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66 लाख रुपए से 9 बावड़ियों का हो रहा जीर्णोद्धार, चार में लग चुके फाउंटेन

कई बार सफाई अभियान चलाने के बाद भी वापस दूषित होने वाली शहर की प्राचीन बावड़ियों का पानी अब खराब नहीं होगा।

Danik Bhaskar | Jul 16, 2018, 07:03 PM IST

कोटा. कई बार सफाई अभियान चलाने के बाद भी वापस दूषित होने वाली शहर की प्राचीन बावड़ियों का पानी अब खराब नहीं होगा। पानी का रोटेशन लगातार बना रहे इसके लिए अब इन पर सोलर एनर्जी से चलने वाले फाउंटेन लगाए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर की ऐसी 9 बावड़ियों को शामिल किया गया है। इनमें से 4 में फाउंटेन लग चुके हैं बाकी में काम चल रहा है। इन पर करीब 66 लाख रुपए खर्च आएगा।

- शहर के लगभग हर इलाके में प्राचीन बावड़ियां हैं। समय के साथ-साथ इनका उपयोग कम होने लगा तो आसपास के लोगों ने इन बावड़ियों को कचरा स्थल बना दिया। हर साल गर्मी आते ही प्राकृतिक स्रोत की चिंता होती है। सफाई अभियान चलाकर इन्हें साफ भी किया जाता है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद ये वापस कचरे से भर जाती हैं। इनमें टूट-फूट भी होने लगी। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के लाख प्रयास के बाद भी इनकी हालत नहीं सुधर रही है।

अब पानी का रोटेशन बनेगा तो साफ रहेगा

- इन बावड़ियों में पानी की आवक तो काफी है। 8 से 10 माह इनमें पानी रहता है, लेकिन वो पानी काम में नहीं आने के कारण वहीं सड़ता रहता था। बाकी की कसर लोग कचरा डालकर पूरी कर देते थे। अब फाउंटेन लगने से पानी का रोटेशन बनेगा, उसे ऑक्सीजन मिलेगी तो खराब नहीं होगा। साथ ही कचरा डलना बंद हो जाएगा।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के बजट से होगा काम


- पिछले दिनों स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जलसंरक्षण के लिए इन बावड़ियों के जीर्णोद्धार का प्लान तैयार किया गया। जिसमें जमना बावड़ी, तरणताल के सामने की बावड़ी, सीवी गार्डन, रंगबाड़ी बालाजी बावड़ी, नागाजी के बाग वाली बावड़ी, दूधा धारी मंदिर लाड़पुरा की बावड़ी सहित 9 बावड़ियों का चयन किया गया। इनमें से 4 बावड़ियों की सफाई करवाकर उसकी मरम्मत करवाई और सोलर फाउंटेन लगा दिए गए।