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देर रात तक हास्य से लोटपोट, व्यंग्य से गंभीर होते रहे श्रोता

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 04:40 AM IST

Kota News - जेसीआई कोटा स्टार की ओर से बूंदी रोड स्थित रिसोर्ट पर शनिवार रात हुआ हास्य कवि सम्मेलन का रंग देर रात तक जमता रहा।...

Kota News - rajasthan news lots of humor from late night listener becoming serious
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जेसीआई कोटा स्टार की ओर से बूंदी रोड स्थित रिसोर्ट पर शनिवार रात हुआ हास्य कवि सम्मेलन का रंग देर रात तक जमता रहा। देश के नामी कवियों के द्वारा प्रस्तुत हास्य की फुहारों से श्रोता देररात भर भीगते रहे।

मुम्बई से आए हास्य सम्राट शैलेश लोढा ने संचालन करते हुए कविताओं और हंसी ठिठोली के द्वारा लोगों को खूब गुदगुदाया। उन्होंने पुरुषों पर टिप्पणी करते हुए कहा ‘‘इनका भरोसा मत करना। ये दो कौड़ी के होते हैं, करते हैं हमेशा जुल्फों की बात और दाल में एक बाल पड़ जाय तो तमाचा जड़ देते हैं।

कवयित्री गौरी मिश्रा ने श्रृंगार रस बरसाते हुए ‘‘गुलाबी नोट से ज्यादा गुलाबी गाल कर दूंगी, तुम्हें अपनी मोहब्बत से मैं मालामाल कर दूंगी, बहुत नादान है यूं तो यह नैनीताल की गौरी, से श्रोताओं को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। तो उज्जैन के कवि दिनेश दिग्गज ने भी हास्य का हंगामा बरपा दिया। जयपुर के संजय झाला, कोटा के विश्वामित्र दाधीच, नैनीताल की कवयित्री गौरी मिश्रा ने कविताओं के के साथ गीत, गजल और श्रृंगार के रंग से सराबोर कर दिया।

समाज का दर्पण हैं कविता, जो दिख रहा है वही लिख रहे : शैलेश लोढ़ा

कोई भी चीज स्थाई नहीं है। वैसे ही कविताओं में बदलाव आ रहा है, जो 50 साल पहले लिखा जाता है, वह अब नहीं लिखा जा रहा है। कविता समाज का दर्पण होती है, जो दिख रहा है और जो लोगों के समझ में आए, वही लिखा जा रहा है।

यह कहना है कि तारक मेहता का उल्टा चश्मा के फेम और कवि शैलेश लोढ़ा का। जो कोटा में एक कवि सम्मेलन में काव्यपाठ के लिए शनिवार को कोटा आए है। उन्होंने कहा कि 50 साल पहले कविताओं का अलग स्वरूप होता था। जो थोड़ी कठिन और शुद्ध हिंदी के शब्दों में लिखी होती थी, लेकिन अब कविताएं सरल और लोगों के समझ में आने वाली होती है। इससे लोगों का जुड़ाव भी बढ़ा है। युवा वर्ग में भी कविता से जुड़ाव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जो लोग मंच या संस्था से बड़ा समझते हैं, वे गलत फहमी में हैं। कोई कवि संस्था से बड़ा नहीं होता। किसी को अंहकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तारक मेहता के उल्टे चश्मे से दुनिया देख रहे हैं। बिना किसी फूहड़ता और द्विअर्थी बातों के लोगों को मनोरंजन कर रहे हैं।


एयर स्ट्राइक 130 करोड़ लोगों की भावना :पुलवामा हमले के बाद देश की भाषा बदली है। क्योंकि ऐसे हालात कभी नहीं बने। एयर स्ट्राइक 130 करोड़ लोगों की भावना है। यह मुझे भी अच्छा लगा और देशवासियों को भी अच्छा लगा है। वीर सैनिकों ने कुछ करके दिखाया है। यह होना ही चाहिए था। कब तक एक जैसी भाषा से हम काम करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के 5 साल के बारे में पूछा तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

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