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मुकंदरा में एमटी-1 की शिफ्टिंग को लेकर कभी भी आ सकता है फैसला / मुकंदरा में एमटी-1 की शिफ्टिंग को लेकर कभी भी आ सकता है फैसला

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 04:01 AM IST

Kota News - मुुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 3 अप्रैल को शिफ्टिंग किए एमटी-1 को लेकर जयपुर हाईकोर्ट का निर्णय कभी भी आ सकता है।...

Kota News - mikandra can come with shifting of mt 1
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मुुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 3 अप्रैल को शिफ्टिंग किए एमटी-1 को लेकर जयपुर हाईकोर्ट का निर्णय कभी भी आ सकता है। रिजर्व के अधिकारियों से लेकर वन्यजीव प्रेमियों में फैसला आने का इंतजार है। एमटी-1 को लेकर चर्चित इस मामले को लेकर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। इस प्रकरण को लेकर कभी भी निर्णय आ सकता है। रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि इस मामले को लेकर विभाग का निर्णय आया तो निर्धारित गाइड लाइन के अनुसार रिजर्व में रणथंभौर से बाघिनों को शिफ्टिंग सहित अन्य प्रक्रिया करवाई जा सकेगी। न्यायालय के अन्य आदेश हुए तो उनकी पूरी तरह अक्षरशः पालना की जाएगी।

वहीं, दूसरी ओर अधिकारियों कहना है कि 3 अप्रैल से रिजर्व में एमटी-1 की पूरी तरह से मॉनिटरिंग की जा रही है। रेगुलर स्टाफ चेकिंग कर रहा है। सुरक्षा से लेकर अन्य प्रे-बेस संबंधित तमाम व्यवस्थाएं हैं। निर्णय के अनुसार ही आगे पूरी प्रक्रिया हो सकेगी।

पक्ष में निर्णय हुआ तो यह कार्य होंगे

प्रे-बेस - रिजर्व में तीन बाघिन के लिए पर्याप्त प्रे-बेस है। 12 दिसंबर के बाद से दिल्ली और बीकानेर चिड़ियाघर से चीतल, सांभर, ब्लैक बक लाए जाएंगे। रिजर्व में छोड़ने की परमिशन मिल चुकी है। पहले बीकानेर से चीतल शिफ्ट होंगे।

एनक्लोजर: रिजर्व एरिया में दो बाघिनों को लेकर एनक्लोजर तैयार है। सबसे पहले नियमानुसार एक बाघिन को ट्रेंक्यूलाइज कर शिफ्ट किया जाएगा। इसके एक या दो महीने के बाद दूसरी बाघिन की रिजर्व एरिया में शिफ्टिंग होगी।

बाघिन शिफ्टिंग: पिछले 9 महीने से एमटी-1 सिंगल है। रिजर्व के पक्ष में फैसला होने पर सबसे पहले रणथंभौर से एनटीसीए की गाइड लाइन के अनुसार दो बाघिन को शिफ्टिंग के प्रयास होंगे। यह प्रक्रिया जल्द पूरी करनी होगी।

बजट: रिजर्व एरिया में बाघिनों को शिफ्टिंग को लेकर अभी पर्याप्त बजट है। इनके लिए बजट की जरूरत नहीं है। यहां चौकी, वायरलेस सिस्टम, स्टाफ और अन्य संसाधन की समुचित सुविधा है।

एमटी-1


बाघिनों के बिना टाइगर प्रोजेक्ट अधूरा : शक्तावत

9 अप्रैल 2013 को प्रदेश का तीसरा टाइगर रिजर्व मुकंदरा का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। पिछले 9 महीने से यह सिंगल है। सबसे बड़ी बात है कि यह मैच्योर हो चुका है। उम्र चार साल पार कर चुका है। यहां अब बाघिनों के बिना टाइगर प्रोजेक्ट अधूरा है। एक टाइगर होने से जंगल शांत है। इसने पूरे एरिया में अपनी टेरिटरी देख ली है। ऐसे में अब अकेला टाइगर नर्वस हो चुका है। ऐसे में अब जंगल में इसका जोड़ा बनेगा तब ही जंगल में चहचहाहट और दहाड़ गूंजेंगी। टाइगर की उम्र के हिसाब से जोड़ा बनाने के लिए तीन साल से अधिक बाघिन को शिफ्टिंग करना बेहतर होगा। इसमें बेहतर यह होगा कि एक तीन साल प्लस और दूसरी एक लीटर जिसके शावक अलग हो चुके हैं। उसे भी यहां एनटीसीए की गाइड लाइन के अनुसार शिफ्टिंग कर सकते हैं। सामान्यतया इसमें देरी नहीं होगी। सबसे बड़ी बात है कि इनकी ब्रीडिंग का समय 12 महीने रहता है। ऐसे में बाघों का कुनबा तैयार हो सकेगा। रिजर्व के अधिकारियों को सरिस्का मॉडल ध्यान में रखना होगा। हालांकि पर्यटन के लिए खोलने के लिए दो-तीन साल का समय लग सकेगा। जब तक इनकी संख्या करीब 8 से 10 तक हो सकेगी। तीन टाइगर के लिए यहां पर्याप्त प्रे-बेस है।

-दौलत सिंह शक्तावत, रिटायर्ड अधिकारी

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