बच्चे को दूध नहीं पिलाने पर ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक: डॉ. मंडल

Kota News - नवजात बच्चों को स्तनपान नहीं करवाने वाली महिलाअों को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक रहता है। उनकी अपेक्षा स्तनपान...

Jan 12, 2020, 09:35 AM IST
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नवजात बच्चों को स्तनपान नहीं करवाने वाली महिलाअों को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक रहता है। उनकी अपेक्षा स्तनपान कराने वाली महिलाअों में यह कैंसर होने की अाशंका कम रहती हैं। इसके अलावा निसंतान महिलाअों को भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक रहता है। यह बात शनिवार को एसोसिएशन अाॅफ साइटोलाॅजिस्ट एंड हिस्टोपैथोलाॅजिस्ट (एसीएच) के कोटा चैप्टर की अोर से अायोजित वेस्ट जोनल स्तरीय कांफ्रेंस में एसोसिएशन अध्यक्ष डाॅ. अासीतावा मंडल ने कही।

उन्होंने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर के कारणों की बात की जाए तो जैनेटिक कारण सबसे प्रमुख हैं। बदलती लाइफ स्टाइल, फास्ट फूड भी ब्रेस्ट कैंसर का कारण हैं। भारत में शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाअों के ब्रेस्ट कैंसर का पता देरी से लगता है। क्योंकि ब्रेस्ट कैंसर का शुरू में महिलाअों को पता नहीं लगता। इस कैंसर में दर्द महसूस नहीं होता। स्त्री शर्म के कारण डाॅक्टर को दिखाती नहीं हैं जांच नहीं करवाती है। अब इस रोग के इलाज के लिए टारगेटेड थैरेपी भी होने लगी है। ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कीमोथैरेपी टारगेटेड थैरेपी, रेडियोथैरेपी व शल्य चिकित्सा से किया जाता है। काॅफ्रेंस में डाॅ. स्वामीनाथन, डाॅ. राजीव, डाॅ. सुषमा पाटिल ने ब्रेस्ट कैंसर का शीघ्र पता लगाने के लिए की जाने वाली जांच के बारे में बताया। शीघ्र ही बीमारी का पता लगने पर उसका इलाज भी सस्ता व बेहतर होता है। डाॅ. संगीता सक्सेना ने कहा कि भारत में रोजाना 2000 ब्रेस्ट कैंसर के केस सामने अाते हैं। इनमें से 1200 लेट स्टेज के अाते हैं। देरी से रोग का पता लगने से इलाज खर्च भी बढ़ जाता है।

कोटा मेडिकल काॅलेज अस्पताल में ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए मेमोग्राफी, सोनोग्राफी व एमअारअाई सुविधा उपलब्ध हैं। अरली डायग्नोस के लिए रेडियोलाॅजी व पैथोलाॅजी की महत्वपूर्ण हैं। मेडिकल काॅलेज के प्रिंसिपल डाॅ. विजय सरदाना ने कहा कि इस तरह की कांफ्रेंस से डाॅक्टर्स को बीमारी के इलाज के अाधुनिक तरीकों पर चर्चा का माैका मिलता है। इसका लाभ मरीजों को मिलता है। कांफ्रेंस में पैनल डिस्क्शन भी हुअा। इसमें डाॅक्टर्स के सवालों के जवाब विशेषज्ञों ने दिए। कांफ्रेंस में भारत के विभिन्न राज्यों के डाॅक्टरों के साथ बांग्लादेश व नेपाल के डाॅक्टर्स ने भी भाग लिया। कांफ्रेंस में डाॅ. र|ा जैन, डाॅ. नरेश राॅय, डाॅ. जितेन्द्र सिंह, डाॅ. राकेश शर्मा, डाॅ. अरुणा अग्रवाल, डाॅ. सपना मेहता, डाॅ. समीर मेहता, डाॅ. देश दीपक, डाॅ. वेदप्रकाश गुप्ता, डाॅ. हेमंत दाधीच माैजूद रहे।

