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जल प्रबंधन आज की जरूरत, क्योंकि पृथ्वी पर मौजूद पानी में से मात्र आधा फीसदी ही हमारे उपयोग योग्य : डॉ. शर्मा

भास्कर संवाददाता| कुचामन सिटी शहर के गौड़ भवन में रविवार को दैनिक भास्कर जल मित्र अभियान से जुड़े राजू मूण्ड के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 04:50 AM IST

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    भास्कर संवाददाता| कुचामन सिटी

    शहर के गौड़ भवन में रविवार को दैनिक भास्कर जल मित्र अभियान से जुड़े राजू मूण्ड के संयोजन में विश्व भू-जल दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर पूर्व प्राचार्य व रसायन वैज्ञानिक डॉ. केजी शर्मा ने अपने शोध और अनुभव शेयर किए। संगोष्ठी में मौलासर से आए भास्कर जल मित्र व विषय विशेषज्ञ विनोदकुमार शर्मा ने संगोष्ठी में उपस्थितजनों को जल की बर्बादी रोकने और अन्य लोगों को भी पानी बचाने के लिए प्रेरित करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि एक मिथक प्रचलित है कि पूरी पृथ्वी के 70 प्रतिशत भाग पर पानी है। जबकि सच्चाई यह भी है कि पृथ्वी पर उपलब्ध पानी का 97 प्रतिशत हिस्सा तो समुद्र है, जिसका पानी मानव जीवन के लिए कोई उपयोग में नहीं आ सकता। इसके बाद शेष बचा पानी नदियों के रूप में समुद्र में पहुंचने वाला, ग्लेशियर और बर्फ के रूप में भी है। यानी हमें पृथ्वी पर मौजूद पानी में से केवल आधा प्रतिशत भाग ही उपयोग में लेने के लिए उपलब्ध होता है। उन्होंने कहा कि न केवल जल संरक्षण आज की जरूरत है बल्कि आज के समय में जल प्रबंधन की भी महत्ती आवश्यकता है। संगोष्ठी में पार्षद हेमराज चावला, सुशील तिवाड़ी, मधुसूदन शर्मा, चतुर्भुज शर्मा, राजू मूण्ड, दैनिक भास्कर के ब्यूरो चीफ विनोद कुमार गौड़, केमिस्ट सोयायटी अध्यक्ष श्रीपालसिंह ने भी जल संरक्षण को लेकर विचार व्यक्त किए।

    पृथ्वी का पानी वाष्पित होकर समुद्र में पहुंच रहा: शर्मा

    मुख्य वक्ता डॉ. केजी शर्मा ने अपनी बात आध्यात्म व सनातन धर्म की मान्यताओं से शुरू की और विज्ञान के तर्क भी पेश किए। उन्होंने कहा कि आज बात तो जल संरक्षण की की जाती है, लेकिन बारिश की कमी की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि भू-जल दोहन, पर्यावरण असंतुलन, पेट्रोलियम पदार्थों के अत्यधिक उपयोग के साथ ही कार्बन डाई ऑक्साइड के व्यापक उत्पादन और ऐशोआराम के चलते उत्पादित हो रही जहरीली गैस से न केवल ओजोन परत को नुकसान हो रहा है, बल्कि मानसूनी बारिश भी प्रभावित हो रही है। दुष्परिणाम यह आ रहे हैं कि पृथ्वी पर उपलब्ध अमूल्य पानी निरंतर वाष्पित होकर बादलों के रूप में समुद्र में बरस कर व्यर्थ बर्बाद हो रहा है। कार्यक्रम का संचालन मनोज भारद्वाज ने किया। इस दौरान मदनलाल महला, सुरेंद्रसिंह दीपपुरा, महेंद्र राठी, मीठूसिंह, रतनलाल जांगिड़, हरदीन भाकर आदि उपस्थित रहे। इस दौरान सभी उपस्थितजनों ने दैनिक भास्कर के जल मित्र अभियान को सराहा।

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Web Title: जल प्रबंधन आज की जरूरत, क्योंकि पृथ्वी पर मौजूद पानी में से मात्र आधा फीसदी ही हमारे उपयोग योग्य : डॉ. शर्मा
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