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घूस के 9 साल पुराने मामले में बारां श्रम कल्याण अधिकारी और श्रम निरीक्षक को 3 साल की सजा

एक वर्ष पहले
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भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय ने 9 वर्ष पुराने मामले में लेबर ठेकेदारों से लाइसेंस नवीनीकरण करने व उनका रिकॉर्ड सही बताने की एवज में रिश्वत लेने के मामले में अाराेपी बारां के श्रम कल्याण अधिकारी गेहरीलाल शर्मा एवं श्रम निरीक्षक अमर सिंह खींची को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। दाेनाें के कब्जे से रिश्वत के रूप में ली गई 32400 रुपए की रकम भी बरामद हुई थी। दाेनाें पर 20-20 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।

न्यायाधीश प्रमाेद कुमार मलिक ने फैसले में लिखा कि जनतांत्रिक प्रशासन में किसी भी व्यवस्था काे संचालित करने का दायित्व लाेकसेवकाें पर हाेता है। यदि लाेकसेवक भ्रष्ट हाे जाए ताे राष्ट्र की जड़ें कमजाेर हाे जाती हैं। जिसका असर राष्ट्र के विकास पर पड़ता है। लाेकसेवक ईमानदारी से कर्तव्याें का निर्वहन करें, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। समाज में भ्रष्टाचार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भ्रष्टाचारियाें में भय नहीं है।

सहायक निदेशक अभियाेजन अशाेक कुमार जाेशी ने बताया कि बारां एसीबी को 25 अप्रैल 2008 को सूचना मिली थी कि छबड़ा क्षेत्र के श्रम कल्याण अधिकारी व श्रम निरीक्षक लेबर ठेकेदारों के लाइसेंस नवीनीकरण करने व रिकॉर्ड सही बताने की एवज में ठेकेदारों से रिश्वत लेकर स्कॉर्पियो गाड़ी से छबड़ा से बारां आ रहे हैं। इस पर एसीबी डीएसपी निहाल सिंह ने मंडोला रेलवे फाटक पर नाकाबंदी की। रात 9 बजे अटरू की तरफ से आई स्कॉर्पियो चेक की ताे श्रम कल्याण अधिकारी बारां गेहरीलाल शर्मा के पास 9500 रुपए व श्रम निरीक्षक अमर सिंह खींची के पास 22900 रुपए मिले। जाे राशि उन्हाेंने चंदे की होना बताया, लेकिन सन्तोषजनक जवाब नहीं देने के कारण राशि जब्त कर प्रकरण दर्ज किया। मामले के अाराेपी गेहरीलाल शर्मा नवंबर 2009 काे, अमर सिंह खींची जून 2010 काे सेवानिवृत्त हाे चुके हैं। एसीबी ने मामले में गेहरीलाल शर्मा एवं अमर सिंह खींची को जांच में दाेषी मान कर 6 जुलाई 2011 काे चालान पेश किया। अभियाेजन पक्ष की अाेर से 16 गवाहाें के बयान कराए। न्यायालय ने मामले में सुनवाई के बाद दाेनाें अाराेपियाें काे तीन-तीन साल की सजा सुनाई है।

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