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पहाड़ी में कैद है 91 परिवारों की जिंदगी; गांव में आज तक नहीं आया डॉक्टर, स्कूल पर भी ताले

91 परिवारों का यह गांव चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है।

Dainik Bhaskar

Jul 16, 2018, 06:38 PM IST
Life of 91 families in captivity in the hill

कोटा. प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने पिछले दिनाें जयपुर में कहा था कि न्यू इंडिया का निर्माण न्यू राजस्थान से ही होगा, लेकिन कोटा के एक गांव की हकीकत उन्हें चौंका देगी। कोटा से करीब 55 किमी. दूर स्थित दामोदरपुरा गांव आजादी के 71 साल बाद भी सड़क, इलाज और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

- 91 परिवारों का यह गांव चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इसके अलावा यह मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व एरिया में आता है, इस कारण यहां सड़क नहीं बन पा रही है और परिवारों की जिंदगी पहाड़ी में कैद होकर रह गई है। विकास के दावे की सच्चाई यह है कि गांव में आज तक किसी ने डॉक्टर नहीं देखा है, तो स्कूल पर ताले लगे होने के कारण पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
- सड़क आज तक बनी नहीं: ग्रामीणों का कहना है कि गांव में आज तक सड़क नहीं बनी है। अधिकारियों से जब भी बात करते हैं, वे फॉरेस्ट एरिया की बात कहते हुए सड़क बनाने से इनकार कर देते हैं। इस कारण हमें बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है। हालत यह है कि हम बारिश का सीजन शुरू होने से पहले ही गांव की गर्भवती महिलाओं को दूसरे गांव भेज देते हैं, ताकि उन्हें समय पर इलाज मिल सके।

डॉक्टर-नर्स आए तक नहीं

- गांव में आज तक किसी ने डॉक्टर और नर्स को देखा नहीं है। हालत यह है कि मरीजों को खाट पर लिटाकर दो किमी पहाड़ी की चढ़ाई कर घाटोली तक लाते हैं। यहां से रामगंजमंडी या कोटा लेकर जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इलाज में देरी होने से पिछले एक साल में पांच लोग जान गंवा चुके हैं।

इलाज नहीं मिला तो एक साल में हो गई 5 मौत

- 16 जून को 65 वर्षीय कालू गुर्जर के बीमार होने पर ग्रामीणों ने उन्हें खाट पर लिटाकर पहाड़ी पार की। बाद में इलाज के लिए कोटा लाए, मेडिकल कॉलेज में मौत।
- 65 वर्षीय घीसी बाई के पेट में गांठ थी। अस्पताल ले जाने में परेशानी को देखते हुए अपने स्तर इलाज किया, लेकिन फरवरी में दम तोड़ दिया।
- कालू भील की 10 महीने पहले खेत पर काम करते समय अचानक तबीयत बिगड़ गई। फोन करने पर भी एंबुलेंस नहीं आई। इस कारण घर पर मौत हो गई।
- गांव के 40 वर्षीय दुर्गालाल की तबीयत खराब हो गई। इलाज के लिए कोटा लाते समय दम तोड़ दिया।
- यहां के ही 30 वर्षीय बालचंद की भी बीमारी के चलते आठ महीने पहले तबीयत खराब हो गई। उसे इलाज के लिए लाने लगे, लेकिन बाद में दम तोड़ दिया।

जल्द होगा गांव का रीलोकेशन

दामोदरपुरा मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में हैं। इनके रीलोकेशन की प्रोसेस चल रही हैं। एनटीसीए के अनुसार इनके लिए पैकेज निर्धारित हैं। विभागीय स्तर पर अपने स्तर पर रिवाइज्ड प्लान राज्य सरकार को भिजवा दिया है। वहां से स्वीकृति के बाद ही आगे की प्रक्रिया हो सकेगी। -डॉ. टी. मोहनराज, मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व

बिजली का अता-पता नहीं

- आजादी के 71 साल बाद भी गांव में बिजली कनेक्शन नहीं हैं। बिजली विभाग ने इस गांव को जोड़ने के लिए लाइन नहीं डाली है, इसलिए सभी की जिंदगी अंधेरे में ही गुजर रही है। स्कूल भवन पर ताला लगा है और पढ़ाई बंद है।

रीलोकेशन होने पर ही मिल पाएंगी सभी सुविधाएं

- यह गांव मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के बफर जोन में है। वन्यजीव अधिनियम के तहत रिजर्व में किसी भी प्रकार के निर्माण से लेकर सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सकता है। वन्यजीव एक्सपर्ट डॉ. कृष्णेंद्र सिंह नामा ने बताया कि नियमानुसार स्वैच्छिक रीलोकेशन के प्रयास हों। जब तक इनका रीलोकेशन नहीं हो पाता है, तब तक वन्यजीव और चिकित्सा विभाग की ओर से साप्ताहिक हैल्थ चेक-अप की व्यवस्था हो। गंभीर मरीजों के लिए समय-समय पर कैंप लगे। नर्सिंग टीम द्वारा हर महीने चेकअप कैंप लगाए जाएं।

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