कोटा के मेडिकल काॅलेज अाॅडिटोरियम में हुई ब्रेस्ट कैंसर पर काॅन्फ्रेंस

सिटी रिपोर्टर | कोटा

नवजात बच्चों को स्तनपान नहीं करवाने वाली महिलाअों को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक रहता है। उनकी अपेक्षा स्तनपान कराने वाली महिलाअों में यह कैंसर होने की अाशंका कम रहती हैं। इसके अलावा निसंतान महिलाअों को भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक रहता है। यह बात शनिवार को एसोसिएशन अाॅफ साइटोलाॅजिस्ट एंड हिस्टोपैथोलाॅजिस्ट (एसीएच) के कोटा चैप्टर की अोर से अायोजित वेस्ट जोनल स्तरीय कांफ्रेंस में एसोसिएशन अध्यक्ष डाॅ. अासीतावा मंडल ने कही।

उन्होंने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर के कारणों की बात की जाए तो जैनेटिक कारण सबसे प्रमुख हैं। बदलती लाइफ स्टाइल, फास्ट फूड भी ब्रेस्ट कैंसर का कारण हैं। भारत में शहरों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाअों के ब्रेस्ट कैंसर का पता देरी से लगता है। क्योंकि ब्रेस्ट कैंसर का शुरू में महिलाअों को पता नहीं लगता। इस कैंसर में दर्द महसूस नहीं होता। स्त्री शर्म के कारण डाॅक्टर को दिखाती नहीं हैं जांच नहीं करवाती है। अब इस रोग के इलाज के लिए टारगेटेड थैरेपी भी होने लगी है। ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कीमोथैरेपी टारगेटेड थैरेपी, रेडियोथैरेपी व शल्य चिकित्सा से किया जाता है। काॅफ्रेंस में डाॅ. स्वामीनाथन, डाॅ. राजीव, डाॅ. सुषमा पाटिल ने ब्रेस्ट कैंसर का शीघ्र पता लगाने के लिए की जाने वाली जांच के बारे में बताया। शीघ्र ही बीमारी का पता लगने पर उसका इलाज भी सस्ता व बेहतर होता है। डाॅ. संगीता सक्सेना ने कहा कि भारत में रोजाना 2000 ब्रेस्ट कैंसर के केस सामने अाते हैं। इनमें से 1200 लेट स्टेज के अाते हैं। देरी से रोग का पता लगने से इलाज खर्च भी बढ़ जाता है।

कोटा मेडिकल काॅलेज अस्पताल में ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए मेमोग्राफी, सोनोग्राफी व एमअारअाई सुविधा उपलब्ध हैं। अरली डायग्नोस के लिए रेडियोलाॅजी व पैथोलाॅजी की महत्वपूर्ण हैं। मेडिकल काॅलेज के प्रिंसिपल डाॅ. विजय सरदाना ने कहा कि इस तरह की कांफ्रेंस से डाॅक्टर्स को बीमारी के इलाज के अाधुनिक तरीकों पर चर्चा का माैका मिलता है। इसका लाभ मरीजों को मिलता है। कांफ्रेंस में पैनल डिस्क्शन भी हुअा। इसमें डाॅक्टर्स के सवालों के जवाब विशेषज्ञों ने दिए। कांफ्रेंस में भारत के विभिन्न राज्यों के डाॅक्टरों के साथ बांग्लादेश व नेपाल के डाॅक्टर्स ने भी भाग लिया। कांफ्रेंस में डाॅ. र|ा जैन, डाॅ. नरेश राॅय, डाॅ. जितेन्द्र सिंह, डाॅ. राकेश शर्मा, डाॅ. अरुणा अग्रवाल, डाॅ. सपना मेहता, डाॅ. समीर मेहता, डाॅ. देश दीपक, डाॅ. वेदप्रकाश गुप्ता, डाॅ. हेमंत दाधीच माैजूद रहे।

डॉ. मंडल

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