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भामाशाह पैकेज और पेसमेकर में 20 हजार का फर्क, 20 दिन से मरीजों का इलाज नहीं

2 वर्ष पहले
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न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती दो मरीजों की धड़कनें तकनीकी पेंच में फंसी हुई हैं। दोनों भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना (बीएसबीवाई) लाभार्थी हैं और हार्ट बीट मेंटेन करने के लिए इन्हें पेसमेकर लगाया जाना है, लेकिन भामाशाह के पैकेज कोड की दर व उपकरण की दर में करीब 20 हजार का फर्क आ रहा है। नतीजा यह हो रहा कि पिछले करीब 20 दिन से ये मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, रोजाना अस्पताल अधीक्षक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पा रहा।

भास्कर ने मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि अस्पताल में डेढ़ साल से कार्डियोलॉजी विभाग के अधीन भामाशाह मरीजों का इलाज किया जा रहा है, लेकिन उपकरण जयपुर एसएमएस अस्पताल के रेट कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर ही क्रय किए जा रहे हैं, डेढ़ में साल में भी स्थानीय अस्पताल प्रबंधन लोकल टेंडर नहीं कर पाया। इसी के चलते यह सारी समस्या पैदा हो रही है और भविष्य में और बढ़ने के आसार दिख रहे हैं।

20-22 जुलाई से भर्ती हैं दोनों मरीज

छीपाबड़ौद, बारां निवासी मांगीलाल (55) नए अस्पताल में 22 जुलाई से भर्ती हैं, कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार उसे पेसमेकर लगाया जाना है। लेकिन अधीक्षक के स्तर पर स्वीकृति नहीं मिल पा रही, ऐसे में उपकरण नहीं मंगाया जा रहा।

कोटखेड़ा, बूंदी की मंजीत कौर (31) भी 20 जुलाई से भर्ती है, उसे भी पेसमेकर लगना है। लेकिन अधीक्षक के स्तर पर स्वीकृति नहीं मिल पा रही, ऐसे में उपकरण नहीं मंगाया जा रहा।

क्या होता है पेसमेकर, क्यों लगाते हैं इसे

किसी भी व्यक्ति की धड़कन यानी हार्ट रेट 60 से 100 के बीच होनी चाहिए। मरीज की धड़कन 30 से नीचे जाने पर उसकी मौत भी हो सकती है। धड़कन कम होने पर ऐसे मरीजों को पेसमेकर नाम का यह उपकरण लगाया जाता है, जो उसकी धड़कन को 60 से 100 के बीच मेंटेन रखता है।

पैरेलल इन्वेस्टिगेशन जयपुर अब महंगा खरीद रहा पेसमेकर, इसलिए दिक्कत

कोटा में कार्डियोलॉजी विभाग ने भामाशाह मरीजों की एंजियोग्राफी-एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर समेत अन्य प्रोसीजर करने का काम जनवरी, 2018 से शुरू किया।

ऐसा ही रहा तो बंद हो सकते हैं दूसरे प्रोसीजर भी

लेखा नियमों के मुताबिक, इमरजेंसी में किसी दूसरे राजकीय अस्पताल के रेट कॉन्ट्रेक्ट (आरसी) को अधिकतम 6 माह के लिए फॉलो किया जा सकता है। लेकिन इससे ज्यादा समय तक वहां के टेंडर के आधार पर सामग्री नहीं खरीदी जा सकती। कोटा में 1 साल 7 माह बीत गए, लेकिन जयपुर की आरसी पर ही सामान खरीदा जा रहा है।

ऐसे में यदि लेखा अधिकारियों ने आपत्ति की तो न सिर्फ पेसमेकर बल्कि अन्य उपकरण भी नहीं खरीदे जा सकेंगे और सारे प्रोसीजर बंद हो जाएंगे। इससे गरीबों को फिर प्राइवेट हॉस्पिटलों का रुख करना पड़ेगा और उन्हें लाखों रुपए खर्च करने पड़ेंगे।

