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ओवरस्पीड पर 13 हजार लोगों पर 62 लाख का जुर्माना, प्रदेश में तेज रफ्तार वाहनों से हर साल होती हैं 900 माैत

Kota News - शहर में तेज स्पीड में बाइक और कार चलाने की आदत ने एक साल में वाहन चालकों को डेढ़ साल में 62 लाख का फटका लगाया है।...

Feb 15, 2020, 09:50 AM IST
Kota News - rajasthan news 62 lakh fine on 13 thousand people for over speed 900 vehicles are beaten every year by high speed vehicles

शहर में तेज स्पीड में बाइक और कार चलाने की आदत ने एक साल में वाहन चालकों को डेढ़ साल में 62 लाख का फटका लगाया है। ट्रैफिक पुलिस ने शहर के 12,907 वाहन चालकों के चालान सिर्फ इस नियम की अवहेलना करने पर बनाए हैं। पुलिस शहरवासियों से 40 लाख रुपए जुर्माने के रूप में वसूल चुकी है और बाकी के 12 लाख की वसूली तेज कर दी गई है। ये वे चालान हैं, जो ट्रैफिक पुलिस सड़क पर खड़े होकर नहीं काट रही, बल्कि कैमरे में फोटो लेकर चालान वाहन चालकों के घर भेज रही है। एक चालान के पुलिस 400 रुपए जुर्माना वसूल करती है। अगस्त 2018 में इसकी शुरुआत कोटा शहर में की गई थी, तब से अब तक कुल 12 हजार 907 लोगों को खुफिया कैमरे ने अाेवरस्पीड में गाड़ी चलाते पकड़ा है। कैमरे से चालान बनाने की शुरुआत के पीछे दो अहम कारण बताए गए थे। पहला तो सड़कों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी द्वारा चालान काटने पर जनता परेशान हो रही थी और दूसरा कई बार बेवजह झगड़े की नौबत पैदा होती थी।

ऐसे होता है चालान, गलतफहमी की गुंजाइश नहीं

शहर की चार प्रमुख सड़कों पर लगे कैमरों से यह फोटो लिए जा रहे हैं। कैमरे की मॉनिटरिंग कमांड सेंटर से होती है। कैमरे के जरिए कंट्रोल रूम से पुलिस यातायात नियमों के उल्लंघन पर वाहन और वाहन चालक दोनों का फोटो क्लिक कर लेती है। ई-चालान सॉफ्टवेयर में कैमरे से खींचे गए फोटो से कार के नंबर लेकर उसके वाहन नंबर, मालिक का नाम, मोबाइल नंबर व पता ऑटोमैटिक ले लेता है।

कई वाहनाें के 10 बार ओवरस्पीड के चालान

ओवरस्पीड के चालान के आंकड़ों में सामने आया कि ऐसे भी कई वाहन चालक हैं, जिन्होंने बार-बार तेज रफ्तार में ओवरस्पीड में वाहन चलाए हैं। ट्रैफिक पुलिस ने भी इनकाे हर बार तेज रफ्तार में वाहन चलाने पर नोटिस भेजकर जुर्माना जमा कराने के आदेश दिए। लेकिन, जमा कराने के बाद नियमों काे ताेड़ते रहे। ऐसे वाहन चालक भी हैं, जिन्होंने पहला नोटिस मिलने के बाद भी 10-10 दफा तेज रफ्तार में वाहन चलाया है।


शहर में 50% लोग नहीं पहनते हेलमेट, हादसों में 30% घायलों की मौके पर मौत

शहर में 50% लोग लाख समझाने पर भी हेलमेट नहीं पहनते हैं और 10% लोग तेज स्पीड में वाहन चलाने से बाज नहीं आते हैं। सड़क हादसे के वक्त अगर वाहन चालक की स्पीड़ मापदंडाें से तेज हुई और उसने हेलमेट भी नहीं लगाया तो ऐसे 30 फीसदी मामलों में तुरंत मौके पर मौत हो जाती है। जबकि ऐसे 20 फीसदी मामलों में अस्पताल में भर्ती होने के बाद मौत होती है। जबकि बचे हुए 50 फीसदी मामलों में या गंभीर रूप से घायल हो जाता हैं।

