रेलवे में चुनौतीपूर्ण कार्य भी संभाल रहीं महिलाएं

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | कोटा

रेलवे में शायद ही कोई ऐसी कैटेगरी होगी जिसमें महिलाएं अपनी भूमिका नहीं निभा रही हों। चाहे वो ट्रेन को चलाने का काम हो या ट्रैक की मरम्मत का काम हो, महिलाएं अब ट्रेनों के संचालन की प्लानिंग कंट्रोल रूम में बैठकर करने लगी हैं। लोको पायलट के साथ ही गार्ड, स्टेशन मास्टर, महिला ट्रैकमैन, टेक्निशियन का काम भी महिला कर रही हैं।

रेलवे कंट्रोल रूम में डोली गोठवाल अब ट्रेनों के संचालन वाले बोर्ड पर बैठकर ट्रेनों को किस लाइन पर लाना है यह तय करती है। वह प्लानिंग करती है कि किस लाइन पर कौनसी मालगाड़ी व पैसेंजर ट्रेन को लेना है। इसके साथ ही उन्हें पंक्चवलिटी का ध्यान रखना होता है। स्टेशन मास्टर कामिनी सिंह व कविता अगनानी अपना काम बखूबी निभा रही हैं। वे ट्रेन के लिए लाइन क्लियर रखने, शटिंग करवाने, कॉशन आर्डर जारी करने का काम करती हैं। कोटा मंडल में 5 रेलवे स्टेशन मास्टर हैं। उनका कहा है कि एबनॉर्मल होने पर काम में थोड़ी परेशानी होती है। महिला लोको पायलेट उषा रानी व डिम्पल सोलंकी कोटा से गंगापुरसिटी तक मालगाडिय़ों को चलाती हैं। उनका कहना है कि ऐसा कोई काम नहीं जिसे महिला नहीं कर सकती। दिन या रात कभी भी ट्रेन ले जाने की बुकिंग आ जाती है। महिला लोको पायलट जाती हैं। वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे एंप्लाइज यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने बताया कि कोटा रेल मंडल में लगभग 500 महिला रेल कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें महिला टीटीई, आरक्षण केन्द्र लिपिक, टेक्निशियन , महिला ट्रैक मेंटेनर शामिल हैं।

एमएबीएड हैं महिला ट्रैकमैन, 35 िकलो के अौजार उठाकर करती हैं मरम्मत
कोटा रेल मंडल में ट्रैक की मरम्मत का काम महिला ट्रैकमैन भी करती हैं। इनमें से कई एमएबीएड हैं। महिला ट्रैकमैन तबस्सुम बानो, मीरा वर्मा, कुसुम, सपना, नगिना सभी पढ़ी लिखी हैं। इनमें से कोई एमएबीएड है तो कोई एमएससी है। ये महिला ट्रैकमैन अपने साथ 35 किलोग्राम वजन के अौजार उठाकर अपनी बीट में ट्रैक की मरम्मत का काम करती हैं। साथ ही कैरिज एंड वैगन विभाग में मालगाडिय़ों के वैगन की मरम्मत का काम महिला कर्मचारी सीमा सिंह, रचना शर्मा व जूनियर इंजीनियर सुनीता शर्मा कर रही हैं। रेलवे में अकाउंट्स का काम करने में भी महिला कर्मचारी नालिंदी, शुभेन्दु शर्मा, ममता दुबे अपनी बेहतर भूमिका निभा रही हैं।

ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | कोटा

रेलवे में शायद ही कोई ऐसी कैटेगरी होगी जिसमें महिलाएं अपनी भूमिका नहीं निभा रही हों। चाहे वो ट्रेन को चलाने का काम हो या ट्रैक की मरम्मत का काम हो, महिलाएं अब ट्रेनों के संचालन की प्लानिंग कंट्रोल रूम में बैठकर करने लगी हैं। लोको पायलट के साथ ही गार्ड, स्टेशन मास्टर, महिला ट्रैकमैन, टेक्निशियन का काम भी महिला कर रही हैं।

रेलवे कंट्रोल रूम में डोली गोठवाल अब ट्रेनों के संचालन वाले बोर्ड पर बैठकर ट्रेनों को किस लाइन पर लाना है यह तय करती है। वह प्लानिंग करती है कि किस लाइन पर कौनसी मालगाड़ी व पैसेंजर ट्रेन को लेना है। इसके साथ ही उन्हें पंक्चवलिटी का ध्यान रखना होता है। स्टेशन मास्टर कामिनी सिंह व कविता अगनानी अपना काम बखूबी निभा रही हैं। वे ट्रेन के लिए लाइन क्लियर रखने, शटिंग करवाने, कॉशन आर्डर जारी करने का काम करती हैं। कोटा मंडल में 5 रेलवे स्टेशन मास्टर हैं। उनका कहा है कि एबनॉर्मल होने पर काम में थोड़ी परेशानी होती है। महिला लोको पायलेट उषा रानी व डिम्पल सोलंकी कोटा से गंगापुरसिटी तक मालगाडिय़ों को चलाती हैं। उनका कहना है कि ऐसा कोई काम नहीं जिसे महिला नहीं कर सकती। दिन या रात कभी भी ट्रेन ले जाने की बुकिंग आ जाती है। महिला लोको पायलट जाती हैं। वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे एंप्लाइज यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने बताया कि कोटा रेल मंडल में लगभग 500 महिला रेल कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें महिला टीटीई, आरक्षण केन्द्र लिपिक, टेक्निशियन , महिला ट्रैक मेंटेनर शामिल हैं।

रेलवे में कार्यरत महिलाएं।

कोटा रेल मंडल में ट्रैक की मरम्मत का काम महिला ट्रैकमैन भी करती हैं। इनमें से कई एमएबीएड हैं। महिला ट्रैकमैन तबस्सुम बानो, मीरा वर्मा, कुसुम, सपना, नगिना सभी पढ़ी लिखी हैं। इनमें से कोई एमएबीएड है तो कोई एमएससी है। ये महिला ट्रैकमैन अपने साथ 35 किलोग्राम वजन के अौजार उठाकर अपनी बीट में ट्रैक की मरम्मत का काम करती हैं। साथ ही कैरिज एंड वैगन विभाग में मालगाडिय़ों के वैगन की मरम्मत का काम महिला कर्मचारी सीमा सिंह, रचना शर्मा व जूनियर इंजीनियर सुनीता शर्मा कर रही हैं। रेलवे में अकाउंट्स का काम करने में भी महिला कर्मचारी नालिंदी, शुभेन्दु शर्मा, ममता दुबे अपनी बेहतर भूमिका निभा रही हैं।

खबरें और भी हैं...