जयपुर एसएमएस की रेट कॉन्ट्रेक्ट को फॉलाे करते हुए वहीं के सप्लायरों से सामान मंगाना शुरू कर दिया। अब दिक्कत यह हो रही है कि पहले वहां बिना लाइफ टाइम वारंटी वाला पेसमेकर क्रय किया जा रहा था, जिसकी कीमत 62 हजार रुपए आ रही थी। तब कोई समस्या इसलिए नहीं थी, क्योंकि भामाशाह पैकेज में इस प्रोसीजर की रेट 65 हजार रुपए है, ऐसे में पैकेज में सारा काम हो रहा था। लेकिन एसएमएस ने नए टेंडर में लाइफ टाइम वारंटी वाला पेसमेकर खरीदना शुरू कर दिया, जो 85 हजार का है। ऐसे में पैकेज से 20 हजार रुपए ज्यादा हो गए। अब यह राशि जयपुर में तो आरएमआरएस वहन कर रही है, लेकिन कोटा में अधीक्षक ने कहा कि यह लेखा नियमों के विपरीत होगा। पेसमेकर में 7-8 साल के अंतराल में बैट्री चेंज करानी होती है। लाइफ टाइम वारंटी पर कंपनी फ्री में यह बैट्री बदलती है।

समस्या गंभीर इसलिए, क्योंकि

भास्कर इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से इसलिए ले रहा है, क्योंकि यह महज दो मरीजों की समस्या नहीं है। यदि टेंडर समय पर नहीं हुआ और जयपुर की आरसी पर उपकरण मंगाने बंद हो गए तो कोटा में हार्ट के मरीजों के भामाशाह के तहत कैश लेस प्रोसीजर पूरी तरह बंद हो जाएंगे, इससे पूरे हाड़ौती के लोग प्रभावित होंगे और उन्हें मजबूरन पहले की तरह प्राइवेट हॉस्पिटलों की शरण में जाना पड़ेगा।

दो बड़े सवाल

जो बताते हैं अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही

1.डेढ़ साल से विभाग में भामाशाह मरीजों के प्रोसीजर हो रहे हैं, इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर टेंडर क्यों नहीं किए जा सके। आखिर क्यों एसएमएस के रेट कॉन्ट्रेक्ट को फॉलो किया जाता रहा?

2. जब जयपुर को ही फॉलो कर रहे थे तो फिर वहां की तर्ज पर यहां की आरएमआरएस दोनों मरीजों के 20-20 हजार रुपए क्यों वहन नहीं कर सकती?

समस्या यह है कि आरएमआरएस से नहीं दे सकते 20 हजार: अधीक्षक

नए अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सीएस सुशील से सीधे सवाल-जवाब

Q. दोनों मरीजों को 20 दिन से भर्ती कर रखा है, उनके प्रोसीजर क्यों नहीं हो पा रहे?

- इसमें 20 हजार रुपए की दिक्कत है, मैंने कार्डियोलॉजी एचओडी से भी बात की थी, लेकिन समस्या वही है कि 20 हजार रुपए कौन वहन करें।

Q. जब जयपुर में आरएमआरएस वहन कर रही है तो कोटा में क्या दिक्कत है?

- नहीं, ऐसा नहीं किया जा सकता, बाद में ऑडिट में भी दिक्कत आएगी। फिर भी एक बार प्रस्ताव बनाकर संभागीय आयुक्त को भेज सकते हैं, लेकिन एकाउंट्स वालों ने मना कर दिया।

Q. डेढ़ साल में लोकल टेंडर नहीं हुए, क्या कार्डियोलॉजी विभाग बंद करना चाहते हैं?

- मुझे तो अभी ज्वाइन किए कुछ ही दिन हुए हैं। टेंडर की प्रक्रिया जल्द शुरू करने जा रहे हैं। मैं तो इन्हें एसएमएस जाने की सलाह दे चुका, फिर भी एक बार एचओडी को दोबारा बुलाकर बात करता हूं, कोई गली निकल सकती है तो निकालेंगे।

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