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अब फाइलों का झंझट दूर, ऑनलाइन तकमीना बनेंगे

ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने वाली देश की सबसे बड़ी योजना मनरेगा अब कागजों के मकड़जाल से बाहर निकल कर...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:40 AM IST
ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने वाली देश की सबसे बड़ी योजना मनरेगा अब कागजों के मकड़जाल से बाहर निकल कर हाइटेक हो रही है। वर्षो से फाइलों में मंथर गति से हो रही तकनीकी स्वीकृति का कार्य अब सॉफ्टवेयर के जरिए एक क्लिक पर तेज गति से होगा। इससे कार्य स्वीकृत फटाफट होंगे व कार्य भी जल्द प्रारंभ होंगे। राज्य सरकार अभी इस कार्य को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एक मार्च से जयपुर जिले में लागू कर रही है। इसके बाद एक अप्रैल से संपूर्ण राज्य में लागू कर दिया जाएगा।

मनरेगा में तकनीकी कार्य स्वीकृति करने के लिए कागजी कार्रवाई की वर्तमान में लंबी प्रक्रिया है। इसमें सर्वप्रथम ग्राम पंचायत ग्राम सभा में क्या कार्य करवाने है, इसके प्रस्ताव लेती है। इस प्रस्ताव के बारे में संबंधित पंचायत समिति को सूचना देनी होती है। इस पर वहां जेईएन तकनीकी सहायक प्रस्तावों का मूल्यांकन कर उसका एस्टीमेट व तकमीना बनाता है। इसको संबंधित पंचायत समिति का सहायक अभियंता देखता है और फिर विकास अधिकारी के माध्यम से जिला स्तर पर वह फाइल भेजी जाती है। जहां सहायक अभियंता पुन: इन प्रस्तावों को जांचता है। इसके बाद अधिशासी अभियंता देखता है, फिर अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक के माध्यम से जिला कलेक्टर व जिला कार्यक्रम समन्वयक स्वीकृति जारी करते है। यह सारा कार्य कागजी होने के कारण इसमें काफी समय लगता है।

अब सिक्योर सॉफ्टवेयर से तुरंत स्वीकृत होंगे काम

अब मनरेगा द्वारा एक साॅफ्टवेयर बनाया गया जिसे सिक्योर नाम दिया गया है। इसके माध्यम से अब मनरेगा में ऑनलाईन तकमीना बनाना व स्वीकृतियां जारी करने का कार्य होगा। इस साॅफ्टवेयर में पंचायत समिति स्तर पर ही सभी कार्यो की फीडिंग व संपूर्ण तकमीना बनाया जाएगा। इसके बाद इसे जिला स्तर पर ऑनलाइन ही सबमिट कर दिया जाएगा। जिला स्तर के अधिकारी इसे देखकर आगे जिला कलेक्टर व जिला कार्यक्रम समन्वयक को भेजेंगे। जहां से ऑनलाइन स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। प्रस्ताव में कमी होने पर भी पुन: लौटाना भी ऑनलाइन होगा। साथ ही इसका लिंक मनरेगा वेबसाइट पर दिया गया, जिससे तकनीकी स्वीकृति मिलते ही यह पब्लिक डोमेन में आ जाएगा जहां पर कोई भी इसे देख सकता है या प्रिंट भी ले सकता है। बीडीओ रेखा रानी व्यास व एईएन महेन्द्र गुप्ता ने बताया कि एक मार्च से इस साॅफ्टवेयर द्वारा प्रशासनिक, तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति ऑनलाइन देना शुरू कर दिया जाएगा ताकि काम समय रहते पूर्ण हो सके।