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5 साल से दसवीं के परिणाम में लड़कों का दबदबा इस बार भी 2.34% अंकों से पिछड़ गई लड़कियां / 5 साल से दसवीं के परिणाम में लड़कों का दबदबा इस बार भी 2.34% अंकों से पिछड़ गई लड़कियां

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Bhaskar News Network

Jun 12, 2018, 05:00 AM IST
5 साल से दसवीं के परिणाम में लड़कों का दबदबा इस बार भी 2.34% अंकों से पिछड़ गई लड़कियां
28021 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी

21137 विद्यार्थी पास हुए

पास प्रतिशत : 75.43%

लड़के

पास प्रतिशत : 76.58%

लड़कियां

पास प्रतिशत : 74.24%

मजबूती: 5 सालों में 24.43%आगे बढ़े

हमारे लिए यह अच्छा है कि हर साल दसवीं के परिणामों में सुधार आ रहा है। पिछले 5 सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो 10वीं के परिणामों में 24.43 फीसदी सुधार हुआ है। 2014 में परिणाम 51 प्रतिशत था जो अब बढ़कर 75.43 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

14265 ने परीक्षा दी

10924 पास हो पाए

13756 ने परीक्षा दी

10213 पास हुई

बांसवाड़ा. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड 10वीं का परिणाम पिछले साल की तुलना में 3.06 फीसदी सुधरकर 75.43 प्रतिशत रहा। सत्र 2017-18 में जिले से कुल 28021 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। इनमें 21137 विद्यार्थी पास हुए। पिछले 5 साल में 10वीं के परिणामों लड़कों ने हमेशा बाजी मारी है, यह सिलसिला इस बार भी जारी रहा। लड़कों की सफलता प्रतिशत 76.58 फीसदी रहा वहीं लड़कियों का परिणाम 74.24 फीसदी रहा। जो लड़कों से 2.34 फीसदी कम है। इस साल परिणामों में बांसवाड़ा जिले ने भी 7 पायदान छलांग लगाकर प्रदेश में 22वां स्थान हासिल किया। पिछली बार हम 29वें पायदान पर थे।

कुशलगढ़ की श्रुति नाहटा पुत्री कमलेश नाहटा ने 96.17 प्रतिशत अंक हासिल किए। 600 में से 577 अंक आए। अपनी इस सफलता को बयां करते हुए श्रुति भावुक हो उठी। विशेष रूप से उसने अपनी यह सफलता अपनी मां ममता नाहटा और छोटी बहन श्रेया नाहटा स्कूल डायरेक्टर प्रशांत नाहटा को दिया। श्रृति ने कहा मां का सहयोग मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती। थोड़े बहुत अप्स एंड डाउन मुझे हताश कर देती थी, लेकिन मां की बदौलत हार नहीं मानी। मैं हमेशा से नियमित 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती थी। श्रुति रात की बजाय सुबह उठकर पढ़ना पसंद करती है। वर्तमान में वो उदयपुर में नीट की कोचिंग ले रही हैं। श्रुति के पिता कमलेश केमिस्ट हैं और मां गृहिणी है।

कमजोरी: प्रथम श्रेणी से ज्यादा तृतीय श्रेणी में पास हुए विद्यार्थी

आंकड़ों में बढ़ रहे प्रतिशत से जरूर खुशी हो सकती है। लेकिन गुणवत्ता के तौर पर काफी पीछे हैं। जहां प्रथम श्रेणी के की तुलना में द्वितीय और तृृृृतीय श्रेणी से अधिक छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हो रहे हैं। इस साल 21137 छात्र छात्राएं पास हुए हैं। लेकिन इनमें महज 4691 ही प्रथम श्रेणी प्राप्त कर सके हैं। वहीं 11324 विद्यार्थी ही द्वितीय श्रेणी से और 5122 विद्यार्थी तृतीय श्रेणी से पास हुए हैं। यहीं स्थिति पिछले 5 सालों की भी बनी हुई है।

जिले में दूसरे पायदान रही ठीकरिया निवासी निकिता पुत्री भूपेंद्र जोशी ने 600 में 576 नंबर हासिल कर 96 प्रतिशत स्कोर किया। निकिता का कहना है कि परीक्षा के दिनों में तो वह महज 2 घंटे ही मुश्किल से सोती थी, बस एक ही लक्ष्य था अच्छे नंबर से माता पिता का नाम रोशन करना। प्री बोर्ड के परिणामों में वो आउटकम नहीं मिला जो उम्मीद थी, इस दौरान निराश हो गई। लेकिन तभी मां मीना जोशी और स्कूल के स्टाफ ने हार नहीं मानने के लिए मोटिवेट किया। रात को 3 बजे सोती थी और पढ़ाई के लिए 5 बजे ही उठ जाती थी। मां मेरे लिए भगवान के बराबर है, कई बार ऐसे मौके आए, उसने रात को 1 बजे उठकर भी मेरे लिए खाना बनाया।

