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संस्कृत स्कूलों में नामांकन 100 से भी कम, शिक्षकों के पद भी खाली

कार्यालय संवाददाता | शाहपुरा लाखों करोड़ों रुपए की भारी भरकम राशि खर्च करने के बावजूद प्रदेश की संस्कृत स्कूलों...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 08, 2018, 05:30 AM IST

कार्यालय संवाददाता | शाहपुरा

लाखों करोड़ों रुपए की भारी भरकम राशि खर्च करने के बावजूद प्रदेश की संस्कृत स्कूलों के हालात खराब हो रहे है। संसाधनों के अभाव में संस्कृत स्कूलों में न तो पर्याप्त छात्र संख्या है और न ही भवन। संस्कृत विभाग में सरकार द्वारा दस साल से कोई भर्ती नहीं निकाले जाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से नामाकंन घटता जा रहा है।

प्रदेश में सामान्य शिक्षा विभाग की स्कूलों की तरह संस्कृत शिक्षा विभाग की स्कूलों में हर वर्ष छात्र संख्या घट रही है। सामान्य शिक्षा विभाग ने छात्र संख्या कम होने के कारण उन स्कूलों को दूसरी स्कूलों में मर्ज कर सुधार के प्रयास किए है। पिछले दो-तीन सालों को बात को जाए तो सामान्य शिक्षा विभाग ने कम छात्र संख्या के चलते सैकडों स्कूलों को बंद किया, लेकिन जयपुर जिले की संस्कृत स्कूलों पर नजर डाली जाए तो इनमें छात्र संख्या बहुत कम है। कम छात्र संख्या होने के बावजूद विभाग लाखों रुपए खर्च कर इन्हें संचालित कर रहा है। सूचना का अधिकार के तहत संस्कृत शिक्षा विभाग से एडवोकेट संदीप कलवानिया को मिली जानकारी के अनुसार जिले में 12वीं(वरिष्ठ उपाध्याय) एवं 10वीं(प्रवेशिका) कक्षा तक संचालित हो रही संस्कृत स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2017-2018 में छात्र संख्या 100 तक भी नहीं है। कम छात्र संख्या होने के कारण न तो इन स्कूलों को संचालित करने का उद्देश्य पूरा हो पा रहा है और न ही इन स्कूलों लगे शिक्षकों का सही उपयोग हो पा रहा है। सरकार कम नामांकन वाली स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों को वेतन के रूप में हर महीने लाखों रुपए खर्च कर रही है। इसके बावजूद भी सरकार इनके बिगड़ते हालात के प्रति गंभीर नहीं है। पिछले दस साल से संस्कृत शिक्षा में भर्ती नहीं होने से स्कूलों में विषयाध्यापकों के पद खाली पड़े है और संसाधनों के अभाव के कारण छात्र संख्या पर विपरित असर पड़ रहा है। एडवोकेट संदीप कलवानियां ने बताया कि सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या कम होना चिंता का विषय है। सरकार को छात्र संख्या बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए। समय की मांग के अनुसार सरकारी स्कूलों में भी निजी स्कूलों की तरह सुविधाएं करनी चाहिए।

वरिष्ठ उपाध्याय (12वीं) संस्कृत स्कूल जिनमें 100 से कम छात्र संख्या

स्कूल का नाम छात्र शिक्षक

जसवंतपूरा 94 11

पावटा 53 7

मोरिजा 59 11

बड़ के बालाजी 71 13

शाहपुरा 56 10

कार्यालय संवाददाता | शाहपुरा

लाखों करोड़ों रुपए की भारी भरकम राशि खर्च करने के बावजूद प्रदेश की संस्कृत स्कूलों के हालात खराब हो रहे है। संसाधनों के अभाव में संस्कृत स्कूलों में न तो पर्याप्त छात्र संख्या है और न ही भवन। संस्कृत विभाग में सरकार द्वारा दस साल से कोई भर्ती नहीं निकाले जाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से नामाकंन घटता जा रहा है।

प्रदेश में सामान्य शिक्षा विभाग की स्कूलों की तरह संस्कृत शिक्षा विभाग की स्कूलों में हर वर्ष छात्र संख्या घट रही है। सामान्य शिक्षा विभाग ने छात्र संख्या कम होने के कारण उन स्कूलों को दूसरी स्कूलों में मर्ज कर सुधार के प्रयास किए है। पिछले दो-तीन सालों को बात को जाए तो सामान्य शिक्षा विभाग ने कम छात्र संख्या के चलते सैकडों स्कूलों को बंद किया, लेकिन जयपुर जिले की संस्कृत स्कूलों पर नजर डाली जाए तो इनमें छात्र संख्या बहुत कम है। कम छात्र संख्या होने के बावजूद विभाग लाखों रुपए खर्च कर इन्हें संचालित कर रहा है। सूचना का अधिकार के तहत संस्कृत शिक्षा विभाग से एडवोकेट संदीप कलवानिया को मिली जानकारी के अनुसार जिले में 12वीं(वरिष्ठ उपाध्याय) एवं 10वीं(प्रवेशिका) कक्षा तक संचालित हो रही संस्कृत स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2017-2018 में छात्र संख्या 100 तक भी नहीं है। कम छात्र संख्या होने के कारण न तो इन स्कूलों को संचालित करने का उद्देश्य पूरा हो पा रहा है और न ही इन स्कूलों लगे शिक्षकों का सही उपयोग हो पा रहा है। सरकार कम नामांकन वाली स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों को वेतन के रूप में हर महीने लाखों रुपए खर्च कर रही है। इसके बावजूद भी सरकार इनके बिगड़ते हालात के प्रति गंभीर नहीं है। पिछले दस साल से संस्कृत शिक्षा में भर्ती नहीं होने से स्कूलों में विषयाध्यापकों के पद खाली पड़े है और संसाधनों के अभाव के कारण छात्र संख्या पर विपरित असर पड़ रहा है। एडवोकेट संदीप कलवानियां ने बताया कि सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या कम होना चिंता का विषय है। सरकार को छात्र संख्या बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए। समय की मांग के अनुसार सरकारी स्कूलों में भी निजी स्कूलों की तरह सुविधाएं करनी चाहिए।

प्रवेशिका(10वीं) संस्कृत स्कूल जिनमें 100 से कम छात्र

स्कूल छात्र शिक्षक

अटलबिहारीपुरा, आमेर 98 7

गोविंदगढ़, चौमू 97 8

दहमीकलां 64 9

नायन 57 8

बरवाड़ा 90 7

भानपुर कलां 66 6

भीखावाला 91 9

मंगरवालीढाणी, गोविंदगढ़ 21 5

महेशपुरा गिदानी 52 9

रतनपुरा 89 7

राजपुरा उस्ता, बस्सी 73 8

रामसिंहपुरा, कोटपुतली 43 5

सिरसली, आमेर 64 8

सिरोली 78 5

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