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पंचायतों का अंधविश्वास : पंचों के तुगलकी फरमान से 24 साल पहले 5 साल के बच्चे ने 7 दिन चबूतरे में बिताए, आज हैं डाॅक्टर

भास्कर की पड़ताल: हाड़ौती के गांवों में पंच और समाज के ठेकेदार आजादी के पहले से ही इस तरह के तुगलकी फरमान सुनाते आ रहे

Danik Bhaskar | Jul 13, 2018, 07:38 AM IST
राकेश कुमार वैष्णव व एमडी फिजि राकेश कुमार वैष्णव व एमडी फिजि

कोटा/रावतभाटा. बूंदी जिले के हरिपुरा गांव की पांच साल की खुशबू से टिटहरी के अंडे क्या फूटे पंचायत ने मासूम बच्ची का बहिष्कार कर दिया था। यह घटना कोई नई नहीं है। गुरुवार को भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि हाड़ौती के गांवों में पंच और समाज के ठेकेदार आजादी के पहले से ही इस तरह के तुगलकी फरमान सुनाते आ रहे हैं। इसका छोटे बच्चों को भुगतना पड़ता है। जो व्यक्ति पंचायतों के अंधविश्वास का शिकार होता है उसे घर के बाहर जाना पड़ता है।

बचपन में टिटहरी के अंडे फूटे थे पंचों ने किया सामाजिक बहिष्कार: बारां के अंता सीएचसी में कार्यरत एमडी फिजिशियन डॉ. कमल मीणा ने बताया कि वह सुल्तानपुर के पास स्थित चांवडहेड़ी गांव के रहने वाले हैं। वर्ष 1994 में जब उनकी उम्र 4-5 साल की थी खेत पर टिटहरी के अंडे फूट गए थे। गांव में पता लगने पर पंचायत के पंचों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया था। 7 रात उन्होंने गांव के चबूतरे पर काटी। सिर मुंडवा दिया गया था। उन्होंने कहा पंचायतों का अंधविश्वास गलत है। यह बच्चों को डराने वाली घटनाएं हैं।

बाइक से मर गई थी गिलहरी, पंचों ने बहिष्कार किया, सिर भी मुंडवाया: 22 जुलाई 2016 को रावतभाटा क्षेत्र के लाडपुरा गांव के करीब 30 वर्षीय राकेश कुमार वैष्णव से बाइक चलाते समय गिलहरी मर गई थी। गांव की पंच पटेलों की पंचायत ने उसका बहिष्कार कर दिया था। सिर मुंडवाया, ब्राह्मणों को दान करवाया। वैष्णव के अनुसार ऐसा अंध विश्वास उसके आसपास के अन्य गांवों में पनपा हुआ है। पटेलों की बैठक प्रायश्चित का दंड तय करती है। उसे करीब चार से पांच दिन घर के बाहर सोना पड़ा था।