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कुशलगढ़ में आदिवासी समाज के पहले सामूहिक विवाह में 6 जोड़े बने हमसफर

उपखंड मुख्यालय पर मोर आश्रम के पास सोमवार को आदिवासी समाज का पहला सामूहिक विवाह समारोह हुआ। इसमें 6 जोड़ों का आर्य...

Dainik Bhaskar

May 22, 2018, 05:25 AM IST
कुशलगढ़ में आदिवासी समाज के पहले सामूहिक विवाह में 6 जोड़े बने हमसफर
उपखंड मुख्यालय पर मोर आश्रम के पास सोमवार को आदिवासी समाज का पहला सामूहिक विवाह समारोह हुआ। इसमें 6 जोड़ों का आर्य समाज की पद्धति से विवाह कराया गया। आदिवासी भील समग्र विकास परिषद के सान्निध्य में हुए इस सामूहिक विवाह में पूरा आदिवासी समाज एकजुट नजर आया। सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की दिशा में शुरू की गई इस अनूठी पहल का सभी ने स्वागत किया।

सामूहिक विवाह समारोह के आयोजक मांगीलाल वसुनिया के अनुसार क्षेत्र के निश्नावट, नागदा, वसूनी, पाड़ला, हथियादिल्ली, उंडवा, बावड़ीपाड़ा, नल्दा, सातसेरा, रसोड़ी समेत आसपास गांवों के लोग इस समारोह में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में संसदीय सचिव भीमाभाई डामोर, भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष कानहींग रावत, पूर्व बीईईओ जोरजी कटारा, पूर्व प्रधान विजयसिंह देवदा, कैलाश बारोट, थावरचंद कटारा, बीईईओ जीतमल पणदा, पूर्व मंडल अध्यक्ष तेरचंद अड़, विजयसिंह खड़िया, राकेश पारगी, भास्कर निनामा, जोहनसिंह देवदा, लालाराम बारिया, नरसिंग गिरी महाराज, समाजसेवी कलसिंह भाई बिलीपाड़ा, पटवारी रामचंद्र देवदा, कल्लु महाराज, लालसिंह मईड़ा समेत सैकड़ों समाजजन मौजूद रहे। कुशलगढ़ में पहली बार हुए सामूहिक विवाह समारोह में सभी जोड़ों का विवाह आर्य पद्धति से आचार्य दिलीपकुमार शास्त्री व लवकुमार ने विधि विधान और मंत्रोच्चार से कराया। समाज का लक्ष्य आने वाले साल 101 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराने का है, जिसके तहत 33 जोड़ों का पंजीयन होने की जानकारी दी गई।

नोतरे का स्वरूप बिगड़ा इसलिए यह कदम उठाया

वनवासी कल्याण परिषद के अध्यक्ष विजयसिंह देवदा ने बताया कि समाज के बुजुर्गों द्वारा सहयोग की भावना से शुरू की गई नोतरा प्रथा का स्वरूप फिलहाल पूरी तरह से बदल गया है। आज की स्थिति में हर परिवार अधिकांश नोतरे में नहीं जा पाता है। साथ ही आने जाने में धन और समय भी खर्च होता है। कई बार नोतरे में नहीं जा पाने के कारण विवाद जैसी स्थिति बन जाती है। इसके अलावा शादी समारोह में शराब परोसना व डीजे की गलत परंपरा ने भी गरीब परिवारों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है। समाज के युवाओं की एक सार्थक पहल से दूरगामी परिणाम सामने आएंगे।

सामाजिक कुरीतियों को मिटाने का संकल्प

भील समाज ने सामूहिक विवाह समारोह आयोजित कर फिजूलखर्च रोकने का अच्छा काम शुरू किया है। इस काम में परिषद से जुड़े पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के अलावा समाज के गणमान्य नागरिकों ने पूरा सहयोग किया। सभी ने सामाजिक कुरीतियों को मिटाने, फिजूलखर्च रोकने, संस्कृति को बचाने, परंपराओं का पालन करने का संकल्प लिया।

सामूहिक विवाह में बेटियों को यथाशक्ति कन्यादान भी दिया

समारोह में आए भील समाजजन, पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने विवाह में यथाशक्ति कन्यादान भी किया। कुशलगढ़ प्रधान रमीला खड़िया की ओर से प्रत्येक जोड़े को 1 हजार रुपए नकद, संसदीय सचिव की ओर से प्रति जोड़ा 501 रुपए दिए गए। इसके अलावा भील समग्र विकास परिषद के कार्यकर्ताओं ने भी सहयोग राशि दी। आयोजक मंडल की ओर से प्रति जोड़ा 12 हजार का पंजीयन शुल्क लेकर पूरा रसोईघर का सामान, बर्तन आदि भेेंट स्वरूप दिए। सामूहिक विवाह समारोह के बाद पारंपरिक गैर नृत्य किया।

कुशलगढ़ में भील समग्र विकास परिषद की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में मौजूद आदिवासी समाज के जोड़े।

कुशलगढ़. मंडप में विवाह की रस्म अदा करने के दौरान मौजूद दूल्हा-दुल्हन।

सामूहिक विवाह के आयोजक मांगीलाल गरासिया, विजयसिंह देवदा, विजयसिंह खड़िया, वनवासी कल्याण परिषद के आचार्य दिलीप शास्त्री ने कहा कि आदिवासी समाज में सुधार और विकास की दिशा में यह एक अच्छी पहल है, जिससे समाज में समानता का भाव जाग्रत होगा। सभी ने समाजजनों से फिजूलखर्च रोकने का आह्वान किया

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कुशलगढ़ में आदिवासी समाज के पहले सामूहिक विवाह में 6 जोड़े बने हमसफर
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