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नॉन कमांड क्षेत्र में मानसून के साथ घर लौटे लोग, यहां 4 माह खेती, 8 माह रहता है पलायन

कुशलगढ़/तलवाड़ा. मानसून की पहली मूसलाधार बारिश नॉन कमांड क्षेत्र के लिए अमृत बनकर आई है। साल में सिर्फ बारिश के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 03, 2018, 05:10 AM IST

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    कुशलगढ़/तलवाड़ा. मानसून की पहली मूसलाधार बारिश नॉन कमांड क्षेत्र के लिए अमृत बनकर आई है। साल में सिर्फ बारिश के दिनों में नॉन कमांड क्षेत्र में खरीफ की फसल करने वाले किसानों के चेहरे खिल गए। मानसून की पहली बारिश शुरू होते ही कुशलगढ़ के घाटा क्षेत्र के रामगढ़, टिमेड़ा, छोटी सरवा, निश्नावट, मोहकमपुरा, बड़ी सरवा, सज्जनगढ़, छोटी सरवन, आंबापुरा क्षेत्र में किसानों ने खेतों में बुवाई शुरू कर दी। किसान खाद बीज का बंदोबस्त करने में लग गए। इन क्षेत्रों में माही की नहरों का पानी नहीं पहुंचने के कारण रबी की फसल नहीं हो पाती है। कुछ जगह पर बोरवेल से सिंचाई करते हैं। कुशलगढ़ के घाटा क्षेत्र में दो दिन से बुवाई का काम शुरू कर दिया गया है। गर्मी के दिनों में मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में रोजगार के लिए जाने वाले लोग भी बारिश के मौसम में वापस आ जाते हैं। यहां पर वह अपनी जमीन में फसल बुवाई करने में जुट जाते हैं। चार माह तक बारिश की सीजन में यहीं रहकर खेती और रोजगार करते हैं। इसके बाद 8 माह दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए चले जाते हैं। संसदीय सचिव भीमाभाई डामोर द्वारा कुशलगढ़ के नॉन कमांड क्षेत्र में माही का पानी पहुंचाने के प्रयास चल रहे हैं, अगर यहां पर माही का पानी नहरों के जरिये पहुंच जाएगा तो यहां के लोगों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि इस साल मानसून की पहली बारिश अच्छी होने पर कमांड क्षेत्र में भी किसानों ने बुवाई शुरू कर दी है।

    कुशलगढ़ के निश्नावट गांव के खेत में बुवाई करता किसान परिवार

    पुलिया पानी में डूबी, 15 पंचायतों के लोग परेशान

    कुशलगढ़ को मध्यप्रदेश को जोड़ने वाली सड़क पर बनी पुलिया पहली बारिश में ही बंद हो गई।

    छोटी सरवा| मानसून की पहली बारिश में ही कुशलगढ़ के घाटा क्षेत्र की झेर नदी पर बनी पुलिया पानी से घिर गया। ऐसे में लोगों और वाहनचालकों की आवाजाही पूरी तरह से रुक गई।

    ग्रामीणों ने बताया कि तीन साल पहले फोर वाटर योजना में पुल के आगे नदी पर एनिकट बना देने से पानी पुलिया पर आ जाता है, जिस कारण 15 ग्राम पंचायतों के लगभग 50 हजार से अधिक लोग खासे परेशान हैं। हालांकि इस पुल के जीर्णोद्धार मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान बजट स्वीकृत हो चुका है, लेकिन बारिश के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के देवेन्द्र जोशी, संजय खमेसरा, कपिल उपाध्याय, पिंटू बसेर, संतोष उपाध्याय सहित ग्रामीणों ने बताया कि झेर पुलिया बारिश में डूबने के बाद विभाग की ओर से अतिरिक्त बाईपास की व्यवस्था नहीं करने से लोगों को 8 किमी अधिक चक्कर लगाकर अपने गंतव्य पर जाना पड़ रहा है। साथ ही दर्रा गोपालपुरा सड़क भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से आवाजाही में भारी समस्या है।

    बोरी गांव में हादसे को न्योता देता पुल

    परतापुर| गढ़ी उपखंड के आदर्श गांव बोरी के बसस्टैंड से गांव की ओर जाने वाली सड़क पर बनी पुलिया बारिश में टूट गई है, ऐसे में आवाजाही के दौरान बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इसी सड़क से बच्चे स्कूल जाते हैं। टूटी पुलिया से गुजरते वक्त हादसा होने का डर बना हुआ है। ग्रामीणों ने टूटी पुलिया की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है।

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