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कचरा प्लांट और जैविक खाद के प्रयास नहीं, 35 में से 8 वार्ड में ही हो रहा डोर टू डोर कचरा संग्रहण

भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए 15 दिन में टीम आ सकती है। तैयारियों के मामले में पालिका...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 06:20 AM IST

भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी

स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए 15 दिन में टीम आ सकती है। तैयारियों के मामले में पालिका के दावे तो लम्बे चौड़े हैं। लेकिन कचरा प्लांट न लगने और पार्कों व संस्थाओं द्वारा जैविक खाद के लिए डी-कंपोस्टिंग की तैयारी नहीं होने व मार्किंग घटने की संभावना है। कागजों में खुले में शौच से मुक्त होने का भी दावा किया जा रहा है। लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। ओडीएफ सर्टिफिकेट, सिटीजन फीडबैक और डॉक्यूमेंटेशन में तैयारी के बावजूद 4400 में से पासिंग नंबर मिलना भी मुश्किल लग रहा है। पिछले दो दशक में जिस स्तर पर शहर का विस्तार हुआ। उस हिसाब से न तो नगर पालिका का सफाई अमला बढ़ा और न ही संसाधन। आलम ये है कि 35 वार्डों का कचरा उठाने के लिए डोर-टू-डोर वाहनों की संख्या मात्र 10 है। सभी वार्डों में करीब 25 टन कचरा निकल रहा है। लेकिन उनमें से 21 टन कचरे का परिवहन का दावा नगर पालिका द्वारा किया जा रहा है। डोर टृू डोर कचरा संग्रहण केवल 8 वार्डों में हो रहा है। आलम ये है कि न तो गीले और सूखे कचरे का अलग-अलक निस्तारण किया जा रहा है और न ही हानिकारक अपशिष्ट के लिए निर्धारित मापदंडों को अपनाया जा रहा है। कई बाहरी वार्डों में तो अभी भी प्रतिदिन कचरा परिवहन के लिए वाहन तक नहीं पहुंच रहे हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में डी-कंपोस्टिंग के 176 अंक हैं। इस व्यवस्था के लिए निकायों को सरकारी पार्कों में जैविक कचरे के लिए हौदियां और मैरिज गार्डन व होटलों जैसे बड़े कचरा उत्पादक क्षेत्रों में कचरे की डी कंपोस्टिंग की व्यवस्था कराना अनिवार्य था। कुचामन समेत जिले के किसी भी निकाय में न तो पार्कों में हौदियां बनवाई हैं और न ही खाद बनाने की कोई प्रक्रिया शुरू की गई है। यानी यह तय है कि सर्वे में इसके लिए किसी प्रकार के अंक नहीं मिल पाएंगे।

कचरा प्रबंधन में कमजोर ही मान रहे अधिकारी : कुचामन नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी राकेशकुमार शर्मा भी मानते हैं कि कचरा प्रबंधन के समुचित संसाधन नहीं है। उनका कहना है कि इस बार सर्वेक्षण में उन्होंने शहर में बेसिक कार्य प्रारंभ कर माहौल तैयार करने से लेकर सफाई बढ़ाने पर फोकस किया है। इसके बूते अव्वल तो नहीं लेकिन प्रदेश स्तर पर अच्छी रैंकिंग मिलने की उम्मीद है।

डी-कंपोस्टिंग के 176 और कचरा प्रबंधन के 200 अंक नहीं मिलने से गिरेगी रैंक

जैविक-कंपोस्टिंग पर 28 नंबर निर्धारित किए गए हैं। इसमें यह देखा जाएगा कि कितने प्रतिशत सरकारी पार्कों में हौदी बनाकर पार्क के जैविक कचरे से खाद बनाई जा रही है।

1. पार्क

स्थिति

किसी भी पार्क में हौदियां नहीं रखीं गईं हैं।

4 कचरा उपचारण

सेंट्रलाइज या डी-सेंट्रलाइज तरीके से कचरे के उपचारण को 50 अंक दिए जाने हैं।

स्थिति

ऐसा कोई प्रयास शुरू नहीं किया गया।

वैज्ञानिक तरीके से होना था कचरे का निस्तारण

पिछले दो वर्षों के स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल रहे इंदौर और मैसूर सरीखे शहरों में गीले और सूखे कचरे का निस्तारण कर कम्पोस्ट खाद का निर्माण किया जा रहा है। जो कि निकायों के लिए न केवल कचरा प्रबंधन का श्रेष्ठ नमूना साबित हो रहा है। बल्कि निकाय की आय का भी स्रोत बन रहा है। इसके अलावा अपशिष्ट प्रबंधन के तहत इससे बिजली निर्माण भी किया जा सकता है। कुचामन में ऐसी व्यवस्था नहीं।

मैरिज गार्डन, अस्पताल, छात्रावास और होटल जैसे बड़े कचरा उत्पादकों में नाडेप तकनीकी से कंपोस्टिंग का प्रयोग किया जाना है। इस व्यवस्था पर 48 नंबर निर्धारित है।

2. संस्थाएं

स्थिति

शहर में किसी भी संस्था में ऐसा खाद उत्पादन की व्यवस्था नहीं बनाई है।

5. कचरा प्रबंधन | आधे भी अंक नहीं मिल पाएंगे

कचरा कलेक्शन से लेकर वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निष्पादन तक की पूरी प्रक्रिया के लिए लगभग 200 अंक निर्धारित हैं। कुचामन शहर के 35 वार्डों से कचरा कलेक्शन डंपिंग ग्राउंड पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और ऑटो टिपर के माध्यम से डंप किया जा रहा है। लेकिन कचरा प्लांट न लग पाने से इसका निष्पादन नहीं हो रहा। जिससे आधे से ज्यादा अंक कटने की आशंका जताई जा रही है।

कुचामन सिटी. शहर में डंपिंग यार्ड में बिखरा कचरा।

यदि शहर के कंपोस्ट उत्पाद मिनिस्ट्री ऑफ फर्टीलाइजर पोर्टल पर पंजीकृत है तो उस पर 20 अंक और यदि उसने जुलाई माह के पहले खाद बनाकर बेची है तो उस पर 30 अंक निर्धारित किए है।

3. खाद

स्थिति

शहर में अभी तक ऐसा कोई भी उपक्रम नहीं है।

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