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पत्नी-बेटी के इलाज से पहले हॉस्पिटल प्रशासन बोला- ये ‘बाहरी’ हैं, फौजी ने कहा- हमारी जाति भारतीय है तो हम बाहरी कैसे हो गए

फौजी बोला- यह कैसी पॉलिसी, भारतीय नागरिक ही ‘बाहरी’ हो गए।

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 02:46 PM IST
Story of kota MBS Hospital

कोटा (राजस्थान)। देश के अलग-अलग कोनों में रहकर सेवा देते हुए उन्हें कभी यह नहीं लगा कि वे बाहर से हैं। उनके जेहन में भी एक ही बात हमेशा रही कि हम मुल्क के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन सोमवार को हुए एक वाकये ने पहली बार उन्हें “बाहरी’ होने का अहसास करा दिया। मामला कोटा में पोस्टेड एक फौजी के परिवार का है। एक्सीडेंट में घायल पत्नी व बेटी को इलाज के लिए एमबीएस अस्पताल लेकर गए तो अस्पताल प्रबंधन ने यह कहते हुए इलाज का पैसा मांग लिया कि “ये तो बाहर के हैं’। मामला जब आर्मी के उच्चाधिकारियों तक पहुंचा तो उन्हाेंने एमबीएस अधीक्षक से बात भी की, लेकिन राज्य सरकार के आदेशों का हवाला देकर उन्होंने चार्ज माफ करने से साफ मना कर दिया। महाराष्ट्र के नागपुर निवासी अयाज शेख सेना में कार्यरत हैं और कोटा में पोस्टेड हैं। उनका परिवार रविवार को अजमेर जा रहा था, देवली के पास बस का एक्सीडेंट हुआ, जिसमें पत्नी फरजाना और बेटी लीजा समेत अन्य सदस्य घायल हो गए। उन्होंने रविवार को ही पत्नी व बेटी को एमबीएस में एडमिट कराया।

फीस की बात सुन हैरान रह गया परिवार

इमरजेंसी में भर्ती फरजाना और लीजा को सोमवार को अस्थि रोग विभाग के डॉक्टरों ने देखा। फरजाना का ऑपरेशन बताकर जरूरी दस्तावेज जमा कराने को कहा। जैसे ही दस्तावेजों में उनकी आईडी महाराष्ट्र की आई तो वार्ड में कार्यरत स्टाफ ने साफ कह दिया कि आपको पैकेज के अनुरूप 18 हजार रुपए जमा करने होंगे। इसी तरह बेटी काे भी बेहोश करके घाव की सफाई होगी, इसका भी माइनर पैकेज चार्ज किया जाएगा। यह सुनकर परिवार को काफी अजीब लगा। इसी परिवार की एक और सदस्य नुरून्निशा (70) भी हादसे में घायल हुई थी, वे भी नागपुर की ही रहने वाली हैं। इतना भारी चार्ज सुनकर परिवार के अन्य लोग उन्हें महाराष्ट्र लेकर जा रहे हैं।

फौजी बोला- यह कैसी पॉलिसी, भारतीय नागरिक ही ‘बाहरी’ हो गए

भास्कर से बातचीत में फौजी अयाज ने कहा कि सरकारी अस्पताल में भी भारत के ही नागरिकों को ‘बाहरी’ बताकर पैसा लिया जा रहा है। पेशेंट के मामले में इस तरह की पॉलिसी ठीक नहीं। हम लोग फौज में हैं और हम खुद को किसी भी स्टेट का नहीं मानते। हम सिर्फ यह मानते हैं कि हम भारत के रहने वाले हैं और हमारी जाति भारतीय है। सरकार को सोचना चाहिए कि कम से कम फौजियों पर तो ऐसे नियम लागू नहीं करें। मुद्दा पैसों से ज्यादा भावनाओं का है, हमसे पैसा लिया जा रहा है, बगल के पलंग पर भर्ती पेशेंट का इलाज फ्री है।

यह सरकार के आदेश हैं कि राजस्थान के बाहर के रहने वाले हर मरीज का तय पैकेज राशि वसूल करनी है। उसी के तहत इस परिवार से भी चार्ज लेने को कहा गया। हालांकि हम ऑपरेशन के बाद इन्हें एक लेटर बनाकर देंगे, जिससे इन्हें पूरा पैसा अपने विभाग से मिल जाएगा।

- डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक, एमबीएस

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