भास्कर नाॅलेज : प्रदेश में अोवरस्पीड वाहनों से होते हैं 61 प्रतिशत हादसे

हादसे

भास्कर इंपैक्ट

नए एसपी गौरव यादव ने आते ही ट्रैफिक पुलिस को 30 नए जवानों का तोहफा दिया है। भास्कर ने 6 फरवरी के अंक में इस पर पूरी डिटेल खबर “9 लाख वाहनों पर सिर्फ 129 ट्रैफिककर्मी, नतीजा ये कि जाम से राेज शहरवासियों का 12 लाख का पेट्रोल बर्बाद” हैडलाइन से प्रकाशित की थी। जिसमें बताया था कि वर्ष 2012 में ट्रैफिक पुलिस के पास 267 का स्वीकृत स्टाफ था, लेकिन 129 कर्मचारी ही तैनात थे। 2020 में भी ट्रैफिक पुलिस के पास 129 पुलिसकर्मी ही हैं। साल 2012 में शहर की जनसंख्या 10 लाख थी अाैर 7 लाख वाहन थे। अब शहर में लगभग 14 लाख की अाबादी पर 9 लाख वाहन हैं, लेकिन ट्रैफिक पुलिसकर्मियाें की संख्या नहीं बढ़ी। माैजूदा स्टाफ में भी 10 फीसदी कर्मचारी हमेशा अवकाश या दूसरी ड्यूटी पर रहते हैं और 5 फीसदी स्टाफ ऑफिस या दूसरे कामों में व्यस्त रहता है, वो चौराहों पर ट्रैफिक कंट्रोल नहीं करता। ऐसे में पर्याप्त स्टाफ की कमी के चलते शहर की ट्रैफिक व्यवस्था अनकंट्रोल हो रही है। एसपी यादव ने ज्वाइन करने पर प्रेस काॅन्फ्रेंस में वादा किया था कि वो जल्द पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाएंगे।

सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण ओवरस्पीड है। हमने कोटा में पिछले दो साल से इसी पर सख्ती से फोकस रखा है ताकि लोगों की आदत में सुधार आ सके। हमारा मकसद मौतों को रोकना है। करीब 3 हजार लोगों के चालान फिलहाल नहीं किए गए हैं। वे प्रोसेस में हैं, इस सप्ताह उनके घर चालान पहुंच जाएगा। - नारायणलाल विश्नोई, डीएसपी, ट्रैफिक

एसपी यादव ने ट्रैफिक पुलिस के जाब्ते में लगाए 30 नए जवान

ओवरस्पीड से वाहन नहीं चलाना आपकी सुरक्षित यात्रा के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि प्रदेश में 61 फीसदी सड़क हादसे और उनमें होने वाली मौतों का कारण ओवरस्पीड ही है। वहीं, 60 फीसदी लोग स्थाई रूप से विकलांग हो जाते हैं। प्रदेश में 900 लोगों की ओवर स्पीड से हर साल मौत हो जाती है। पुलिस, एनसीआरबी, केन्द्रीय सड़क परिवहन और कई तरह के सर्वे के यह बात साबित हो चुकी है कि तेज स्पीड में हादसों की संभावना 3 गुना बढ़ जाती है। वहीं, अगर दोनों वाहनों की स्पीड स्लो हो तो हादसों की इसी संख्या में 65 फीसदी कमी आ जाती है। कोटा में भी होने वाले हादसों में यह बात सटीक बैठती है।


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2019**

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2018**

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2017**

शहर में 3 साल में हादसाें में 271 ने गंवाई जान

मौत

घायल

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