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शहर में खूब उड़ा रंग-गुलाल, सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए

एक वर्ष पहले
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शहर में दाे दिन साेमवार व मंगलवार काे हाेलिका उत्सव की धूम रही। जहां साेमवार काे जगह-जगह हाेलिका दहन हुए अाैर वहीं पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। मंगलवार काे शहर में धूलंडी मनाई गई। इसमें जमकर लाेगाें ने हाेली खेली। कहीं लाेगांे ने रंग-गुलाल उड़ाया ताे कहीं फूलाें से भी हाेली खेली गई। दिनभर काॅलाेनी, माेहल्लाें मंे डीजे के धुन पर लाेग नाचते गाते रहे। हाेली पर रंग उड़ाते रहे।

धूलंडी के चलते छावनी, स्टेशन, विज्ञाननगर, घंटाघर, नयापुरा, डीसीएम सहित अन्य जगहाें पर भी पुलिस के पुख्ता बंदाेबस्त दिखे। 2 दिन शहरभर मंे सामाजिक संस्थाअाें व क्लबाें द्वारा फागाेत्सव व हाेली मिलन समाराेह भी मनाए। राधाकृष्ण मंदिर से बांके बिहारी मंदिर समिति की अाेर से साेमवार काे फाग संकीर्तन यात्रा निकाली गई। लाेग मंगलवार सुबह से ही घर हाेली खेलने निकल पड़े अाैर सड़काें पर युवाअाें का जाेश देखते ही बना। लाेग एक।दूसरे काे रंग-गुलाल लगाकर हाेली की बधाइयां दे रहे थे। पूरे दिन शहर में एेसा ही माहाैल रहा। लाेगाें के मन में काेराेना का भय बिलकुल भी नजर नहीं अाया।

नए काेटा में काेचिंग स्टूडेंट्स एक-दूसरे से हाेली खेलते रहे। पुराने शहर मंे रंग अाैर पानी की हाेली जमकर खेली गई। इस बार काेराेना की वजह से पूर्व सांसद इज्यराज सिंह ने हाेली नहीं खेली। वहीं पुलिस ने भी बुधवार काे इसीलिए ही हाेली नहीं खेली। कई जगहाें पर लाेगाें ने केवल तिलक हाेली मनाई। साेमवार काे नयापुरा, सुंदरधर्मशाला, स्टेशन, गांवड़ी, छावनी, डीसीएम अादि जगह हाेलिका दहन किया गया। नयापुरा मंे सांस्कृतिक कार्यक्रम हुअा। यहां हाेली देखने के लिए लाेगाें की भीड़ उमड़ी। मंत्री शांति धारीवाल मुख्य अतिथि रहे।

कायस्थ समाज ने कलम दवात, चित्रगुप्त पूजन किया

बुधवार काे भाई दाेज पर्व मनाया गया। इस दाैरान बहनाें ने भाई के माथे पर तिलक लगाया। वहीं कायस्थ समाज की अाेर से भाई दाेज पर परंपरानुसार कलम दवात एवं चित्रगुप्त पूजन अायाेजित किया गया। यह अायाेजन चित्रगुप्त मीडिया सेंटर एवं गिरिराज वास्तु सेंटर की अाेर से कीर्ति प्रेस श्रीपुरा में चित्रांश (कायस्थ) समाज द्वारा सामूहिक रूप से किया गया। कार्यक्रम की शुरूअात अध्यक्षता उमा माथुर द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के प्रवक्ता कीर्ति माथुर ने कायस्थ समाज द्वारा भाई दाेज पर कलम दवात पूजन का इतिहास व महत्व समझाया। राजस्थान कायस्थ महासभा के जिलाध्यक्ष विकास सक्सेना ने बताया कि राष्ट्रीय कायस्थ महापरिषद, राजस्थान कायस्थ महासभा, भटनागर विकास समिति, स्टेशन कायस्थ महासभा, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा एवं कायस्थ सभाभवन के पदाधिकारियाें भगवान चित्रगुप्त का महा शृंगार आरती व कलम दवात का सामूहिक रूप से बालाजी परिसर हाट रोड मन्दिर में पूजन अर्चना सामूहिक किया गया। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा राजस्थान कोटा द्वारा आज होली के पावन पर्व के दूसरे दिन भाई दोज के पावन पर्व पर आज भगवान चित्रगुप्त जी का पूजन विधि विधान से चित्रगुप्त मंदिर खेडली फाटक स्टेशन रोड में आयोजित किया।


रियासकालीन हाेली का नहीं हुअा अायाेजन

रियासतकालीन परंपरा के अनुसार हर साल खेली जाने वाली पूर्व राजपरिवार की अाेर से काेड़ामार हाेली का अायाेजन इस वर्ष नहीं हुअा। पूर्व राजपरिवार के प्राइवेट सेक्रटरी वीपी सिंह ने बताया कि इस वर्ष काेराेना वायरस व मेज नदी की दुखांतिका के चलते हाेली का अायाेजन नहीं किया गया। सिंह ने बताया कि संभवत: यह पहला अवसर है, जिसमें रियासतकालीन परंपरा के तहत खेली जाने वाली हाेली का अायाेजन नहीं हुअा। उल्लेखनीय है कि नयापुरा स्थित बृजराज भवन में रियासतकालीन परंपरा के अनुसार हर साल काेड़ामार हाेली का अायाेजन किया जाता है। वहीं, दूसरी अाेर उदयपुर में भी महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउंडेशन की अाेर से हर साल हाेने वाला हाेली महाेत्सव समाराेह भी निरस्त कर दिया है।

पुलिस ने भी नहीं खेली होली: मेज नदी बस दुखांतिका के मृतकाें काे सांत्वना देने के लिए इस बार पुलिस महकमें में हाेली नहीं खेली गई। मेज नदी हादसे की पीडितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कोटा शहर पुलिस ने भी इस बार होली नहीं खेली। कोटा शहर के साथ-साथ कोटा ग्रामीण अौर बूंदी पुलिस ने भी होली नहीं खेली हैं। पुलिस के किसी भी अधिकारी-कर्मचारी ने इस बार होली नही खेली। हर बार पुलिस लाइन में पुलिसकर्मी होली के एक दिन बाद सामूहिक होली खेलते थे, जिसमें पुलिस अधिकारियों सहित कर्मचारी भाग लेते रहे हैं। इस बार पुलिस लाइन परिसर में किसी ने भी होली नहीं खेली।

नयापुरा आदर्श हाेली संस्थान पर मुख्यअतिथि यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने होलिका दहन किया। बाद में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। इसमें कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा।
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