रुपए यानी 151 प्रतिशत ज्यादा थी।

    डॉ. आरपी शर्मा।

    पत्र में पिता ने लगाया संपत्ति हड़पने का आरोप

    एसीबी की तलाशी में डॉ. आरपी शर्मा के आवास व अस्पताल से 107 फाइलें जब्त की गई थी। ये ऐसी फाइलें थी, जो खुद पूरे फर्जीवाड़े की गवाह बनी। स्क्रूटनी के बाद एसीबी ने 65 फाइलों को सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश किया। इन्हीं में से एक फाइल ऐसी थी, जिसे पढ़कर तत्कालीन एसीबी अधिकारियों की भी आंखें फटी रह गई। इस फाइल में डॉ. शर्मा को उनके वृद्ध पिता रामगोपाल शर्मा तथा भाइयों द्वारा लिखे गए पत्र थे। पत्रों में पिता ने अपने बेटे पर संपत्ति हड़पने व उनकी कोई देखभाल नहीं करने जैसे कई संगीन आरोप लगा रखे थे। एक पर्चा भी इस फाइल में था, जो पिता द्वारा बेटे-बहू के खिलाफ छपवाया गया था और इसमें उनके व्यवहार से आहत होकर भूख हड़ताल पर बैठने की सूचना थी। ज्यादातर पत्रों के अंत में लिखा था-”आपका दुर्भाग्यशाली पिता’। वहीं भाई ने भी पत्रों में संपत्ति हड़पने जैसे आरोप लगा रखे थे। इस फाइल का यूं तो केस से सीधे तौर पर कोई कनेक्शन नहीं था, लेकिन डॉ. शर्मा व उनकी प|ी की कारगुजारियों को साबित करने के लिए यह फाइल कोर्ट में पेश की गई थी। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की तरफ से 16 तथा बचाव पक्ष की तरफ से 6 गवाह पेश किए गए। इसमें वर्ष 2004 में कोर्ट में चालान पेश किया गया था।

    कलेक्टर को नियुक्त किया प्रशासक, अस्पताल संचालन के लिए बनेगी कमेटी : कोर्ट ने आदेश में कहा है कि टीटी हॉस्पिटल को राज्य सरकार में निहित किया जाता है। कलेक्टर कोटा को प्रशासक नियुक्त किया जाता है। वे प्राचार्य मेडिकल कॉलेज से परामर्श कर दक्ष लोगों की कमेटी गठित कर हॉस्पिटल को हैंडओवर-टेकओवर करेंगे। हैंडओवर नहीं करने पर अस्पताल को एज्यूम कर लिया जाए। प्रशासक 3 माह में कोर्ट को पालना रिपोर्ट दें। कमेटी अस्पताल में आने वाले मरीजों के इलाज की व्यवस्था करे और आय का पूरा ब्यौरा रखे। लाभ राशि राज्य सरकार के कोष में जमा कराए।

    नीलाम करें आरोपियों की चल-अचल संपत्ति : कोर्ट ने जुर्माना वसूली के लिए एसपी एसीबी व जिला कलेक्टर को आदेशित किया है। एसीबी एसपी व कलेक्टर एक कमेटी गठित करें, जो आरोपियों की संपत्तियों को नीलाम कर राशि को 3 माह में राजकोष में जमा कराएं।

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