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22 माह बाद हो रहे टेंडर से सूचर्स को हटाया, अब सिर्फ सर्जिकल अाइटम की होगी खरीद

Kota News - कोटा मेडिकल कॉलेज में करीब 2 साल बाद होने जा रहे सर्जिकल-सूचर्स के टेंडर में से सूचर्स (टांके लगाने के धागे) बाहर कर...

Bhaskar News Network

Feb 10, 2019, 04:45 AM IST
Kota News - rajasthan news removal of the tips from the tender after 22 months now only the surgical item will be purchased
कोटा मेडिकल कॉलेज में करीब 2 साल बाद होने जा रहे सर्जिकल-सूचर्स के टेंडर में से सूचर्स (टांके लगाने के धागे) बाहर कर दिए हैं। अब सिर्फ सर्जिकल आइटम्स का ही टेंडर किया जा रहा है। ऐसे में अब सूचर्स बाजार दर से भी महंगे दामों पर खरीदने पड़ेंगे। यदि टेंडर हो जाता तो चुनिंदा फर्मों से अस्पताल रेट कॉन्ट्रेक्ट की दर पर सूचर्स खरीदे जा सकते थे। आपको बता दें कि रेट कॉन्ट्रेक्ट की दर व बाजार दर में दो से तीन गुना और कई मामलों में इससे ज्यादा अंतर होता है।

मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में हर साल 5 से 8 लाख के सूचर्स खरीद होती है। कई बार मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत आरएमएससीएल से सप्लाई आ जाती है, लेकिन सप्लाई नहीं होने की स्थिति में बीपीएल-भामाशाह या अन्य फ्री केटेगरी के मरीजों को अस्पताल द्वारा उक्त धागा खरीदकर देना पड़ता है। सूत्रों ने बताया कि इस टेंडर में करीब 60 तरह के सूचर्स के लिए दरें मांगी थी, लेकिन अब सूचर्स को टेंडर से पूरी तरह बाहर कर दिया है। अब 450 से ज्यादा तरह के सर्जिकल आइटम्स के ही टेंडर किए जा रहे हैं।

जरूरत से आधे सूचर्स भी नहीं आते सप्लाई में

मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में लोकल परचेज में दवाइयों व सर्जिकल-सूचर्स खरीद के लिए किया गया टेंडर मार्च 2017 में खत्म हो गया था। कायदे से तो पुराने टेंडर की मियाद खत्म होने से पहले ही नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जानी थी, लेकिन ऐसा होना तो दूर टेंडर खत्म होने के 22 माह बाद भी नया टेंडर नहीं हुआ। दवाइयों का टेंडर भी मार्च, 2018 में हो सका। ऐसे में पूरे साल अस्पताल को बाजार से महंगे दामों में दवाइयां खरीदनी पड़ी। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एमबीएस, जेकेलोन, न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में हर साल 20 हजार ऑपरेशन होते हैं, इनमें 20 फीसदी मरीज फ्री केटेगरी वाले होते हैं। सभी ऑपरेशन में सूचर्स की जरूरत होती है। आरएमएससीएल से सप्लाई तो आती है, लेकिन हमेशा जरूरत से आधे ही सूचर्स मुहैया होते हैं। ऐसे में संबंधित अस्पतालों को बाजार से सूचर्स खरीदने पड़ते हैं।

हैल्थ रिपोर्टर |कोटा

कोटा मेडिकल कॉलेज में करीब 2 साल बाद होने जा रहे सर्जिकल-सूचर्स के टेंडर में से सूचर्स (टांके लगाने के धागे) बाहर कर दिए हैं। अब सिर्फ सर्जिकल आइटम्स का ही टेंडर किया जा रहा है। ऐसे में अब सूचर्स बाजार दर से भी महंगे दामों पर खरीदने पड़ेंगे। यदि टेंडर हो जाता तो चुनिंदा फर्मों से अस्पताल रेट कॉन्ट्रेक्ट की दर पर सूचर्स खरीदे जा सकते थे। आपको बता दें कि रेट कॉन्ट्रेक्ट की दर व बाजार दर में दो से तीन गुना और कई मामलों में इससे ज्यादा अंतर होता है।

मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में हर साल 5 से 8 लाख के सूचर्स खरीद होती है। कई बार मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत आरएमएससीएल से सप्लाई आ जाती है, लेकिन सप्लाई नहीं होने की स्थिति में बीपीएल-भामाशाह या अन्य फ्री केटेगरी के मरीजों को अस्पताल द्वारा उक्त धागा खरीदकर देना पड़ता है। सूत्रों ने बताया कि इस टेंडर में करीब 60 तरह के सूचर्स के लिए दरें मांगी थी, लेकिन अब सूचर्स को टेंडर से पूरी तरह बाहर कर दिया है। अब 450 से ज्यादा तरह के सर्जिकल आइटम्स के ही टेंडर किए जा रहे हैं।

विवाद इतना ज्यादा हुआ कि टेंडर से बाहर करने पड़े सूचर्स: तकनीकी कमेटी

टेंडर के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से बनाई तकनीकी कमेटी के हैड डॉ. आरएस मीणा ने बताया कि सूचर्स को टेंडर से बाहर कर दिया है। सूचर्स को लेकर बिडर्स के बीच कन्ट्रोवर्सी इतनी ज्यादा हो गई थी कि रोजाना शिकायतें आने लगी। हमें हर शिकायत का निपटारा करने के बाद ही टेंडर में आगे बढ़ना पड़ता है। इनकी कन्ट्रोवर्सी खत्म नहीं तो कमेटी के सभी सदस्यों ने तय किया कि सूचर्स के चक्कर में सर्जिकल आइटम का टेंडर भी अटक जाएगा, इसलिए सूचर्स को बाहर कर दिया।

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