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रामकथा के पांचवें दिन संत बोले- मन में भाव विभोर की भावना ही भांवता है, जसवंतगढ़ में 22 दिन से चल रहा भजन-कीर्तन

भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी निकटवर्ती गांव भांवता के बालाजी मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के पांचवे दिन...

Dainik Bhaskar

Jun 09, 2018, 05:05 AM IST
रामकथा के पांचवें दिन संत बोले- मन में भाव विभोर की भावना ही भांवता है, जसवंतगढ़ में 22 दिन से चल रहा भजन-कीर्तन
भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी

निकटवर्ती गांव भांवता के बालाजी मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के पांचवे दिन कथावाचक संत रमतीराम ने भगवान श्रीराम व सीता माता के वनवास के दौरान कुटिया में रहने का उदाहरण देते हुए बताया कि एक महल की अपेक्षा एक कुटिया में जीवन यापन कई गुना शांतिपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि जीवन की मोहमाया के जंजाल से कुटिया में जीवन कई गुना सुंदर होता है जैसे श्रीराम ने अयोध्या के ऐश्वर्य पूर्ण जीवन को त्यागकर वन में वास किया वो भी एक कुटिया में। उन्होंने बताया कि भगवान के अपराधी को तो क्षमा हो सकती है लेकिन साधु संतों के प्रति किए गए दुर्व्यवहार की कभी क्षमा नहीं मिलती है। दुनिया जितना हमे अच्छा समझती है उतने अच्छे हम होते नहीं है। सूर्पणखा का प्रसंग देते हुए बताया कि जहां पर भक्ति होती है वहां पर वासना का वास नहीं होता है अर्थात भक्ति को ही सर्वोपरी बताया। आचार्य पंडित रामदुलारे ने श्रद्धालुओं को गांव भांवता के नाम की व्याख्या की जिसमे बताया कि मन में भाव विभोर की भावना को ही भांवता कहा गया है। आचार्य ने राजनीति व धन के बारे में बताया कि नीति के बिना कभी राज नहीं चलता है और धर्म के बिना कभी धन नहीं टिकता। इस अवसर पर संगीतमय कथा में हजारों महिला पुरुष भक्त मौजूद रहे।

कुचामन सिटी. भांवता में चल रही संगीतमय कथा में मौजूद श्रृद्धालु

जसवंतगढ़| स्थानीय श्यामजी मंदिर गली नंबर सात में पिछले 22 दिन से लगातार भजन कीर्तन तथा अन्य धार्मिक कार्यक्रम अनवरत चल रहे है। मंदिर ट्रस्टी व्यवस्थापक रामचंद्र तोषनीवाल ने बताया कि सुबह के कार्यक्रम में मंदिर परिसर से प्रभात फेरी का कार्यक्रम शुरू होता है, जो गांव के मुख्य मार्गो से होता हुआ मंदिर परिसर पहुंचता है। मंदिर परिसर में रामायण का पाठ तथा दोपहर को तीन घंटे तक भजन कीर्तन का कार्यक्रम महिलाओं द्वारा नृत्य प्रस्तुत किया जाता है। आरती से पहले भजन प्रस्तुतियों का कार्यक्रम होता है। तोषनीवाल ने बताया कि यह पुरुषोत्तम मास का धार्मिक आयोजन 16 मई से शुरू हुआ था जो आगामी 13 जून तक चलेगा।

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रामकथा के पांचवें दिन संत बोले- मन में भाव विभोर की भावना ही भांवता है, जसवंतगढ़ में 22 दिन से चल रहा भजन-कीर्तन
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