ऐसे बढ़े हम आगे

साल परिणाम

2014 51

2015 64

2016 69.65

2017 72.37

2018 75.43

व्यवसायिक परीक्षा में 85.33% पास

प्री बोर्ड में कम रिजल्ट तो आगे बढ़ने की ठानी

5 वर्षों का परिणाम

वर्ष पास प्रथम द्वितीय तृतीय

2014 14501 1526 6798 6171

2015 17742 2233 8750 6758

2016 19006 3492 10203 5311

2017 20659 4034 11011 5614

2018 21137 4691 11324 5122

आरबीएसई के के माध्यमिक व्यावसायिक परीक्षा का रिजल्ट भी सोमवार को घोषित किया गया। इसमें जिले की 30 स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। जिनका ऑवरऑल परिणाम 85.33 प्रतिशत रहा। कुल 1514 परीक्षार्थी शामिल हुए।

गढ़ी के पायोनियर स्कूल में पढ़ने वाले हितार्थ पुत्र सुरेंद्र जैन ने 95.67 प्रतिशत अंक हासिल किए है। उसके 600 में से 574 नंबर है। बोर्ड के एक्जाम को लेकर हमेशा बच्चों पर पढ़ने वाले साइकोलॉजिकल दबाव के संबंध में हितार्थ ने बताया कि अगर कोई लक्ष्य जीवन में तय कर रखा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। यहीं सोच रखने से हर कक्षा अासान हो सकती है। हितार्थ ने सफलता का श्रेय माता रंजीता जैन, पिता सुरेंद्र जैन और स्टाफ को ताे दिया। लेकिन विशेष रूप से यह सफलता उसने अपने दादाजी अजबलाल जैन के नाम की। जो रात हो या दिन हर बार पढ़ाई करने के दौरान साथ में रहते। रात को पढ़ते वक्त भी जागा करते थे।

नेल्सन पब्लिक स्कूल परतापुर में अध्ययनरत कार्तिक पुत्र विमलकांत द्विवेदी ने दसवीं बोर्ड में 95.67 प्रतिशत और 600 में से 574 अंक हासिल किए। कार्तिक वर्तमान में कोटा में इंजीनियरिंग करने के लिए कोचिंग ले रहा है। उसने बताया कि तनाव इंसान का मनोबल तोड़ देता है। इसलिए मैं हमेशा वैसे ही 10वीं की पढ़ाई करता जैसे पहले करता आ रहा था। कार्तिक ने बताया कि उसके पिता हमेशा कहा करते हैं कि कोई टेस्ट में आने वाले नंबर अपना पूरा मूल्यांकन नहीं करते बल्कि वो हमारी वर्तमान स्थिति को बताते हैं। जिससे हम सुधार कर सके। कंपीटीशन हमेशा स्वयं से होना चाहिए। कार्तिक के पिता विमलकांत और माता प्रतिभा द्विवेदी टीचर हैं।

जिलों की पांच स्कूलों का परिणाम 41.29 %, 51 छात्र और 32 छात्राएं पास

प्रवेशिका: 201 में से सिर्फ 83 पास, सिर्फ 5 पास प्रथम श्रेणी

बांसवाड़ा| माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के प्रवेशिका के परिणामों ने खासा निराश किया। जिले की 5 स्कूलों के कुल 41.29 फीसदी ही विद्यार्थी पास हो सके। प्रवेशिका की परीक्षा में 201 विद्यार्थी शामिल हुए, इसमें 83 पास हुए। इनमें भी 51 छात्र और 32 छात्राएं शामिल रही। प्रवेशिका के परिणामों की स्थिति यह है कि महज 5 विद्यार्थी ही प्रथम श्रेणी से पास हुए। 56 द्वितीय और 22 तृतीय श्रेणी से। इसमें भी लड़कों का प्रतिशत 49.51 और लड़कियों का परिणाम 32.65 फीसदी रहा ।राजकीय प्रवेशिका संस्कृत विद्यालय बांसवाड़ा में इस साल 11 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। इनमें 3 पास हुए। परिणाम 27.27 फीसदी रहा। राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल अरथूना का परिणाम 63.64 फीसदी रहा। 11 परीक्षार्थियों में 7 पास हुए। राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल करगचिया में 56 में से 14 पास हुए। परिणाम महज 25 फीसदी रहा। राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल सिलथिया में 41 में से 15 पास हुए। परिणाम 36.59 प्रतिशत रहा। श्री एकलव्य वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल गनोड़ा में सर्वाधिक 82 विद्यार्थियाें ने प्रवेशिका की परीक्षा में भाग लिया। जिसमें 44 विद्यार्थी पास हुए। परिणाम 53.66 फीसदी रहा।

अनिता भगोरा

5 साल से दसवीं के परिणाम में लड़कों का दबदबा इस बार भी 2.34% अंकों से पिछड़ गई लड़कियां
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