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मुश्किल हालात में पहचान बनाने वाली महिलाअाें की 5 कहानियां

एक वर्ष पहले
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डाॅक्टर बनकर सेवा करना हाे या फिर राजनीति में कुछ कर गुजरने की बात हाे या अाईपीएस बनकर अपराधाें से लड़ना हाे, हर कार्य में महिलाअाें का बराबर दखल है। महिला दिवस पर दैनिक भास्कर ने एेसी महिलाएं तलाश कीं, जिन्हाेंने अपने क्षेत्र में मुकाम हासिल किया। इनमें डॉ. नगेंद्र बाला को देश की पहली महिला जिला प्रमुख होने का गौरव हासिल है। हाड़ौती से पहली महिला विधायक हाेने का रिकाॅर्ड भी उनके नाम है।

3. गरिमा भटनागर : यूएन में तैनात है काेटा की आईपीएस बेटी

इंजीनियर-डाॅक्टर देने वाले शहर की बेटी गरिमा भटनागर 24 साल पहले आईपीएस बनीं। रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर अारपी भटनागर की बेटी गरिमा अरुणाचल प्रदेश गोवा मिज़ोरम संघ शासित क्षेत्र (AGMUT) कैडर की 1994 बैच की अाईपीएस हैं। वर्तमान में वे यूएन पीस मिशन की चीफ ऑफ पुलिस के पद पर यूनाइटेड नेशन में पाेस्टेड हैं।

चंद्रकांता : शहर की पहली महिला सीए होने का रिकॉर्ड

शहर की पहली महिला सीए चंद्रकांता मेहता ने 1976 मंे प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। मेहता ने बताया कि वे मुंबई की रहने वाली हैं अाैर अार्ट्स की स्टूडेंट थी। सब्जेक्ट चेंज करके काॅमर्स में इंटर करने के बाद वे सीए बनीं। इसी दाैरान काेटा में अशाेक मेहता से शादी हाे गई। सास के कहने पर अंतिम वर्ष पूरा किया अाैर प्रैक्टिस शुरू कर दी। शुरू में क्लाइंट भी नहीं अाते थे। धीरे-धीरे अपने मिलने वालाें के काम किए अाैर उससे पहचान बनाई। वे सीए ब्रांच की अध्यक्ष भी रहीं। उनकी बेटी स्वाति यूएस मंे वैज्ञानिक हैं।

डाॅ. इंदु : 1974 में जर्मनी से पढ़ाई करके बनीं डॉक्टर

काेटा की सबसे वरिष्ठ गायनाेकाेलाॅजिस्ट की बात अाते ही तीन नाम सामने अाते हैं। डाॅ. पीके जैन, डाॅ. इंदु रामबाबू अाैर डाॅ. शीला चाैधरी। डाॅ. इंदु रामबाबू ने उस समय डॉक्टर बनीं जिस समय लड़कियाें काे हाईस्कूल तक पढ़ने के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ता था। उन्हाेंने जर्मनी से वर्ष 1970 में एमबीबीएस किया। वहीं से 1974 में एमडी की। वे बताती हैं कि सर्विस के दाैरान उन पर अबाॅर्शन करवाने के लिए दबाव डाला जाता था। वे विराेध करती थीं। इसलिए सजा के ताैर पर उनसे हमेशा नाइट ड्यूटी करवाई जाती थी।

सुमन श्रृंगी : कोटा नगर निगम की पहली महापाैर बनीं

सुमन श्रृंगी के नाम काेटा की पहली महापाैर होने का रिकॉर्ड दर्ज है। वे बताती हैं कि महापाैर की जिम्मेदारियों के बारे ज्यादा कुछ जानकारी नहीं थी, लेकिन मेहनत, लगन अाैर ईमानदारी ये तीन हथियार मेरे पास थे, जिसके बल पर मैंने पूरे कार्यकाल में सारी जिम्मेदारियां बखूबी पूरी की। महिलाएं अगर चाह लें अाैर इन तीन बाताें काे अमल में लाए ताे एेसा काेई कार्य नहीं है जाे वे नहीं कर सकती। हालांकि हमने बेटी बचाअाे-बेटी पढ़ाअाे का नारा बुलंद ताे कर रखा है, लेकिन अभी बहुत काम करना बाकी है।

डाॅ. नगेंद्र बाला : 1960 में बनीं देश की पहली जिला प्रमुख

अाजादी की लड़ाई हाे या किसान अांदाेलन डाॅ. नगेंद्र बाला हर क्षेत्र में अग्रणी रहीं। प्रसिद्ध क्रांतिकारी केसरी सिंह बारहठ की पाैत्री नगेंद्र बाला 1941 से 1945 तक किसान अांदाेलन में सक्रिय रहीं। पंचायत राज व्यवस्था बनने के बाद वर्ष 1960 में देश की पहली जिला प्रमुख बनीं। उनका राजनीतिक सफर यही नहीं रुका। वर्ष 1962 से 67 तक छबड़ा से विधायक रहीं। वर्ष 1972 से 77 तक दीगाेद की विधायक रहीं। वर्ष 1982 में समाज कल्याण बाेर्ड की सदस्य रहीं।


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