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परिजनों से बोला था नौकरी का झूठ, लूटी रकम से सच साबित करने को रची लूट की साजिश

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:01 AM IST

Kota News - बुजुर्ग दंपती ओमप्रकाश भट्ट और सुशीला महावीर नगर में अकेले रहते हैं। उनका बड़ा बेटा अमेरिका में रहता है। वारदात...

Kota News - rajasthan news it was said to the family that the job lies plundering plot to prove the truth with loot money
बुजुर्ग दंपती ओमप्रकाश भट्ट और सुशीला महावीर नगर में अकेले रहते हैं। उनका बड़ा बेटा अमेरिका में रहता है। वारदात के एक दिन पहले यानी 10 मई को बदमाश राजवीर घर पर किराएदार बनकर गया था और कमरा किराए पर लेने की बात करने के बहाने रैकी कर ली। 11 मई सुबह करीब 9.30 बजे बदमाश राजवीर ऑटो से किराएदार बनकर आ गया। उसे उसका कमरा दिखाने बुजुर्ग ओमप्रकाश भट्ट पहली मंजिल पर गए, जहां बदमाश ने ओमप्रकाश और सुशीला के सिर पर सरिए से वार करके उन्हें घायल कर दिया। वो लूट करने के लिए मकान में नीचे जा ही रहा था कि वहां पर सफाई कर्मचारी जगदीश पहुंच गया और दोनों के बीच संघर्ष हुआ। जगदीश के सिर पर भी वार किए, वो वहां से बचकर नीचे भाग गया। इसके बाद बदमाश घबरा गया और बिना लूट किए छत के रास्ते से पैदल ही फरार हो गया।

250 लोगों से की पूछताछ, खुद के झूठ से पकड़ा गया राजवीर : वारदात के बाद आईजी बिपिन पांडे और एसपी दीपक भार्गव के निर्देश व सुपरविजन में 11 टीमों का गठन किया गया। करीब 100 सीसीटीवी कैमरों को खंगाला, लेकिन कुछ खास हाथ नहीं लगा। 250 लोगों से पूछताछ की गई, जिसमें उनको शामिल किया गया, जो किराए से इस इलाके में पहले रहकर गए हों। इसी पूछताछ में पुलिस को बारां के छबड़ा निवासी राजवीर पर शक हुअा। जब उसके गांव पहुंचे तो कोई यह मानने को तैयार नहीं था कि राजवीर कोटा में रह रहा है। परिजनों को उसने यह झूठ बोल रखा था कि वो इनकम टैक्स अधिकारी है और मुंबई में ट्रेनिंग कर रहा है। लेकिन, पुलिस ने कैमरों व टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन की मदद से यह साबित कर दिया कि राजवीर कोटा में ही था। यानी राजवीर खुद के झूठ में खुद ही फंस चुका था और पुलिस को इसी क्लू ने अपराधी तक पहुंचाया।

सिर्फ 6 दिन भाग सका पहचान छुपाकर, जयपुर से पकड़ा गया : बदमाश को पकड़ने के लिए एएसपी राजेश मील के नेतृत्व में सीआई महेश सिंह, विजयशंकर शर्मा, मुनिन्द्र सिंह, प्रमेन्द्र रावत, एसआई रामस्वरूप, एएसआई सतवीर, हैड कांस्टेबल प्रताप सिंह, देवेन्द्र समेत करीब 125 पुलिसकर्मियों को टीम में शामिल किया गया। बदमाश का नाम क्लियर हो गया था, लेकिन उसको पकड़ना सबसे बड़ा टास्क था। क्योंकि उसका कोई पता नहीं था, घरवालों, दोस्तों सभी को झूठ बोल रखा था। जांच में पता चला बदमाश दो साल पहले जयपुर के बस्सी थाना क्षेत्र में भी रहा था। जयपुर पुलिस की मदद से उसे पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। वो सबसे पहचान छुपाकर रहता था, लेकिन पुलिस ने उसे 6 दिनों में गिरफ्तार कर लिया।

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