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डेंगू में हेमरेजिक फीवर और शॉक सिंड्रोम सबसे खतरनाक, डॉक्टर का ऑब्जर्वेशन जरूरी

2 वर्ष पहले
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मादा एडीज इजिप्टी मच्छर से फैलने वाले डेंगू का सर्वाधिक प्रभाव जुलाई से अक्टूबर के बीच होता है। यह मच्छर के पनपने का सबसे ज्यादा अनुकूल समय होता है। क्योंकि इन माह में बारिश के बाद साफ पानी के गड्ढे भर जाते हैं और यहीं यह मच्छर अंडे देती है, जिन्हें हम लार्वा कहते हैं। डेंगू को लेकर भास्कर की नॉलेज सीरिज के तहत आपने पिछली कड़ी में जाना था मच्छर के पनपने व इसे पैदा होने से रोकने के बारे में। अब इस कड़ी में हमारे एक्सपर्ट सीनियर फिजिशियन डॉ. निर्मल शर्मा व डॉ. सुधीर उपाध्याय बता रहे हैं कि इस बीमारी के इलाज के बारे में-

साधारण डेंगू है तो घर में ही हो सकता है इलाज
मेडिकल साइंस के हिसाब से डेंगू को तीन भागों में बांटा जाता है। क्लासिकल (साधारण) डेंगू फीवर, डेंगू हेमरेजिक फीवर (डीएचएफ) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (डीएसएस)। साधारण डेंगू अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन डीएचएफ का इलाज शुरू नहीं किया जाए तो मरीज की जान पर भी बन सकती है।

साधारण डेंगू फीवर
ठंड लगने के बाद तेज बुखार चढ़ना, सिर, मसल्स, जोड़ों व आंखों के पिछले हिस्से में दर्द। बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना, भूख न लगना, जी मिचलाना और मुंह का स्वाद खराब होना, गले में हल्का दर्द, चेहरे, गर्दन व छाती पर लाल रैशेज होना।

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शॉक सिंड्रोम इसमें मरीज बहुत बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद स्किन ठंडी महसूस होती है। मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है। मरीज की नाड़ी कभी तेज और कभी धीरे चलने लगती है। ब्लड प्रेशर एकदम लो हो जाता है।

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डेंगू से कई बार मरीज मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर में चला जाता है। सेल्स के अंदर मौजूद फ्लूड बाहर निकल जाता है। पेट के अंदर पानी जमा हो जाता है। लंग्स और लीवर पर बुरा असर पड़ता है और ये काम करना बंद कर देते हैं।

नोट
मच्छर के काटे जाने के 3-5 दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। कुछ मामलाें में शरीर में बीमारी पनपने की मियाद 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है।

तत्काल डॉक्टर को दिखाएं
मरीज में डीएसएस या डीएचएफ का एक भी लक्षण दिखाई दे तो उसे तत्काल डॉक्टर के पास ले जाएं। इसमें प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं, जिससे शरीर के अंग प्रभावित हो सकते हैं। डेंगू बुखार के हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती, सिर्फ डेंगू हैमरेजिक और डेंगू शॉक सिंड्रोम बुखार में ही जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती हैं।

कब दिखती है बीमारी
भास्कर अभियान
नॉलेज सीरीज
भास्कर एक्सपर्ट
डाॅ. निर्मल शर्मा

हेमरेजिक फीवर
डेंगू हेमरेजिक फीवर थोड़ा खतरनाक साबित हो सकता है। इसमें प्लेटलेट और वाइट ब्लड सेल्स की संख्या कम होने लगती है। इसमें नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून आना, स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े चकत्ते पड़ जाते हैं।

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क्या है इलाज
अगर साधारण डेंगू बुखार है तो उसका इलाज व देखभाल घर पर की जा सकती है।

डॉक्टर की सलाह लेकर पैरासिटामोल ले सकते हैं। एस्प्रिन बिल्कुल न लें। इनसे प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं।

अगर बुखार 102 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा है तो मरीज के शरीर पर पानी की पट्टियां रखें।

सामान्य रूप से खाना देना जारी रखें।

डाॅ. सुधीर

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