नीम-हकीम कर रहा पाइल्स का इलाज, इंफेक्शन फैलने के बाद कोटा आ रहे मरीज
संभाग में इन दिनों एक नीम-हकीम इस कदर सक्रिय हैं कि अब उनके इलाज से बिगड़े हुए केस को संभालना कोटा के डॉक्टरों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। जिले के इटावा क्षेत्र में एक नीम-हकीम पाइल्स, मस्सा या बवासीर जैसी बीमारियों के शर्तिया इलाज का दावा कर रहा है। भीलवाड़ा के रहने वाले इस झाेलाछाप के इलाज से बिगड़े हुए केस काेटा के निजी अस्पतालाें में पहुंच रहे हैं। एक सर्जन के पास बीते कुछ दिनों में ही ऐसे 3 मामले आ चुके हैं। सर्जन डॉ. मृणाल किंकर ने बताया कि कुछ मरीज ऐसी बिगड़ी हुई स्थिति में मेरे पास आए, जिनके घावों को ठीक करना चुनौती रहा। सबसे पहला केस आया तो मैंने सामान्य ताैर पर लिया। लेकिन बीते 10 दिन में ऐसे दो केस उसी क्षेत्र से आए तो रोगियों से पूरी जानकारी ली।
मरीजों ने बताया कि भीलवाड़ा का एक झोलाछाप अक्सर क्षेत्र में आता है और मस्से की एक दवा देता है। इस दवा को गाय के घी के साथ लगाने की सलाह दी जाती है। एक-दो बार दवा लगाने के बाद सूजन और घाव होने लगता है और फिर ज्यादा स्थिति बिगड़ने पर कोटा आकर डाॅक्टरों को दिखाते हैं। मरीज खातौली के सुरेंद्र (33) व कस्तूरी बाई (75) मेरे पास असहनीय दर्द की स्थिति में आए। यह इंफेक्शन खून के जरिए अन्य अंगों में फैलने की आशंका थी, जिससे रोगी की जान को भी खतरा उत्पन्न हो जाता है।
हमें इस तरह की जानकारी नहीं है। मैं बीसीएमओ को बोलता हूं कि वे इसका पता लगाएं। मैं लोगों से भी अनुरोध करता हूं कि ऐसे नीम-हकीमों की बजाय अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों से इलाज कराएं।
- डॉ. बीएस तंवर, सीएमएचओ