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विश्व जल दिवस आज; चंबल है प्रदेश की एक मात्र सदानीरा नदी

एक वर्ष पहले
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कोटा| राजस्थान की चंबल नदी ही एक ऐसी नदी है जाे सालभर बहती है। मध्यप्रदेश के जनरल भाव से निकली यह नदी राजस्थान में चित्ताैड़गढ़ जिले के रावतभाटा एरिया से होते हुए काेटा-बूंदी की सीमा काे छूती हुई सवाईमाधाेपुर, कराैली, धाैलपुर जिले के पास यमुना नदी में समाहित हाे रही है। चम्बल नदी की मांगली, घाेड़ापछाड़, पार्वती, परवन, उजाड़, अाहू, अालनिया, चंद्रलाेई अादि सहायक नदियां है। जाे इस नदी में मिलती है। मध्यप्रदेश से लेकर काेटा तक इस नदी पर चार बढ़े बांध बने हुए है। जिनमें मध्यप्रदेश सीमा में मंदसाैर जिले में गांधी सागर बांध, राजस्थान के चित्ताैड़गढ़ िजले के रावतभाटा में राणा प्रताप सागर बांध, बूंदी जिले के जवाहर सागर में जवाहर सागर बांध व काेटा में काेटा बैराज बांध प्रमुख है। इन चाराें बांधाें में सालभर नदी के पानी का भराव रहता है। जिससे यहां विद्युत उत्पादन किया जाता है। साथ ही काेटा में बने बांध काेटा बैराज से निकली दाईं व बाईं मुख्य नहर से प्रदेश के बूंदी, काेटा, बारां जिले की साढ़े 2.29 लाख हैक्टेयर व मध्य प्रदेश के श्याेपुर, भिंड, मुरैना जिले की 2.29 लाख हैक्टेयर भूमि सिंिचत की जाती है। जवाहर सागर चंबल घड़ियाल सेंचुरी कोटा बैराज से केशोरायपाटन होती हुई धौलपुर कलोंजी तक पहुंचती है। इस नदी में अधजल हैं। इसमें वोटर मगरमच्छ घड़ियाल सहित अन्य प्रजातियां पाई जाती है। देसी विदेशी सैलानियों को यहां चंबल में वोटिंग करने का अनूठा आनंद मिलता है। नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि चंबल नदी कोटा के लिए नहीं अपितु राजस्थान के लिए एक वरदान है।
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