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कुचामन सिटी पालिका में 6 साल से हर बजट में सड़कों के लिए 4 करोड़, 7 साल से 100 मीटर ऊंची-नीची है सड़क

भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी नगरपालिका के लगातार दूसरे बोर्ड में बीते 6 सालों से हर साल बजट में शहर की सड़कों के...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 15, 2018, 05:00 AM IST

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    भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी

    नगरपालिका के लगातार दूसरे बोर्ड में बीते 6 सालों से हर साल बजट में शहर की सड़कों के लिए विभिन्न योजनाओं और अलग-अलग व्यय मद में करीब 4 करोड़ का प्रावधान किया जा रहा है। इस बजट से न केवल शहर में नई सड़कें बनाई जाने का प्रावधान रखा जाता है, बल्कि शहर की पुरानी सड़कों की मरम्मत और नवीनीकरण का भी आवश्यकतानुसार काम होना तय होता है। लेकिन शहर की एक ऐसी सड़क भी है जो बीते 7 सालों से न केवल अधूरी है, बल्कि इसके आधे-अधूरे निर्माण का दर्द भी आमजन को भुगतना पड़ रहा है। यानी अधूरे निर्माण से आए दिन इस सड़क पर हादसे होते हैं। इसके बावजूद पालिका के जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे।

    खास बात यह है कि नगरपालिका के चेयरमैन, अिधशाषी अधिकारी इस सड़क से होकर महीने में 15-20 बार तो निकलते ही हैं। वहीं नगरपालिका के 35 में से औसतन 10 पार्षद रोजाना इस सड़क से होकर गुजरते हैं। लेकिन पालिका की बैठक में इस सड़क पर कभी बात उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। दरअसल, हम बात कर रहे हैं बस स्टैंड से डीडवाना की ओर जाने वाले शहर के प्रमुख मार्ग पर कनोई पार्क के पास से अम्बेडकर सर्किल होते हुए गुजरने वाली सड़क की। इस ऊंची-नीची सड़क और आधे-अधूरे डिवाइडर से बरसों से दुर्घटनाएं बढ़ रही है।

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    लापरवाही

    शहर के कनोई पार्क के पास की सड़क पर जैसे ही कोई पहुंचता है तो हैरान रह जाता है। यहां न तो पूरी तरह से सड़क बन पाई और न ही डिवाइडर बना। आधी सड़क करीब एक से डेढ़ फीट ऊंची है तो दूसरा हिस्सा काफी नीचे। इस कारण यहां कई बार वाहनचालक दुर्घटना ग्रस्त भी हो चुके हैं। अम्बेडकर सर्किल की गोलाई की यह सड़क शहर के सौंदर्यीकरण के लिहाज से विकसित की जानी थी। करीब 6 वर्ष पूर्व यह सड़क बनाने काम शुरू किया गया। जिसमें डिवाइडर बनाकर सड़क का लेवल ऊंचा करने की योजना थी। बरसों बाद भी यह प्रोजेक्ट अधूरा है।

    इस सड़क के जरिए बढ़ानी थी सुंदरता, बिगड़ गया शहर का सौंदर्य

    कुचामन सिटी. अम्बेडकर सर्किल पर ढलान होने के कारण यहां बारिश के पानी का भराव पार्क की दीवार के सहारे होता था। इस कारण सड़क का लेवल ऊंचा कर सुंदरता बढ़ाने के लिए डिवाइडर का निर्माण किया जाना था।

    शहर की प्रमुख समस्या को लेकर प्रकाशित इस समाचार पर आप अपनी प्रतिक्रिया वॉट्सएप 9829484527 पर अथवा ई-मेल से भी दे सकते हैं।

    एक बार काम अटका तो दुबारा देखा भी नहीं

    अटका काम

    जब यहां काम शुरू करवाया, उस समय सड़क का लेवल बढ़ने से यहां पुराने निर्माण का लेवल सड़क से नीचे हो रहा था। इसका स्थानीय दुकानदारों ने विरोध जताया। इसके चलते सड़क का काम बीच में ही अटक गया।

    यह प्रावधान

    बजट में हर साल 4 करोड़ का प्रावधान

    इस साल 30 जनवरी को हुई पालिका की बजट बैठक में कंक्रीट सड़कों के लिए 250 लाख, डामर सड़कों के लिए 50 लाख, अन्य सड़कों के मद में 100 लाख रुपए का प्रावधान रखा गया। यही नहीं सौंदर्यीकरण मद में 10 लाख, सड़क-नाली विशेष अनुदान मद में 50 लाख रुपए के प्रावधान किए थे। ऐसे ही प्रावधान पिछले बरसों में रखे गए। लेकिन मात्र 100 मीटर की आधी-अधूरी सड़क के लिए कोई बजट नहीं मिल पाया।

    दुकानदारों के विरोध से अटका काम

    एसडीएम नहीं कर पाए मॉनिटरिंग, पार्षद भी फेल

    प्रशासनिक मुखिया के तौर पर शहर में इस अवधि में 2 एसडीएम बदल चुके हैं। वर्तमान एसडीएम रामसुख गुर्जर खुद कमोबेश एक बार रोजाना इस मार्ग से गुजरते हैं। वे भी जनता की इस तकलीफ की मॉनिटरिंग नहीं कर पाए। शहर के करीब 38 हजार मतदाताओं के प्रतिनिधि के रूप में चुने गए पालिका के 35 पार्षद भी इस मामले में कभी पालिका में पुरजोर तरीके से बात नहीं रख पाए। लिहाजा सभी पार्षद अपनी भूमिका से फेल ही साबित हुए हैं।

    ये जिम्मेदार

    जिन्होंने कभी इस सड़क पर नहीं चर्चा तक नहीं की

    बीते 7 साल में नगरपालिका में ये तीसरे पालिकाध्यक्ष हैं। इनसे पूर्व वरिष्ठ भाजपा नेता हरीश कुमावत व उनकी प|ी यशोदा कुमावत पालिकाध्यक्ष की कुर्सी संभाल चुके हैं। तीनों ने ही इस अधूरी सड़क-डिवाइडर के लिए कभी कोई प्रयास तक नहीं किया।

    हाल ही में दूसरी बार ईओ के रूप में ज्वाइन करने वाले राकेश कुमार शर्मा से पूर्व यहां किशनलाल कुमावत, हेमाराम चौधरी व सुनील चौधरी भी रह चुके हैं। लेकिन इस सड़क के अधूरेपन को वे भी महसूस तक नहीं कर पाए।

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