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सरकारी नौकरी का झांसा देकर करता था ठगी, पुलिस की गिरफ्त में फर्जी अधिकारी

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 09:20 AM IST

Kota News - भीमगंजमंडी पुलिस ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर लोगों से मोटी रकम वसूलने वाले एक फर्जी अधिकारी को गिरफ्तार किया...

Kota News - rajasthan news the government was fraudulently cheated by the job the fake officer in the custody of the police
भीमगंजमंडी पुलिस ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर लोगों से मोटी रकम वसूलने वाले एक फर्जी अधिकारी को गिरफ्तार किया है। बदमाश इतना शातिर है कि वह आए दिन नाम बदलने के साथ अपने पद भी बदल देता है। शहर पुलिस अधीक्षक दीपक भार्गव ने बताया कि 10 मई 2019 को सुभाष कॉलोनी निवासी सुनीता महावर ने रिपोर्ट दी थी। इसमें उसने कहा था कि 4 माह पहले एक व्यक्ति उसके घर आया और उसने अपना नाम मोहनलाल बताकर खुद को बड़ा अधिकारी बताया। सुनीता उसके घर पर खाना बनाने काम करने गई और 15-20 दिनों तक काम भी किया। इसी दौरान विश्वास जमने पर उसने कहा कि वह खुद अधीक्षक कार्यालय में बड़ा अधिकारी है और उसकी सरकारी नौकरी लगवा देगा। सुनीता मोहनलाल झांसे में आ गई और उसे 4 लाख रुपए दे दिए। 4 लाख लेने के बाद मोहनलाल फरार हो गया और उसने अपना फोन बंद कर लिया। पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से उस व्यक्ति का हुलिया पहचाना। पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर खुद को मोहनलाल बताने वाला आदमी महावीरनगर का हिस्ट्रीशीटर भंवरलाल पुत्र नारायण धोबी छबड़ा का रहने वाला है, हाल में संतोषीनगर कोटा में रह रहा है। बदमाश पर महावीर नगर थाने में कई मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, इस पर शहर व अन्य जिलों में 24 से ज्यादा मुकदमे दर्ज है, जिसमें 80 फीसदी मामले धोखाधड़ी के दर्ज है।

सरकारी नौकरी से निकाला हुआ है आरोपी

भंवरलाल धोबी खुद पहले वास्तव में सरकारी नौकरी में ही था, लेकिन उसके कारनामों की वजह से उसे सरकारी नौकरी से निकाल दिया गया था। भंवरलाल अटरू तहसील में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था। इस दौरान भी इसने धोखाधड़ी की थी। जिसके बाद से लोगों को झांसा देने का काम करता है। इसने वर्तमान में नयापुरा चमन होटल में खुद के नाम पर कमरा नंबर 209 बुक करवा रखा है।

लोगों के नाम की सिम करता यूज तािक वो फंसे

सीआई हर्षराज सिंह खरेड़ा ने बताया कि भंवरलाल फर्जी अधिकारी बनकर खुद बेहद हाई प्राेफाइल तरीके से रहता था, जिस वजह से हर कोई उसके झांसे में फंस जाते थे। वह हमेशा किराए की टैक्सी में अधिकारियों की तरह चलता था और बड़े-बड़े होटलों में ठहरता था। उसके पास अलग-अलग लोगों के नाम की 6 सिम, 5 आई कार्ड व अन्य वस्तुएं बरामद हुई। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि बदमाश हमेशा सरकारी नौकरी के झांसे में आने वाले बेरोजगारों की आईडी लेकर उसके नाम के सिम कार्ड जारी करवाता था, ताकि बाद में कभी काेई मामला सामने अाए ताे वह बच जाए अाैर बेराेजगार युवक फंस जाए। फिर इन्ही नामों व सिमों से फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को सरकारी नौकरी का झांसा देता था। वहीं, यह फर्जी अधिकारी बनकर टैक्सी में सूट, चश्मा, टाई पहनकर जाता और हमेशा एक दो सूट टाई कार में रखता था, जिसे देखकर लोग उसके बहकावे में आ जाते थे।

सर्किट हाउस व जिला कलेक्ट्रेट में है आना-जाना

पुलिस ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि वह सर्किट हाउस और जिला कलेक्ट्रेट के अंदर लोगों को बुलाता था और सर्किट हाउस व कलेक्ट्रेट के अंदर सरकारी अधिकारियों के कमरों में जाकर वापस निकलता था। जिस वजह से लोग समझते थे कि इस अधिकारी की कलेक्ट्रेट में अच्छी जान पहचान है। अधिकतर लोगों से पैसा और कागजात कलेक्ट्रेट के अंदर ही लेता था ताकि लोगों का इसके ऊपर विश्वास बना रहे।

जज के पीए से भी की ठगी, कई नाम बदले

प्रारंभिक पूछताछ से पता चला है कि वो बेरोजगार लोगों को धोखा देने के लिए अलग-अलग नाम से अलग-अलग विभागों में बड़ा अधिकारी बनता था। भंवरलाल रोडवेज, एमबीएस अस्पताल, जिला कलेक्ट्रेट, अधीक्षक कार्यालय, कोर्ट में जज की पीए, कोषाधिकारी बनकर लोगों को ठगता था और सरकारी नौकरी का झांसा देता था। झांसा देने में खुद को मोहनलाल, बीएल शर्मा, हेमराज बना रखा था।

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