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बदहाली पर आंसू बहाता कल्याणपुरा कलां का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र

भास्कर न्यूज| नारेहडा ग्रामीण सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाए मुहैया करवाने के भले ही दावे...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 05:20 AM IST
भास्कर न्यूज| नारेहडा ग्रामीण

सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाए मुहैया करवाने के भले ही दावे करें लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। 1977 में शुरू हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण भामाशाह मुरलीधर अग्रवाल के पुत्र भगवानदास, सूरजमल व रामेश्वर अग्रवाल ने कराया था। मगर देखरेख के अभाव में भवन जीर्णशीर्ण हो गया। हालात यह है कि भवन के दरवाजे व खिडकियां टूटी हुई है। चिकित्सक व नृसिंग स्टॉफ के आवास जर्जर अवस्था में हो जाने से यह आसामाजिक तत्वों की शरणस्थली बन गए। भवन की दीवारों व छत की पटि्टयों से चूना गिरने के साथ ही बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने लगता है। इससे दवाईयां भी खराब हो जाती है।

सरपंच बुद्धराम चनेजा व राष्ट्रीय गुर्जर विकास मंच के महामंत्री जयराम पोसवाल ने बताया कि जर्जर भवन के बारे में कई बार विभाग को अवगत करवाया, लेकिन इस कोई ध्यान नही दिया जा रहा है।

सरपंच व ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पर कार्यरत चिकित्सकों के अनुपस्थित रहने से मरीजों को चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पाती। इसके चलते ग्रामीणों को मजबूरन नारेहड़ा या कोटपूतली जाना पड़ता है। केन्द्र पर लैब टैक्नीशियन के नहीं होने से मरीजों की जांचे भी नहीं हो पाती है। कार्मिकों के देखरेख के अभाव में केन्द्र पर जगह- जगह गंदगी फैलना, शौचालय गंदगी से अटे पड़ा रहना आम बात हो गई है। केन्द्र पर फर्नीचर व पानी की व्यवस्था नहीं होने पर स्टॉफ व मरीजों को भारी असुविधा होती है। केन्द्र के आसपास गंदगी व कचरे के ढेर लगे होने के कारण यहां का वातावरण दूषित हो रहा है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से जुड़े गांव

इस केन्द्र से कल्याणपुरा कलां, पदमा की ढाणी, कुहाड़ा, पवाना राजपूत, चुरी, राघोजी की ढाणी, रामनगर, भैंरूजी की ढाणी, भूतो की ढाणी, चोटिया की ढाणी सहित आसपास के गांव जुड़े हुए है। सरपंच बुद्धराम चनेजा ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर अधिकतर चिकित्सकों के उपस्थित नहीं होने से प्रसव व आपात कालीन परिस्थितियों में उपचार के लिए मरीजों को नारेहड़ा व कोटपूतली जाना पड़ता है।

स्टॉफ की कमी

केन्द्र पर लैब टैक्निशियन, स्टॉफ नर्स द्वितीय, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व स्वीपर के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे है।

बजट आते ही भवन की मरम्मत करा लेंगे