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राज्य में थैलीसीमिया मरीजों को अब मिलेगा नेट टेस्टेड ब्लड, देश के सरकारी क्षेत्र में यह सुविधा अभी सिर्फ ओडिशा में है

Kota News - अब राजस्थान में थैलीसीमिया समेत अन्य ब्लड डिसऑर्डर के शिकार मरीजों को नेट (न्यूक्लिक एसिड टेस्ट) टेस्टेड ब्लड...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 09:20 AM IST
Kota News - rajasthan news net tested blood will now be available in the state of thalassemia patients this facility is currently in odisha only in the government sector of the country
अब राजस्थान में थैलीसीमिया समेत अन्य ब्लड डिसऑर्डर के शिकार मरीजों को नेट (न्यूक्लिक एसिड टेस्ट) टेस्टेड ब्लड निशुल्क मुहैया कराया जाएगा। इसके लिए जोधपुर एम्स और उदयपुर के एमबी चिकित्सालय स्थित ब्लड बैंक को नोडल सेंटर बनाया है।

नेट टेस्टेड ब्लड मिलने से मरीजों में एचआईवी या हैपेटाइटिस जैसे संक्रमण की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। देश में ओडिशा के बाद राजस्थान दूसरा राज्य है, जहां सरकारी क्षेत्र में यह सुविधा शुरू की जा रही है। यह सुविधा इतनी महंगी है कि अभी जिस किट से टेस्ट होता है उस पर बमुश्किल 100 रुपए का खर्च आता है, जबकि नेट टेस्टिंग के एक किट पर करीब 1 हजार रुपए का खर्च आएगा।

सरकार ने अजमेर, कोटा व झालावाड़ के लिए एमबी चिकित्सालय उदयपुर के ब्लड बैंक तथा जयपुर के जेकेलोन व एसएमएस, जोधपुर, बीकानेर व भरतपुर के लिए एम्स जोधपुर को नोडल सेंटर बनाया है। उक्त ब्लड बैंकों से थैलीसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, हीमोफीलिया जैसे मरीजों को ट्रांसफ्यूज किए जाने वाले सैंपल उदयपुर व जोधपुर भेजे जाएंगे। दोनों जगह से कार्मिक सैंपल कलेक्ट करने आएंगे और जांच के बाद उसकी रिपोर्ट ऑनलाइन संबंधित ब्लड बैंकों को भेज दी जाएगी। नेट टेस्ट में ओके रिपोर्ट मिलने के बाद ब्लड मरीजों को चढ़ाया जाएगा।

जांच महंगी है, लेकिन इसका फायदा भी बड़ा है

कोटा मेडिकल कॉलेज के ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. एचएल मीणा ने बताया अभी यहां फोर्थ जनरेशन किट से ब्लड टेस्ट किया जाता है। इसका विंडो पीरियड 15 से 21 दिन होता है। यानी ब्लड देने वाले मरीज के रक्त में 14 दिन पहले भी कोई इंफेक्शन हुआ है वह जांच में डिटेक्ट नहीं होगा और इन्फेक्टेड ब्लड दूसरे मरीज को चढ़ जाएगा। नेट टेस्ट का विंडो पीरियड 5 से 7 दिन होता है। ऐसे मामलों में हैपेटाइटिस बी व सी तथा एचआईवी का संक्रमण होने की आशंका ज्यादा रहती है, खासकर उन मरीजों में, जो ब्लड डिसऑर्डर के शिकार होते हैं और उन्हें रेगुलर ब्लड चढ़ाना पड़ता है। सरकार ने इन्हीं मरीजों के लिए फिलहाल यह सुविधा शुरू की है।

राजस्थान दूसरा राज्य, जहां यह सुविधा निशुल्क मिलेगी : आईएसबीटीआई

भास्कर ने इस मुद्दे पर इंडियन सोसायटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्युनोहीमेटोलॉजी (आईएसबीटीआई) के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. युधबीर सिंह से बात की। डॉ. सिंह ने कहा कि हमारी सालाना कान्फ्रेंस में यह मुद्दा हर बार उठता है। पिछले साल विशाखापत्तनम में हुई काॅन्फ्रेंस में सभी विशेषज्ञों ने यह मांग उठाई कि नेट टेस्टिंग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इस मैथड से संक्रमण की आशंका काफी कम हो जाती है। दुनिया के सभी विकासशील देश अब इसी तरीके से टेस्टेड ब्लड को ट्रांसफ्यूज करते हैं।

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