मोटे लोगों में क्रॉनिक किडनी का खतरा 83% ज्यादा
आज (12 मार्च) वर्ल्ड किडनी डे है। इस मौके पर कोटा मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. विकास खंडेलिया बता रहे हैं किडनी से जुड़े विभिन्न रोगों व रोकथाम के उपायों के बारे में। डॉ. खंडेलिया के मुताबिक, विश्व संगठनों का मानना है कि प्रत्येक 10 में से एक व्यक्ति किडनी रोग से ग्रसित है। दुनियाभर में 85 करोड़ लोगों को अब विभिन्न कारणों से गुर्दे की बीमारियां होने का अनुमान है। क्रॉनिक किडनी रोग (सीकेडी) प्रति वर्ष कम से कम 24 लाख मौतों का कारण बनता है और अब मृत्यु का 6वां सबसे तेजी से बढ़ता कारण यही है। 2010 में एंड-स्टेज किडनी डिजीज (ईएसकेडी) या किडनी फेल्योर से 26 लाख लोगों का दुनियाभर में डायलिसिस या प्रत्यारोपण हुआ था। यह संख्या 2030 तक 54 लाख तक बढ़ने का अनुमान है। वैश्विक स्तर पर किडनी की बीमारी मृत्यु का 11वां कारण है। मोटे लोगों में क्रॉनिक किडनी रोग विकसित होने का 83% अधिक जोखिम होता है। 6 हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों में से 1 को किडनी रोग एवं हर 3 डायबिटीज के रोगियों में से 1 को किडनी रोग हो जाता है। महामारी के रूप में बढ़ते हुए मधुमेह (डायबिटीज), हाई बीपी, मोटापा, दर्द निवारक दवाओं का गलत इस्तेमाल, किडनी की पथरी, मूत्र मार्ग में रूकावट या संक्रमण, किडनी की ब्लेज (सिस्ट) एवं अन्य कारणों से किडनी में खराबी हो जाती है।
गुर्दे की सुरक्षा के उपाय : खुद को फिट और एक्टिव रखें, अपने ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखें, धूम्रपान न करें, रक्तचाप का ध्यान रखें, नियमित व्यायाम करें, खाने में नमक कम लें, मोटापे पर नियंत्रण करें, फास्ट फूड व जंक फूड से बचें, स्वस्थ भोजन खाएं, तरल पदार्थों का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करें, बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां नहीं लें।
पूरे देश में सिर्फ 2000 नेफ्रोलॉजिस्ट
पूरे भारत में केवल 1900-2000 किडनी रोग विशेषज्ञ है, ऐसे में पूरी आबादी के लिए विशेषज्ञ का उपलब्ध होना असंभव है। इसलिए हमारा दायित्व है कि हम मधुमेह, उच्च रक्तचाप से ग्रसित लोगों को प्रेरित करें कि वो उक्त जांचें समय-समय पर कराते रहें एवं अगर किडनी रोग से संबंधित लक्षण हो जैसे शरीर में सूजन, भूख नहीं लगना, पेशाब की कमी या पेशाब में खून आना, सांस फूलना इत्यादि हो तो भी जांचों को कराने में संकोच ना करें।